Petition updateरीगा चीनी मील बचाओ अभियान : संजय संघर्ष सिंह

मिल प्रबंधन से समस्याओं के समाधान की बातचीत

Sanjay Sangharsh singhSheohar, India
Aug 21, 2020

*संवाद से ही समाधान किसान और रीगा मिल प्रबंधन*
वर्ष 18-19 का लगभग 34 करोड और 19-20 का भी 45 करोड़ लगभग 80 करोड की देनदारी है किसानों की|
आंदोलन कर्ता के रूप में हमने हमारी प्राथमिकता तय की है किसानों को भुगतान और रीगा मील को भी बचाना |
30 सितंबर 2018 को मिल का बैंक खाता एनपीए हो चुकी है और आरबीआई के रूल के हिसाब से वन अकाउंट एनपीए मींस ऑल अकाउंट एनपीए बैंक के ऑडिटर के हिसाब से रीगा मिल की संपत्ति 303 करोड़ की है लेकिन आरबीआई के वर्तमान एनपीए नियमों के अनुसार मिल को हिंदुस्तान का कोई भी बैंक ₹1 नहीं दे सकता कर्ज स्वरूप अतः सत्ता में बैठे तमाम अधिकारी नेताओं और सरकार को भली-भांति पता है ऐसे में सरकार के पास पेंडिंग तमाम सब्सिडी की राशि और चीनी स्टॉक के बिक्री से प्राप्त राशि तथा एथेनॉल प्लांट एवं एनपीए रीगा शुगर कंपनी को केंद्र सरकार द्वारा 40 करोड़ की राज्य सरकार के आधार पर गारंटी स्वरूप मिलने वाली राशि से ही किसान का भुगतान संभव है
और यही एकमात्र समाधान है
लेकिन समाधान सरकार और सरकार के नुमाइंदे महज एक एफ आई आर मे ढूंढ रहे हैं, ऐसा कहा जा सकता है कि मतदाता के रूप में जनता को संतुष्ट करने और सही मुद्दे से ध्यान भटकाने का एक प्रयास मात्र है
अदौरी खोडी पाकर पुल निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक संजय संघर्ष सिंह एवं कर्नल सुधीर कुमार सिंह कि आज मैनेजमेंट से मुलाकात एवं बातचीत हुई| मुख्य प्रबंधक शशि गुप्ता केन जनरल मैनेजर यशपाल सिंह से तमाम समस्याओं के समाधान हेतु गंभीर बातचीत के क्रम में जो जानकारियां सामने आई है उसके अनुसार वर्ष 2011 में ही केसीसी कराया गया था बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक के माध्यम से 12000 किसानों का जिस पर ऋण का भुगतान और समय पर रिन्यू भी कराया गया दो हजार अट्ठारह तक लेकिन वर्ष 2018 के सितंबर में जब मिल का खाता एनपीए हो गया तो लगातार 8 वर्षों से नुकसान की तरफ चल रही कंपनी की आर्थिक व्यवस्था डगमगा गई|
ऐसे में केवल सॉफ्ट लोन बेलआउट पैकेज तथा उसकी तीन सौ तीन करोड़ की परिसंपत्ति के एवज में सीधे किसान के खाते में पैसा ट्रांसफर कराई जा सकती है और मील पुनर्जीवित हो सकता है|
राज्य सरकार तय करती है कि कौन-कौन सी प्रभेद गन्ना का प्रतिबंधित है कौन सा अग्रिम प्रभेद है और कौन सा सामान्य प्रभेद है इसके आधार पर गन्ना लेने की प्राथमिकता भुगतान की प्राथमिकता और बहुत हद तक गन्ने का कीमत तय होता है और इसी पर निर्भर करता है मिल की आर्थिक स्थिति भी |
तैयार चीनी ओपन सेल के लिए नहीं होता बल्कि राज्य सरकार की निगरानी में उसके नीति निर्धारण में चीनी के मूल्य तय होते हैं और बिक्री होती है बिक्री का 85 फ़ीसदी हिस्सा किसान के भुगतान के रूप में यूटी लाइज होता है और शेष 15 परसेंट में बैंक अपना ब्याज काट कर लगभग पांच छे परसेंट मिल प्रबंधन को देती है जमील ऑफ सीजन में भी लगभग 74 लाख और रनिंग सीजन में एक करोड़ 40 लाख के आसपास वेतन भुगतान करती है जिस तरीके से बाढ़ बरसात से किसान का गन्ना और उसकी उपज प्रभावित होती है ठीक उसी प्रकार ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप आदि से मिल भी प्रभावित होता है और मेंटेनेंस का खर्च भी बढ़ जाता है|
