शहीद रामाधार सिंह यादव का अपमान – मैनपुरी जिला पंचायत ने शहीद सम्मान छीना, अब आवाज़ उठाइए!

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The Issue

मैं विश्वनाथ सिंह हूं। मेरे पिता, अमर शहीद रामाधार सिंह यादव, भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजिमेंट में कार्यरत थे। उन्होंने 10 सितंबर 1995 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति दी थी। सरकार ने उनके बलिदान को स्वीकार करते हुए हमारे गांव नगला टांक, तहसील करहल, जिला मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) में एक "शहीद स्मृति द्वार" स्वीकृत किया।

लेकिन आज, उसी स्मृति द्वार को देखकर सिर शर्म से झुक जाता है। जिस द्वार पर मेरे पिता का नाम सम्मानपूर्वक अंकित होना चाहिए था, वहां किसी दूसरे शहीद का नाम भी जोड़ दिया गया। न हमें बताया गया, न पूछा गया। यह सब कुछ बिना शहीद परिवार की सहमति और जानकारी के कर दिया गया।

इतना ही नहीं —

जो स्मृति द्वार कागज़ों में लाखों रुपये में बना बताया गया, उसकी दीवारें घटिया ईंटों से बनी हैं, सरिया बाहर दिख रही है। पूरे काम में ठेकेदारी भ्रष्टाचार की बू साफ आती है। जब हमने इसकी शिकायत की तो हमारे परिवार को धमकियां दी जा रहीं हैं।

मैंने यह बात कई बार जिलाधिकारी, मैनपुरी को ज्ञापन देकर बताई।

मैंने IGRS पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कीं।

पर अफ़सोस…

आज तक न कोई जवाब मिला, न कार्यवाही।

प्रशासन की चुप्पी, और राजनीतिक दबाव की झलक हर जगह है।

क्या यही है इस देश में शहीदों का सम्मान?

क्या शहादत भी अब फाइलों और ठेकेदारों के हवाले कर दी गई है?

मेरी यह याचिका केवल एक स्मारक को ठीक करने की नहीं है —

यह उन भावनाओं, उस सम्मान, और उस आत्मबल की पुनर्स्थापना की माँग है, जो देश के हर नागरिक के लिए आवश्यक है।

इसलिए मैं आप सबसे विनम्र अपील करता हूँ —

👉 इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और माँग करें कि:

शहीद स्मृति द्वार में हुए निर्माण संबंधी भ्रष्टाचार की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

जिन अधिकारियों, ठेकेदारों, और नेताओं ने शहीद का नाम बदला या दबाव डाला, उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।

स्मृति द्वार पर शहीद रामाधार सिंह यादव जी का नाम, चित्र और विवरण सही रूप में बहाल किया जाए।

परिवार से माफी मांगी जाए और स्मृति द्वार का मूल स्वीकृत रूप बहाल किया जाए, जिसमें उनके सम्मान को सार्वजनिक रूप से पुनर्स्थापित किया जाए।

शहीद का सम्मान केवल दो मिनट की चुप्पी से नहीं होता –

वह तभी होता है जब हम उसकी विरासत को सच्चाई और न्याय से संरक्षित रखें।

🙏 कृपया इस याचिका को अपना समर्थन दें।

आपका एक हस्ताक्षर, शहीद की आत्मा को न्याय दिला सकता है।

जय हिंद।

– विश्वनाथ सिंह

(शहीद रामाधार सिंह यादव का पुत्र)

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मैं विश्वनाथ सिंह हूं। मेरे पिता, अमर शहीद रामाधार सिंह यादव, भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजिमेंट में कार्यरत थे। उन्होंने 10 सितंबर 1995 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में मातृभूमि की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति दी थी। सरकार ने उनके बलिदान को स्वीकार करते हुए हमारे गांव नगला टांक, तहसील करहल, जिला मैनपुरी (उत्तर प्रदेश) में एक "शहीद स्मृति द्वार" स्वीकृत किया।

लेकिन आज, उसी स्मृति द्वार को देखकर सिर शर्म से झुक जाता है। जिस द्वार पर मेरे पिता का नाम सम्मानपूर्वक अंकित होना चाहिए था, वहां किसी दूसरे शहीद का नाम भी जोड़ दिया गया। न हमें बताया गया, न पूछा गया। यह सब कुछ बिना शहीद परिवार की सहमति और जानकारी के कर दिया गया।

इतना ही नहीं —

जो स्मृति द्वार कागज़ों में लाखों रुपये में बना बताया गया, उसकी दीवारें घटिया ईंटों से बनी हैं, सरिया बाहर दिख रही है। पूरे काम में ठेकेदारी भ्रष्टाचार की बू साफ आती है। जब हमने इसकी शिकायत की तो हमारे परिवार को धमकियां दी जा रहीं हैं।

मैंने यह बात कई बार जिलाधिकारी, मैनपुरी को ज्ञापन देकर बताई।

मैंने IGRS पोर्टल पर शिकायतें दर्ज कीं।

पर अफ़सोस…

आज तक न कोई जवाब मिला, न कार्यवाही।

प्रशासन की चुप्पी, और राजनीतिक दबाव की झलक हर जगह है।

क्या यही है इस देश में शहीदों का सम्मान?

क्या शहादत भी अब फाइलों और ठेकेदारों के हवाले कर दी गई है?

मेरी यह याचिका केवल एक स्मारक को ठीक करने की नहीं है —

यह उन भावनाओं, उस सम्मान, और उस आत्मबल की पुनर्स्थापना की माँग है, जो देश के हर नागरिक के लिए आवश्यक है।

इसलिए मैं आप सबसे विनम्र अपील करता हूँ —

👉 इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और माँग करें कि:

शहीद स्मृति द्वार में हुए निर्माण संबंधी भ्रष्टाचार की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

जिन अधिकारियों, ठेकेदारों, और नेताओं ने शहीद का नाम बदला या दबाव डाला, उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए।

स्मृति द्वार पर शहीद रामाधार सिंह यादव जी का नाम, चित्र और विवरण सही रूप में बहाल किया जाए।

परिवार से माफी मांगी जाए और स्मृति द्वार का मूल स्वीकृत रूप बहाल किया जाए, जिसमें उनके सम्मान को सार्वजनिक रूप से पुनर्स्थापित किया जाए।

शहीद का सम्मान केवल दो मिनट की चुप्पी से नहीं होता –

वह तभी होता है जब हम उसकी विरासत को सच्चाई और न्याय से संरक्षित रखें।

🙏 कृपया इस याचिका को अपना समर्थन दें।

आपका एक हस्ताक्षर, शहीद की आत्मा को न्याय दिला सकता है।

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