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-नाराज 19 गांव के ग्रामीण सात जुलाई को उतरेंगे सड़क पर करेंगे 12 किलोमीटर पैदल मार्च
-सरकार की उदासीनता और जन प्रतिनिधियों की वादाखिलाफी के कारण नाराज हैं ग्रामीण
संवाद सहयोगी, लखीसराय :
लखीसराय । लखीसराय शहर के पचना रोड से पतनेर, मोरमा, तिलोखर होते हुए शेखपुरा जिले को जोड़ने वाली 12 किलोमीटर लंबी सड़क जर्जर हो चुकी है। यह सड़क पूरी तरह गड्ढे में तब्दील है। बरसात का मौसम रहने के कारण गड़ढे में जमा पानी से सड़क पर तालाब बन गया है। कीचड़ और जमा पानी से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सड़क की स्थिति यह है कि बाइक से भी चलना जोखिम भरा हो गया है। इस सड़क की मरम्मत कराने की मांग लोकसभा चुनाव से पहले से ही ग्रामीण करते आ रहे हैं। लेकिन आज तक सड़क की सूरत नहीं बदली। ग्रामीणों को इस बात की पीड़ा है कि दो जिलों को जोड़ने वाली इस सड़क से 19 गांव की बड़ी आबादी भी जुड़ी है। लेकिन इस जर्जर सड़क की सुध किसी ने नहीं ली। जनप्रतिनिधि भी सिर्फ झूठे वायदे करते रहे। सरकार और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से नाराज क्षेत्र के ग्रामीण गोलबंद होकर जनआंदोलन का एलान कर दिया है। पतनेर गांव में 28 जून को कुल 19 गांव के ग्रामीणों ने एक बैठक कर पीडब्ल्यूडी रोड नहीं तो वोट नहीं का संकल्प लेकर आंदोलन का शंखनाद किया। जानकारी हो कि लखीसराय के पूर्व विधायक स्व. यदुवंश प्रसाद सिंह, स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे स्व. अखिलेश्वर सिंह का पतनेर पैतृक गांव है। लेकिन आज विकास की इस दौर में भी जिला मुख्यालय से पूर्व विधायक के गांव तक जाने वाली सड़क की दुर्दशा न्याय के साथ विकास के हर दावे की पोल खोल रही है। ग्रामीण वीरेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. नीरज कुमार, अनिल सिंह, रितेश कुमार, पूर्व वार्ड पार्षद देवेंद्र केवट, महेश पासवान, श्यामसुंदर यादव, अमीर यादव, रामाधीन पासवान, रामचंद्र यादव, मु. मकसूद आदि ने कहा कि अब चुप रहने और इंतजार करने का समय चला गया है। लखीसराय पचना रोड से पतनेर, मोरमा, तिलोखर तक करीब 12 किलोमीटर दूरी तक सड़क जर्जर होकर टुकड़े टुकड़े में गड्ढा बन गया है। आगामी विधानसभा चुनाव में तभी मतदान में भाग लिया जाएगा जब उसके पहले सड़क का निर्माण हो जाएगा। सड़क निर्माण की मांग को लेकर आगामी सात जुलाई को तिलोखर, मोरमा, पतनेर से लेकर 19 गांव के ग्रामीण पैदल मार्च कर लखीसराय बाइपास तक जाएंगे। 12 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा निकालकर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जनांदोलन करने का निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों ने इस आंदोलन के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाकर राज्य के मुख्यमंत्री को जर्जर सड़क की समस्या से अवगत कराने, मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन करने की भी रणनीति बनाई है।