

बोकारो में भी हो एम्स एवं सी.एम.सी भेल्लोर अस्पताल की स्थापना,


बोकारो में भी हो एम्स एवं सी.एम.सी भेल्लोर अस्पताल की स्थापना,
The Issue
हम सभी जानते हैं की झारखण्ड और बिहार के हर तीसरे परिवार या परिवार के कोई ना कोई रिश्तेदार को ईलाज के लिए भेलौर जाना पड़ता है।
जिनके पास पैसा हैं वे बड़े शहर के नामी ग्रामी अस्पताल में ईलाज करवाते हैं एवं अच्छा खासा पैसा खर्च करने के बाद भी यदि सही एवं संतुष्टि जनक ईलाज नहीं मिलता है तो उनको भी एम्स दिल्ली या सी.एम.सी भेलौर ही जाना पड़ता है।
सी.एम.सी एवं एम्स दोनों बोकारो में भी ही क्यों हो?
बोकारो पहले से ही स्वच्छ, सुव्यवस्थित शहर के रूप में जाना जाता है। एक समय था जब बोकारो का अस्पताल बिहार, झारखण्ड में ईलाज के लिए सर्वोत्तम जाना जाता हैं आज उसकी हालत क्या है यह सर्वविदित है कहने की जरूरत नहीं है। और सबसे बड़ी बात की बोकारो हवाई सेवा से भी जुड़ा हुआ है और जैसी जानकारी मिल रही है बहुत जल्द एयरपोर्ट से यात्री उड़ान की सेवा शुरू होने जा रही है। यदि सी.एम.सी, भेलौर जैसी सारी सुविधाओं वाली अस्पताल हमारे यहाँ बन जाता है तो हमें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी। सी.एम.सी एवं एम्स के हमारी बोकारो में आने से न ही सिर्फ झारखण्ड के लोग लाभान्वित होंगे बल्कि बिहार, बंगाल एवं उड़ीसा के लोग भी इसका लाभ उठा पाएंगे ।
मैं संजीव सिंह (एडवोकेट) इस पेटीशन से #ReformBokaro अभियान की शुरुआत कर रहा हूँ। मेरा साथ दें इस पेटीशन को साइन करें और इतना शेयर करें कि झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो।
2013-2014 में मेरे पिता जी को हार्ट अटैक आया था और उनको बोकारो जनरल अस्पताल में तत्काल भर्ती होना पड़ा था। डॉक्टर ने कहा कि उनको गंभीर दिल का दौरा पड़ा है एवं अगले 72 घंटों तक कुछ कह नहीं सकते। हालत ये था कि कोई लाईफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं था इतने बड़े अस्पताल में जिससे की मैं अपने पिताजी को कहीं अन्य जगह ले जा सकता। मुझे भगवान पर ही भरोसा करना पड़ा। यहां तक की इतने बड़े अस्पताल में एंजियोग्राफी की भी सुविधा नहीं हैं जिससे ये पता चल सके की दिल की समस्या कैसी और किस स्टेज पर है। किसी तरह से मेरे पिताजी की जान बच गई और तत्पश्चात् हमें उनको बाहर के अस्पताल में बाईपास सर्जरी करानी पड़ी।
क्या सी.एम.सी और एम्स बोकारो में आ सकता है ?
भेलौर के अलावे सी.एम.सी आंध्र प्रदेश एवं पूर्वी नॉर्थ के नागालैंड राज्य में भी है। जहाँ तक एम्स की बात है, यह सवाल भी पूछा गया कि एक राज्य में एक ही एम्स होता है और दूसरा हो नहीं सकता। मैं आपको बताना चाहूंगा कि बिहार में एक एम्स पटना में है जो पि छले 10 साल से चल रहा है एवं दूसरी दरभंगा में निर्माणाधीन है और जल्द ही शुरू हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में 3 एम्स है, एक रायबरेली एवं दूसरा गोरखपुर में चल रहा है। तीसरा एम्स का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। फिर झारखण्ड में जो एम्स देवघर में बना हैं उसका लाभ झारखण्ड के मात्र 20 प्रतिशत लोग उठा रहे है, 80 प्रतिशत दक्षिण बिहार के लोग उठा रहे है, जो कि झारखण्ड वासियों के साथ सरासर नाइंसाफी है।
यदि हम प्रण कर ले तो अवश्य आएगा। इसके लिए हमलोग एकत्रित एवं संगठित हो कर अपनी बात रखेंगे और तब यह काम अवश्य संभव होगा ।
आइये हमलोग एकत्रित एवं संगठित हो कर प्रयास करें कि ताकि झारखण्ड वासियों को इलाज के लिए अपने राज्य से बाहर न जाना पड़े।
संजीव सिंह (एडवोकेट)

