

भारत में असली NOTA (Right to Reject) कानून लागू हो: दागी और अवसरवादी नेताओं पर लगे प्रतिबं
The Issue
आदरणीय देशवासियों और संवैधानिक संस्थाओं,
भारत का चुनाव आयोग (Election Commission of India)
भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India - Supreme Court)
भारत का कानून एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice, Govt of India)
यह पिटिशन भारत के हर उस जागरूक नागरिक की तरफ से है जो देश की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था, नेताओं के भ्रष्टाचार और बार-बार होने वाले दल-बदल (राजनीतिक अवसरवाद) से पूरी तरह तंग आ चुका है।
वर्तमान व्यवस्था में, राजनीतिक दल चुनाव से पहले एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेता अपनी मूल पार्टी छोड़कर सत्ता पक्ष में शामिल हो जाते हैं। ऐसे में आम जनता का वोट और जनादेश पूरी तरह मजाक बनकर रह गया है। कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत कमजोर हो रहा है और नागरिकों का लोकतंत्र से भरोसा उठ रहा है।
वर्तमान NOTA (None of the Above) की कमी:
साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हमें NOTA का बटन तो मिला, लेकिन इसका कोई व्यावहारिक असर नहीं है। यदि किसी सीट पर NOTA को 90% वोट भी मिल जाएं, तब भी दूसरे नंबर पर आने वाले उम्मीदवार (चाहे उसे मात्र 10% वोट मिले हों) को विजेता घोषित कर दिया जाता है। यह नागरिकों के "Right to Reject" (नकारने के अधिकार) का अपमान है।
हमारी मुख्य मांगें:
हम भारत के चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और संसद से मांग करते हैं कि 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act) में तुरंत निम्नलिखित ऐतिहासिक सुधार किए जाएं:
चुनाव रद्दीकरण (Right to Reject): यदि किसी भी लोकसभा या विधानसभा सीट पर NOTA को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, तो उस चुनाव को तुरंत अवैध/रद्द घोषित किया जाए।
उम्मीदवारों पर कड़ा प्रतिबंध (Disqualification): रद्द हुए चुनाव के बाद वहां दोबारा (Fresh) चुनाव कराया जाए। उस नए चुनाव में पुराने सभी उम्मीदवारों के खड़े होने पर अगले 6 वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि पार्टियां दागी या अवसरवादी चेहरों को दोबारा टिकट न दे सकें।
चुनाव खर्च की वसूली: दोबारा चुनाव कराने का जो भी सरकारी खर्च आए, उसकी आधी राशि उन प्रतिबंधित उम्मीदवारों और उनकी पार्टियों से जुर्माने के रूप में वसूली जाए, ताकि देश के टैक्सपेयर्स के पैसे का नुकसान न हो।
बदलाव क्यों जरूरी है?
जब तक राजनेताओं के मन में जनता द्वारा पूरी तरह नकारे जाने और अपना राजनीतिक करियर खत्म होने का डर नहीं होगा, तब तक देश में साफ-सुथरी राजनीति की शुरुआत नहीं हो सकती। यह कानून राजनीतिक दलों को मजबूर करेगा कि वे बाहुबलियों और भ्रष्टाचारियों के बजाय केवल ईमानदार, शिक्षित और कर्मठ नागरिकों को ही चुनाव में उतारें।
कृपया इस पिटिशन पर हस्ताक्षर करें और इसे देश के हर नागरिक तक पहुंचाएं। हमारे लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी अब हमारे अपने हाथों में है!
#RightToReject #RealNOTA #FixIn
dianDemocracy

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The Issue
आदरणीय देशवासियों और संवैधानिक संस्थाओं,
भारत का चुनाव आयोग (Election Commission of India)
भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India - Supreme Court)
भारत का कानून एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice, Govt of India)
यह पिटिशन भारत के हर उस जागरूक नागरिक की तरफ से है जो देश की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था, नेताओं के भ्रष्टाचार और बार-बार होने वाले दल-बदल (राजनीतिक अवसरवाद) से पूरी तरह तंग आ चुका है।
वर्तमान व्यवस्था में, राजनीतिक दल चुनाव से पहले एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेता अपनी मूल पार्टी छोड़कर सत्ता पक्ष में शामिल हो जाते हैं। ऐसे में आम जनता का वोट और जनादेश पूरी तरह मजाक बनकर रह गया है। कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत कमजोर हो रहा है और नागरिकों का लोकतंत्र से भरोसा उठ रहा है।
वर्तमान NOTA (None of the Above) की कमी:
साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हमें NOTA का बटन तो मिला, लेकिन इसका कोई व्यावहारिक असर नहीं है। यदि किसी सीट पर NOTA को 90% वोट भी मिल जाएं, तब भी दूसरे नंबर पर आने वाले उम्मीदवार (चाहे उसे मात्र 10% वोट मिले हों) को विजेता घोषित कर दिया जाता है। यह नागरिकों के "Right to Reject" (नकारने के अधिकार) का अपमान है।
हमारी मुख्य मांगें:
हम भारत के चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और संसद से मांग करते हैं कि 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act) में तुरंत निम्नलिखित ऐतिहासिक सुधार किए जाएं:
चुनाव रद्दीकरण (Right to Reject): यदि किसी भी लोकसभा या विधानसभा सीट पर NOTA को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, तो उस चुनाव को तुरंत अवैध/रद्द घोषित किया जाए।
उम्मीदवारों पर कड़ा प्रतिबंध (Disqualification): रद्द हुए चुनाव के बाद वहां दोबारा (Fresh) चुनाव कराया जाए। उस नए चुनाव में पुराने सभी उम्मीदवारों के खड़े होने पर अगले 6 वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि पार्टियां दागी या अवसरवादी चेहरों को दोबारा टिकट न दे सकें।
चुनाव खर्च की वसूली: दोबारा चुनाव कराने का जो भी सरकारी खर्च आए, उसकी आधी राशि उन प्रतिबंधित उम्मीदवारों और उनकी पार्टियों से जुर्माने के रूप में वसूली जाए, ताकि देश के टैक्सपेयर्स के पैसे का नुकसान न हो।
बदलाव क्यों जरूरी है?
जब तक राजनेताओं के मन में जनता द्वारा पूरी तरह नकारे जाने और अपना राजनीतिक करियर खत्म होने का डर नहीं होगा, तब तक देश में साफ-सुथरी राजनीति की शुरुआत नहीं हो सकती। यह कानून राजनीतिक दलों को मजबूर करेगा कि वे बाहुबलियों और भ्रष्टाचारियों के बजाय केवल ईमानदार, शिक्षित और कर्मठ नागरिकों को ही चुनाव में उतारें।
कृपया इस पिटिशन पर हस्ताक्षर करें और इसे देश के हर नागरिक तक पहुंचाएं। हमारे लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी अब हमारे अपने हाथों में है!
#RightToReject #RealNOTA #FixIn
dianDemocracy

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Petition created on 13 August 2026