वर्तमान आरक्षण नीति में बदलाव करें

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The Issue

आरक्षण नीति पर पुनर्विचार: आर्थिक आधार पर समान अवसर की अपील

मेरा नाम धीरेन्द्र पाठक है।

मैं एक सामान्य (General) श्रेणी के परिवार से हूँ। मेरे पिता ऑटो-रिक्शा चालक थे। कक्षा 10 में मुझे 70% अंक मिले, मेरी इच्छा विज्ञान (Science) पढ़ने की थी, लेकिन मुझे अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका। आर्थिक कठिनाइयों के कारण मुझे पढ़ाई के साथ नौकरी करनी पड़ी और मेरा स्नातक, जो तीन वर्ष में पूरा होना चाहिए था, आठ वर्ष में पूरा हुआ।

मेरे व्यक्तिगत अनुभव ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि भारत में आरक्षण नीति पर समय-समय पर पुनर्विचार होना चाहिए। मेरा मानना है कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उन्हें उनकी जाति से परे समान अवसर और सहायता मिलनी चाहिए।

यह अभियान किसी जाति, धर्म या समुदाय के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य केवल इस विषय पर लोकतांत्रिक चर्चा को आगे बढ़ाना और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अधिक न्यायसंगत व्यवस्था की मांग करना है।

यह कोई सरकारी प्रक्रिया या कानूनी याचिका नहीं है। यह नागरिकों की राय और जनसमर्थन एकत्र करने का अभियान है।

यदि इस अभियान को 10 लाख या उससे अधिक नागरिकों का समर्थन प्राप्त होता है, तो हम इस जनमत अभियान के हस्ताक्षरों और निष्कर्षों को भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों (MPs), विधायकों (MLAs) तथा सभी प्रमुख राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों तक उपलब्ध लोकतांत्रिक माध्यमों से पहुँचाने और उनके साथ साझा करने का पूर्ण प्रयास करेंगे।

हम यह दावा नहीं करते कि इस अभियान के परिणामस्वरूप कोई नीति या कानून अवश्य बदलेगा। हमारा उद्देश्य केवल नागरिकों की राय को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने का प्रयास करना है।

यदि आप भी मानते हैं कि इस विषय पर गंभीर और निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए, तो कृपया इस अभियान का समर्थन करें और अपना डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज करें।

आपका एक हस्ताक्षर लोकतांत्रिक संवाद को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है।

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Dhirendra PathakPetition Starter

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