भारत की सभी पहाड़ियों और पर्वतों को ‘जीवित प्राकृतिक इकाई’ घोषित कर विशेष राष्ट्रीय कानून

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VIKAS Rao and 19 others have signed recently.

The Issue

सेवा में,

माननीय प्रधानमंत्री महोदय

भारत सरकार

नई दिल्ली

 

प्रतिलिपि:

माननीय केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री

नीति आयोग

 

विषय:  भारत की समस्त पहाड़ियों एवं पर्वतों को “जीवित प्राकृतिक इकाई (Living Entity)” घोषित किए जाने,

उनके संरक्षण हेतु विशेष राष्ट्रीय कानून बनाए जाने तथा

केवल पर्वत एवं पहाड़ी संरक्षण के लिए समर्पित राष्ट्रीय सरकारी निकाय/आयोग के गठन के संबंध में

महोदय,

हम, भारत के विभिन्न राज्यों के नागरिक, पर्यावरणविद्, सामाजिक संगठनों, पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी एवं प्रकृति-संरक्षण से जुड़े समूह, यह राष्ट्रीय स्मारक-पत्र एक ऐतिहासिक और दूरगामी विषय पर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

भारत वह देश है जहाँ नदियों को माँ का दर्जा दिया गया, जहाँ प्रकृति को पूजनीय माना गया और जहाँ हाल के वर्षों में न्यायपालिका ने नदियों को “जीवित इकाई” के रूप में स्वीकार किया है। अब समय आ गया है कि भारत एक और ऐतिहासिक कदम उठाए और देश की सभी पहाड़ियों एवं पर्वतों को भी “जीवित प्राकृतिक संरचना” के रूप में मान्यता दे।

यह कदम क्यों आवश्यक है और ऐतिहासिक होगा

यदि भारत :

पहाड़ियों और पर्वतों को जीवित इकाई घोषित करता है, उनके लिए अलग और समर्पित राष्ट्रीय कानून बनाता है, और केवल पर्वत-पहाड़ी संरक्षण हेतु स्वतंत्र सरकारी निकाय/आयोग गठित करता है,

तो यह:

दुनिया का पहला ऐसा राष्ट्रीय कानून होगा

 पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण (Global Precedent) बनेगा

 जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे देशों को नई दिशा देगा

 यह सिद्ध करेगा कि भारत केवल विकास नहीं, बल्कि सभ्यतागत जिम्मेदारी में भी विश्व-नेतृत्व करता है

यह कानून केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी और मानवता के भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बनेगा।

 

1. भारत की प्रमुख पर्वत एवं पहाड़ी श्रेणियाँ

भारत की प्रमुख पर्वत/पहाड़ी

हिमालय, शिवालिक, अरावली, विंध्याचल, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, नीलगिरि, अन्नामलाई, पालनी, छोटानागपुर पठार, राजमहल पहाड़ियाँ, गारो-खासी-जैंतिया, नागा, मिज़ो, पाटकोई पर्वत श्रेणियाँ —

ये सभी भारत की नदियों, मानसून, जैव-विविधता और जल-सुरक्षा की जीवनरेखा हैं।

 

2. खनन एवं विकास के नाम पर हो रहा देशभर में विनाश:

कानूनी खनन पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा

अवैध खनन एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है
हजारों करोड़ का राजस्व नुकसान
लेकिन उससे भी बड़ा नुकसान — पहाड़ों का स्थायी विनाश

सुखी नदियाँ फिर भी बह सकती हैं,

बंजर जंगल दोबारा उग सकते हैं,

लेकिन पहाड़ एक बार कटे तो फिर कभी नहीं बनते।

 

3. हमारी मांगें

(1) पहाड़ियों एवं पर्वतों को “जीवित इकाई” घोषित किया जाए      ठीक उसी प्रकार जैसे नदियों को जीवित माना गया
ताकि उनके अधिकार, संरक्षण और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।

(2) “राष्ट्रीय पर्वत एवं पहाड़ी संरक्षण अधिनियम” बनाया जाए

एक ऐसा विशेष केंद्रीय कानून, जो:

पर्वत/पहाड़ी की वैज्ञानिक परिभाषा तय करे
खनन, कटाई, निर्माण पर कठोर नियंत्रण लगाए
उल्लंघन पर कठोर दंड व आपराधिक प्रावधान सुनिश्चित करे।

 

(3) “राष्ट्रीय पर्वत आयोग / राष्ट्रीय पर्वत प्राधिकरण” का गठन

एक पूर्णतः समर्पित सरकारी निकाय, जिसका कार्य केवल:

पहाड़ों और पहाड़ियों का संरक्षण
राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी
राज्यों की परियोजनाओं की समीक्षा
अवैध गतिविधियों पर सीधी कार्यवाही

 यह निकाय वन विभाग, खनन विभाग या पर्यावरण मंत्रालय के अधीन सीमित न होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करे।

4. निष्कर्ष

माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत के पास आज अवसर है कि वह:

पहाड़ों को जीवित मानने वाला दुनिया का पहला देश बने,
और यह संदेश दे कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन है।

यदि भारत यह कदम उठाता है, तो आने वाली पीढ़ियाँ इसे

21वीं सदी का सबसे दूरदर्शी और मानवतावादी निर्णय मानेंगी।

भवदीय,

भारत के नागरिक 

ग्रीन आर्मी देवास मध्य प्रदेश एवं अन्य संस्थाये ।

avatar of the starter
Green Army Dewas Paryawaran prahari seva samiti dewasPetition StarterGreen Army is a people’s movement dedicated to the protection, restoration, and conservation of hills and mountains across India. <a href="http://Www.greenarmyindia.com" rel="nofollow">Www.greenarmyindia.com</a>