प्राथमिकता के आधार पर किसान का भुगतान किया जाना चाहिए लगभग 15 करोड़ की चीनी स्टॉक में है लेकिन 80 करोड़ के आसपास देनदारी है और यह तभी संभव है जब सरकार की तरफ बकाया तमाम सब्सिडी की राशि अति शीघ्र भुगतान हो और सीधा किसान के खाते में जाए 40 करोड़ के सॉफ्ट लोन अति शीघ्र मंजूर किए जाए और पैसा सीधा किसान के खाते में जाए मिल की 303 करोड़ की परिसंपत्ति के अगेंस्ट में एक बेलआउट पैकेज मिले जिसका भुगतान सीधा किसान के खाते में किया जाए|
मिल प्रबंधन ने बैंक को यह लेटर लिखित रूप में दे दिया है कि किसान जो 12000 केसीसी धारक हैं उनके प्रिंसिपल अमाउंट और इंटरेस्ट अमाउंट का देनदार केवल और केवल मील है किसानों को परेशान न किया जाए
केसीसी के तमाम आउटस्टैंडिंग राशि को मिल के खाते में डेबिट करते हुए किसानों को मुक्त किया जाए|
संजय संघर्ष सिंह ने इस मुहिम को चलाते हुए जो हस्ताक्षर अभियान का मुहिम है जिसमें प्राथमिकता है मिल को बचाना और किसान का पैसा दिलाना सरकार का ध्यान आकर्षण करने मुहिम को और तेज करने की बात कही है क्योंकि इस रीगा मील से लाखों परिवार का चूल्हा जलता है और सरकार जैसे ही अदौरी खोरी पाकर पुल का निर्माण करा ले तो मोतिहारी मिल बंद होने के बाद तमाम मोतिहारी के गन्ना किसान अपनी करना को रीगा मिल तक ला पाएंगे
रीगा मील महज 1 मील नहीं बल्कि धरोहर है और इसे जिंदा रखना होगा पेड़ को बचाए रखते हुए मीठे मीठे फल खाने का प्रयास है और इस प्रयास में हस्ताक्षर अभियान चलाते हुए जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी डाली जाएगी अगर पॉलिटिकली इसका समाधान नहीं निकलता है तो
अभियान में जुटे संजय संघर्ष सिंह एवं कर्नल सुधीर कुमार सिंह ने प्राथमिकता के साथ किसान और मिल प्रबंधन के बीच संवाद हीनता को समाप्त करने की दिशा में मुहिम चलाकर मिल प्रबंधन को भी इसके लिए आग्रह किया है कि जब भी किसानों के बीच संवाद की स्थिति उत्पन्न हो ऐसे कार्यक्रम ऑर्गेनाइज किए जाएं तो सीजीएम,जीएम प्रबंधन के प्रतिनिधि ऐसे सेमिनार में शामिल हुआ करें जिसमें किसान से सीधा संवाद स्थापित हो पाए
साथ ही मिल में कार्यरत तमाम कर्मचारियों के हितों की रक्षा के कार्यक्रम भी खुले संवाद के माध्यम से होने चाहिए जिससे न कर्मचारी को लगे कि प्रबंधन उसका शोषण कर रहा है और ना प्रबंधन को लगे कि कर्मचारी द्वारा शोषित हो रहे हैं
रीगा मिल से लेंगे पाई पाई और मिल भी बचाएंगे भाई यह मुहिम संजय संघर्ष सिंह एवं कर्नल सुधीर कुमार सिंह का अनवरत तब तक चलेगा जब तक मिल और किसान दोनों की समस्या समाप्त नहीं हो जाती और कर्मचारी जायज तरीके से अपनी जायज मांग प्राप्त नहीं कर लेते

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