Krishna AgrawalDelhi, อินเดีย
9 ส.ค. 2021

दैनिक जागरण नई दिल्ली दिo 09.8.2021 समाचार के अनुसार, माo प्रधान न्यायाधीश ने कहा,

1. "पहुँच वाले भी पुलिस की थर्ड डिग्री ट्रीटमेंट से नहीं बच पाते।"

क्या थर्ड डिग्री ट्रीटमेंट अभियुक्त के रसूक के अनुसार होना चाहिये या अपराध के अनुसार और पुलिस के साथ कोआपरेट न करने के कारण होना चाहिये? थर्ड डिग्री ट्रीटमेंट का प्रावधान होना भी चाहिये या नहीं?

2. मुफ्त कानूनी मदद उप्लब्ध कराने का इन्तजाम, प्रसार प्रचार होना चाहिये।

समयबद्ध न्याय देने का भी कोई प्रबन्ध होना चाहिये या नहीं इसके बारे में कुछ नहीं कहा, क्यो? सिर्फ मुफ्त कानूनी मदद उपलब्ध कराना पर्याप्त है, न्याय मिले या न मिले।

3. क्या केवल अभियुक्त का ही मानवाधिकार होता है या पीड़ित का भी मानवाधिकार होता है?

4. व्यक्ति की शारीरिक गरिमा का सबसे ज्यादा खतरा पुलिस से होता है और

व्यक्ति की मानसिक गरिमा का सबसे ज्यादा खतरा न्यायालय से होता है।

5. प्रधान न्यायाधीश ने वकीलों से जरूरतमंदों की कानूनी मदद करने की अपील की।

वकील मुवक्किलों का शोषण न करके केवल उन्हें समय पर सही जानकारी देने व समय पर न्याय दिलाने का काम करें अपने आपको अन्य अवांछनीय गतिविधियों में लिप्त न करें तो वकीलों का समाज पर यही बहुत बड़ा उपकार होगा।

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