

स्कूलों में जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) से जुड़ी शिक्षा दी जाए
समस्या
आज जलवायु परिवर्तन की हमारी प्रतिक्रिया में दो चीजें शामिल हैं:
पहला, उत्सर्जन (एमिशन) को कम करना और वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को स्थिर करना (जिनसे तापमान बढ़ता है)। दूसरा, जलवायु (क्लाइमेट) के साथ वास्तविक और अपेक्षित समायोजन करना (तालमेल बिठाना)
जलवायु परिवर्तन से अपने देश, दुनिया और हमारी पृथ्वी को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर कई कदम उठाने होंगे - सही नीतियां, सरकार द्वारा वित्तीय और तकनीकी प्रोत्साहन। पर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इंसानियत की जीत तभी मुमकिन होगी जब लोग ये समझेंगे कि जलवायु परिवर्तन असल में है क्या, उससे हमें और आने वाली पीढ़ी को क्या खतरा है और उसे कैसे रोका जा सकता है।
जिस तरह लोग जलवायु परिवर्तन के बारे में सोचते हैं, उसे बदलने की ज़रूरत है और इसका पहला कदम है स्कूलों में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा प्रदान करना। इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है।
जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में शिक्षा की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा मिलने लगे, तो लोग ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को समझेंगे और उससे लड़ने के लिए एकजुट हो पाएंगे। युवाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रति अपने रवैए को बदलने में मदद मिलेगी। ग्लोबल वॉर्मिंग को घटाने के लिए लोग एक नई जीवन शैली अपनाने में सशक्त महसूस करेंगे।
जलवायु आपातकाल (क्लाइमेट इमरजेंसी) पर जागरूकता बढ़ाने के लिए दुनिया भर के छात्र अपना स्कूल छोड़कर इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठा रहें हैं। ऐसे में सरकार को पर्यावरण और शैक्षिक नीतियों में भी बदलाव करने होंगे। जलवायु परिवर्तन पर हमारे देश की प्रतिक्रिया में शिक्षा पर ज़ोर देना और उसे ठोस तरीक़े से लागू करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
जब शिक्षा के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदलेगा तो स्कूलों में ही हम सब सस्टेनेबल लिविंग के बारे में सीख सकेंगे, और एक ऐसी जीवन शैली अपना सकेंगे जिससे हम पर जलवायु परिवर्तन का ख़तरा और नही बढ़ेगा।
मैं जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे सभी युवाओं की ओर से माँग करता हूँ कि सरकार द्वारा सभी स्कूलों में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा शामिल की जाए।
मैंने ये पेटीशन शुरू की है क्यूँकि मुझे विश्वास है कि युवाओं में दुनिया बदलने की ताकत है! उम्मीद करता हूँ कि आप भी हमारा साथ ज़रूर देंगे।
आशा और आपके समर्थन के साथ,
अनिकेत गुप्ता, आदित्य दुबे, द्विशोजयी बनर्जी और सहर तनेजा

समस्या
आज जलवायु परिवर्तन की हमारी प्रतिक्रिया में दो चीजें शामिल हैं:
पहला, उत्सर्जन (एमिशन) को कम करना और वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को स्थिर करना (जिनसे तापमान बढ़ता है)। दूसरा, जलवायु (क्लाइमेट) के साथ वास्तविक और अपेक्षित समायोजन करना (तालमेल बिठाना)
जलवायु परिवर्तन से अपने देश, दुनिया और हमारी पृथ्वी को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर कई कदम उठाने होंगे - सही नीतियां, सरकार द्वारा वित्तीय और तकनीकी प्रोत्साहन। पर जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर इंसानियत की जीत तभी मुमकिन होगी जब लोग ये समझेंगे कि जलवायु परिवर्तन असल में है क्या, उससे हमें और आने वाली पीढ़ी को क्या खतरा है और उसे कैसे रोका जा सकता है।
जिस तरह लोग जलवायु परिवर्तन के बारे में सोचते हैं, उसे बदलने की ज़रूरत है और इसका पहला कदम है स्कूलों में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा प्रदान करना। इसलिए मैंने ये पेटीशन शुरू की है।
जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ इस लड़ाई में शिक्षा की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा मिलने लगे, तो लोग ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को समझेंगे और उससे लड़ने के लिए एकजुट हो पाएंगे। युवाओं को जलवायु परिवर्तन के प्रति अपने रवैए को बदलने में मदद मिलेगी। ग्लोबल वॉर्मिंग को घटाने के लिए लोग एक नई जीवन शैली अपनाने में सशक्त महसूस करेंगे।
जलवायु आपातकाल (क्लाइमेट इमरजेंसी) पर जागरूकता बढ़ाने के लिए दुनिया भर के छात्र अपना स्कूल छोड़कर इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज़ उठा रहें हैं। ऐसे में सरकार को पर्यावरण और शैक्षिक नीतियों में भी बदलाव करने होंगे। जलवायु परिवर्तन पर हमारे देश की प्रतिक्रिया में शिक्षा पर ज़ोर देना और उसे ठोस तरीक़े से लागू करना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
जब शिक्षा के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदलेगा तो स्कूलों में ही हम सब सस्टेनेबल लिविंग के बारे में सीख सकेंगे, और एक ऐसी जीवन शैली अपना सकेंगे जिससे हम पर जलवायु परिवर्तन का ख़तरा और नही बढ़ेगा।
मैं जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे सभी युवाओं की ओर से माँग करता हूँ कि सरकार द्वारा सभी स्कूलों में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी शिक्षा शामिल की जाए।
मैंने ये पेटीशन शुरू की है क्यूँकि मुझे विश्वास है कि युवाओं में दुनिया बदलने की ताकत है! उम्मीद करता हूँ कि आप भी हमारा साथ ज़रूर देंगे।
आशा और आपके समर्थन के साथ,
अनिकेत गुप्ता, आदित्य दुबे, द्विशोजयी बनर्जी और सहर तनेजा

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25 अक्टूबर 2021 पर पेटीशन बनाई गई