देश सालों साल से न्यायिक आपात स्थिति से गुजर रहा है। न्याय व्यवस्था कैसे दुरुस्त होगी?

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समस्या

यदि हम देश में सुधार चाहते हैं तो कुछ समय के लिये सुधार के भ्रष्टाचार के विभिन्न मुद्दों को स्थगित करके *एक पॉइंट अजेंडा - न्यायपालिका, न्यायतंत्र में सुधार हो, इनका भ्रष्टाचार समाप्त हो, न्यायपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित हो, वकीलों की दलाली, गुण्डागर्दी बन्द हो, वाद साक्ष्यों के आधार पर सुना जाय न कि धाराओँ के आधार पर, न्याय प्रणाली इतनी सुगम हो कि व्यक्ति अपना केस स्वयं लड़ सके बिना किसी बिचौलिये दलाल वकीलों के" पर बात की जाय।

न्यायतंत्र में यदि सुधार हो जाय, न्यायतंत्र का भ्रष्टाचार समाप्त हो जाये, न्यायपालिका एवं अधिवक्त्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित हो जाय, वकीलों की उद्दंडता पर लगाम कस जाय तो अन्य क्षेत्रों में 60-80% सुधार स्वतः हो जायेगा।

बढ़ते हुए अपराध और अन्य क्षेत्रों के भ्रष्टाचार के मूल में न्यायपालिका, न्यायतंत्र ही हैं और हम आज सालों-साल से न्यायिक आपात स्थिति में हैं, जिस पर किसी का ध्यान नहीं है।

यदि आप सहमत हैं तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करके इसे राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा बनएं।

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Krishna Agrawalपेटीशन स्टार्टर

फैसला लेने वाले

माo उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, माo कानूनमन्त्री, माo प्रधानमंत्री
माo उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, माo कानूनमन्त्री, माo प्रधानमंत्री
राष्ट्रीय स्तर
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