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भारत सरकार

नई दिल्ली

 

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नीति आयोग

 

विषय:  भारत की समस्त पहाड़ियों एवं पर्वतों को “जीवित प्राकृतिक इकाई (Living Entity)” घोषित किए जाने,

उनके संरक्षण हेतु विशेष राष्ट्रीय कानून बनाए जाने तथा

केवल पर्वत एवं पहाड़ी संरक्षण के लिए समर्पित राष्ट्रीय सरकारी निकाय/आयोग के गठन के संबंध में

महोदय,

हम, भारत के विभिन्न राज्यों के नागरिक, पर्यावरणविद्, सामाजिक संगठनों, पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी एवं प्रकृति-संरक्षण से जुड़े समूह, यह राष्ट्रीय स्मारक-पत्र एक ऐतिहासिक और दूरगामी विषय पर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

भारत वह देश है जहाँ नदियों को माँ का दर्जा दिया गया, जहाँ प्रकृति को पूजनीय माना गया और जहाँ हाल के वर्षों में न्यायपालिका ने नदियों को “जीवित इकाई” के रूप में स्वीकार किया है। अब समय आ गया है कि भारत एक और ऐतिहासिक कदम उठाए और देश की सभी पहाड़ियों एवं पर्वतों को भी “जीवित प्राकृतिक संरचना” के रूप में मान्यता दे।

यह कदम क्यों आवश्यक है और ऐतिहासिक होगा

यदि भारत :

पहाड़ियों और पर्वतों को जीवित इकाई घोषित करता है, उनके लिए अलग और समर्पित राष्ट्रीय कानून बनाता है, और केवल पर्वत-पहाड़ी संरक्षण हेतु स्वतंत्र सरकारी निकाय/आयोग गठित करता है,

तो यह:

दुनिया का पहला ऐसा राष्ट्रीय कानून होगा

 पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण (Global Precedent) बनेगा

 जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे देशों को नई दिशा देगा

 यह सिद्ध करेगा कि भारत केवल विकास नहीं, बल्कि सभ्यतागत जिम्मेदारी में भी विश्व-नेतृत्व करता है

यह कानून केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी और मानवता के भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बनेगा।

 

1. भारत की प्रमुख पर्वत एवं पहाड़ी श्रेणियाँ

भारत की प्रमुख पर्वत/पहाड़ी

हिमालय, शिवालिक, अरावली, विंध्याचल, सतपुड़ा, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, नीलगिरि, अन्नामलाई, पालनी, छोटानागपुर पठार, राजमहल पहाड़ियाँ, गारो-खासी-जैंतिया, नागा, मिज़ो, पाटकोई पर्वत श्रेणियाँ —

ये सभी भारत की नदियों, मानसून, जैव-विविधता और जल-सुरक्षा की जीवनरेखा हैं।

 

2. खनन एवं विकास के नाम पर हो रहा देशभर में विनाश:

कानूनी खनन पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा

अवैध खनन एक राष्ट्रीय संकट बन चुका है
हजारों करोड़ का राजस्व नुकसान
लेकिन उससे भी बड़ा नुकसान — पहाड़ों का स्थायी विनाश

सुखी नदियाँ फिर भी बह सकती हैं,

बंजर जंगल दोबारा उग सकते हैं,

लेकिन पहाड़ एक बार कटे तो फिर कभी नहीं बनते।

 

3. हमारी मांगें

(1) पहाड़ियों एवं पर्वतों को “जीवित इकाई” घोषित किया जाए      ठीक उसी प्रकार जैसे नदियों को जीवित माना गया
ताकि उनके अधिकार, संरक्षण और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।

(2) “राष्ट्रीय पर्वत एवं पहाड़ी संरक्षण अधिनियम” बनाया जाए

एक ऐसा विशेष केंद्रीय कानून, जो:

पर्वत/पहाड़ी की वैज्ञानिक परिभाषा तय करे
खनन, कटाई, निर्माण पर कठोर नियंत्रण लगाए
उल्लंघन पर कठोर दंड व आपराधिक प्रावधान सुनिश्चित करे।

 

(3) “राष्ट्रीय पर्वत आयोग / राष्ट्रीय पर्वत प्राधिकरण” का गठन

एक पूर्णतः समर्पित सरकारी निकाय, जिसका कार्य केवल:

पहाड़ों और पहाड़ियों का संरक्षण
राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी
राज्यों की परियोजनाओं की समीक्षा
अवैध गतिविधियों पर सीधी कार्यवाही

 यह निकाय वन विभाग, खनन विभाग या पर्यावरण मंत्रालय के अधीन सीमित न होकर स्वतंत्र रूप से कार्य करे।

4. निष्कर्ष

माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत के पास आज अवसर है कि वह:

पहाड़ों को जीवित मानने वाला दुनिया का पहला देश बने,
और यह संदेश दे कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन है।

यदि भारत यह कदम उठाता है, तो आने वाली पीढ़ियाँ इसे

21वीं सदी का सबसे दूरदर्शी और मानवतावादी निर्णय मानेंगी।

भवदीय,

भारत के नागरिक 

ग्रीन आर्मी देवास मध्य प्रदेश एवं अन्य संस्थाये ।

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