#StandWithRituJaiswal

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#standwithritujaiswal

एक महिला जो सुख चैन की जिंदगी का त्याग कर देती है मात्र इसलिए की वह जिस पंचायत की बहू है वहाँ बिजली, सड़क, शिक्षा का नामोनिशान तक नही है। इन सब परिस्थितियों से जब वह वाकिफ़ होती है तो वह खुद से एक वादा कर लेती है, प्रण कर लेती है कि इस क्षेत्र की हालात को बदल कर रहूँगी और इसी प्रण को पूरा करने के लिए लोकतंत्र के सबसे निचले पद ग्राम पंचायत मुखिया के रुप में निर्वाचित हो कर आती है उस क्षेत्र में जहाँ के लोगो ने सोंचना तो दूर उन्होंने सपना भी नहीं देखा होगा कि उनके गाँव में बिजली, सड़क, शिक्षा भी आएगी। 

जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ उसी सिंहवाहिनी ग्राम की मुखिया आदरणीया श्रीमती रितु जायसवाल जी की जिन्होंने अपने दृढ़ संकल्प, निष्ठा, समर्पण की बदौलत सिंहवाहिनी पंचायत की नक्शा ही बदल कर रख दिया। 

शौचालय मुक्त ग्राम, शिक्षा स्तर एवं साक्षरता में वृद्धि, बिजली समृद्ध ग्राम, बायोगैस प्लांट, महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड बैंक ऐसी ना जाने कितने काम जो गिनाते गिनाते मैं थक जाऊँ पर पूरा नही गिना पाऊँगा। 

  पर यह दुर्भाग्य ही इस लोकतंत्र का कि जिस लोकतंत्र की एक मुखिया जिसे भारत जैसे विशाल लोकतंत्र से "उच्च शिक्षित युवा सरपंच सम्मान" सम्मानित किया जा चुका है, आज उसी उच्च शिक्षित मुखिया पर दलितों से मारपीट करने का झूठा इलज़ाम लगा कर फँसाया जा रहा है।

एक महिला जो एक मुखिया के पद पर आसीन रहते हुए विधायक, सांसद से कही ज्यादा अपने क्षेत्र के लिए कार्य कर रही है, ऐसी महिला को विपक्षी दुश्मन इसलिए फँसाने का जाल बुन रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी कार्यक्षमता का एहसास है और उन्हें पता है कि जब तक यह दुर्गा स्वरुपा रितु जायसवाल खड़ी है तब तक इन निकम्में लोगों की राजनीती में कोई दाल नहीं गलने वाली, तब जाकर ऐसेे नाकाबिल लोग पूर्वनिर्धारित षड़यंत्र के तहत ऐसी जुझारु, कर्मठ, समर्पित महिला के खिलाफ़ साजिश रचते हैं और गलत इल्जामात के तहत आदरणीया जनप्रिय श्रीमती रितु जायसवाल जी को अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के तहत फँसाने का कार्य करते है। ऐसे नाकाबिल लोगों के द्वारा इस तरह का झूठा आरोप लगाना और ऐसी विदूषी महिला का ऐसे मामलों के तहत बिना जाँच-पड़ताल के गिरफ्तार करने का नियम ठीक वैसा ही है जैसे सफेद कपड़े पर कीचड़ फेंकना। 

मैं अंकित आजाद गुप्ता आप तमाम  आम जनता से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या कोई व्यक्ति दिन-रात एक कर, सारे सुख-चैन त्याग कर, अपने सपनों को ताख़ पर रख कर इसलिए समाजसेवा को चुनता है कि कल हो कर मेरे साफ-सुथरे छवि पर कालिख पोता जा सकें, मेरे दामन पर कीचड़ उछाला जा सके ?

यदि ऐसा हाल रहा तब तो चारों तरफ बस हैवानियत बचेगी क्योंकि इंसानियत को तो निकम्में लोग निगलते जा रहे हैं।

आज समय आ गया इंसानियत के साथ खड़ा होने का वर्ना इस भ्रष्ट युग में हर व्यक्ति रितु जायसवाल नही बन सकता, क्योंकि रितु जायसवाल होने के लिए जिगर, साहस, त्याग की  आवश्यकता होती है जो कि सबमें नही होता।

जिसने सबकुछ त्याग कर हमें गौरान्वित होने के कई मौकें दिए समय है आज उनके साथ खड़ा होने का।

एक बार फिर से दुहरा रहा हूँ...

"सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं"।  

"सत्यमेव जयते"

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