The Issue
हम सभी जानते हैं की झारखण्ड और बिहार के हर तीसरे परिवार या परिवार के कोई ना कोई रिश्तेदार को ईलाज के लिए भेलौर जाना पड़ता है।
जिनके पास पैसा हैं वे बड़े शहर के नामी ग्रामी अस्पताल में ईलाज करवाते हैं एवं अच्छा खासा पैसा खर्च करने के बाद भी यदि सही एवं संतुष्टि जनक ईलाज नहीं मिलता है तो उनको भी एम्स दिल्ली या सी.एम.सी भेलौर ही जाना पड़ता है।
सी.एम.सी एवं एम्स दोनों बोकारो में भी ही क्यों हो?
बोकारो पहले से ही स्वच्छ, सुव्यवस्थित शहर के रूप में जाना जाता है। एक समय था जब बोकारो का अस्पताल बिहार, झारखण्ड में ईलाज के लिए सर्वोत्तम जाना जाता हैं आज उसकी हालत क्या है यह सर्वविदित है कहने की जरूरत नहीं है। और सबसे बड़ी बात की बोकारो हवाई सेवा से भी जुड़ा हुआ है और जैसी जानकारी मिल रही है बहुत जल्द एयरपोर्ट से यात्री उड़ान की सेवा शुरू होने जा रही है। यदि सी.एम.सी, भेलौर जैसी सारी सुविधाओं वाली अस्पताल हमारे यहाँ बन जाता है तो हमें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं होगी। सी.एम.सी एवं एम्स के हमारी बोकारो में आने से न ही सिर्फ झारखण्ड के लोग लाभान्वित होंगे बल्कि बिहार, बंगाल एवं उड़ीसा के लोग भी इसका लाभ उठा पाएंगे ।
मैं संजीव सिंह (एडवोकेट) इस पेटीशन से #ReformBokaro अभियान की शुरुआत कर रहा हूँ। मेरा साथ दें इस पेटीशन को साइन करें और इतना शेयर करें कि झारखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर हो।
2013-2014 में मेरे पिता जी को हार्ट अटैक आया था और उनको बोकारो जनरल अस्पताल में तत्काल भर्ती होना पड़ा था। डॉक्टर ने कहा कि उनको गंभीर दिल का दौरा पड़ा है एवं अगले 72 घंटों तक कुछ कह नहीं सकते। हालत ये था कि कोई लाईफ सपोर्ट एंबुलेंस नहीं था इतने बड़े अस्पताल में जिससे की मैं अपने पिताजी को कहीं अन्य जगह ले जा सकता। मुझे भगवान पर ही भरोसा करना पड़ा। यहां तक की इतने बड़े अस्पताल में एंजियोग्राफी की भी सुविधा नहीं हैं जिससे ये पता चल सके की दिल की समस्या कैसी और किस स्टेज पर है। किसी तरह से मेरे पिताजी की जान बच गई और तत्पश्चात् हमें उनको बाहर के अस्पताल में बाईपास सर्जरी करानी पड़ी।
क्या सी.एम.सी और एम्स बोकारो में आ सकता है ?
भेलौर के अलावे सी.एम.सी आंध्र प्रदेश एवं पूर्वी नॉर्थ के नागालैंड राज्य में भी है। जहाँ तक एम्स की बात है, यह सवाल भी पूछा गया कि एक राज्य में एक ही एम्स होता है और दूसरा हो नहीं सकता। मैं आपको बताना चाहूंगा कि बिहार में एक एम्स पटना में है जो पि छले 10 साल से चल रहा है एवं दूसरी दरभंगा में निर्माणाधीन है और जल्द ही शुरू हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में 3 एम्स है, एक रायबरेली एवं दूसरा गोरखपुर में चल रहा है। तीसरा एम्स का प्रस्ताव स्वीकृत हो गया है। फिर झारखण्ड में जो एम्स देवघर में बना हैं उसका लाभ झारखण्ड के मात्र 20 प्रतिशत लोग उठा रहे है, 80 प्रतिशत दक्षिण बिहार के लोग उठा रहे है, जो कि झारखण्ड वासियों के साथ सरासर नाइंसाफी है।
यदि हम प्रण कर ले तो अवश्य आएगा। इसके लिए हमलोग एकत्रित एवं संगठित हो कर अपनी बात रखेंगे और तब यह काम अवश्य संभव होगा ।
आइये हमलोग एकत्रित एवं संगठित हो कर प्रयास करें कि ताकि झारखण्ड वासियों को इलाज के लिए अपने राज्य से बाहर न जाना पड़े।
संजीव सिंह (एडवोकेट)

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Petition created on 9 November 2021