

पशु अधिकारों के लिए आवाज़ मिलाएं


पशु अधिकारों के लिए आवाज़ मिलाएं
The Issue
पशुओं के अधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए आवाज़ उठाना चाहती हूं , हमें दुखद और अनैतिक दृश्य देखने को मिलते हैँ जहाँ गायों और बेल को असहनीय भूख प्लास्टिक की थैलियां खाने के लिए मजबूर करती हैं जिसमें हम मनुष्य होकर अज्ञानता या लापरवाही वश बचा हुआ खाना, फलों या सिब्जियों के छिलके इत्यादि डालकर फेंक देते हैं, ये मासूम जीव स्वयं खोलकर खाने मे असमर्थ रहते हैं जिससे खोलने की थोड़ी कोशिश के बाद पूरा पूरा निगल लेते हैं, जिससे इनकी आंते अवरुद्ध हो जाती हैं, फिर भूख कम होकर सुस्त,बीमार और कष्ट से जीते हैं. उनका ऐसे जीवन देखना ना सिर्फ दुख भरा है बल्कि हमारे मनुष्य होने पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है, समस्त व्यवस्था की विफलता भी है , समाज के साथ अंततः राज्य सरकार की भी ज़िम्मेदारी बनती है .
जिन्हें आवारा कह कर बाड़ों में बांध दिया जाता है , उन्हें घास चरने से रोका जाता है . उन्हें चलने से वंचित होना पड़ता है जो उनके स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का हनन है . जैसे आदमी को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है , वैसे ही पशुओं को भी सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है. उनके अधिकारों को नज़र अंदाज़ करना संविधान द्वारा बनाये अधिकार -नियमों का उल्लंघन है.हमें इस मसले को तुरंत सुलझाना चाहिए .
शॉपिंग मॉल्स , पार्किंग , सिनेमा हॉल्स और क्रिकेट प्लेग्राउंड्स इत्यादि के लिए ज़मीन देते समय जब कोई दिक्कत नहीं आती , तो फिर चरागाह के लिए आवश्यक जमीन का आवंटन और संरक्षण क्यों नहीं ? चरागाह के लिए ज़मीन मिलने से , ये पशु स्वस्थ और सम्मान पूर्ण जीवन जी सकते हैं . आज पूरे भारतवर्ष मे गाय कचरा खाती हुई दिखाई देती है, बीमार और उदास दिखाई देती है, जो कि दुखद और हमारे गैर ज़िम्मेदार रवैये को उजागर करती है
आईये , इस समस्या पर मिल कर ध्यान दें और पशुओं के अधिकारों की सुरक्षा करें . राज्य सरकार से अनुरोध है की वे तुरंत इस समस्या का निदान करें और गायों को चरागाह हेतु ज़मीन प्रदान करें . ज़मीन को अतिक्रमण से बचाकर पशु कल्याण हेतु संरक्षण को बढ़ावा दे. जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाये जाएँ. डिस्पोजबल प्लास्टिक आइटम फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द हो तथा उन्हें नया, पर्यायवरण अनुकूल उद्योग को करने हेतु प्रोत्साहन, ट्रेनिंग दी जाये.
पशुओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए इस अपील को साइन करके सपोर्ट दें. हम मनुष्यों द्वारा ही बनाई गयी यह समस्या अब समाधान चाहती है जिसमें आपके समर्थन का योगदान अपेक्षित है।

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पशुओं के अधिकारों की रक्षा और सम्मान के लिए आवाज़ उठाना चाहती हूं , हमें दुखद और अनैतिक दृश्य देखने को मिलते हैँ जहाँ गायों और बेल को असहनीय भूख प्लास्टिक की थैलियां खाने के लिए मजबूर करती हैं जिसमें हम मनुष्य होकर अज्ञानता या लापरवाही वश बचा हुआ खाना, फलों या सिब्जियों के छिलके इत्यादि डालकर फेंक देते हैं, ये मासूम जीव स्वयं खोलकर खाने मे असमर्थ रहते हैं जिससे खोलने की थोड़ी कोशिश के बाद पूरा पूरा निगल लेते हैं, जिससे इनकी आंते अवरुद्ध हो जाती हैं, फिर भूख कम होकर सुस्त,बीमार और कष्ट से जीते हैं. उनका ऐसे जीवन देखना ना सिर्फ दुख भरा है बल्कि हमारे मनुष्य होने पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है, समस्त व्यवस्था की विफलता भी है , समाज के साथ अंततः राज्य सरकार की भी ज़िम्मेदारी बनती है .
जिन्हें आवारा कह कर बाड़ों में बांध दिया जाता है , उन्हें घास चरने से रोका जाता है . उन्हें चलने से वंचित होना पड़ता है जो उनके स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का हनन है . जैसे आदमी को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है , वैसे ही पशुओं को भी सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है. उनके अधिकारों को नज़र अंदाज़ करना संविधान द्वारा बनाये अधिकार -नियमों का उल्लंघन है.हमें इस मसले को तुरंत सुलझाना चाहिए .
शॉपिंग मॉल्स , पार्किंग , सिनेमा हॉल्स और क्रिकेट प्लेग्राउंड्स इत्यादि के लिए ज़मीन देते समय जब कोई दिक्कत नहीं आती , तो फिर चरागाह के लिए आवश्यक जमीन का आवंटन और संरक्षण क्यों नहीं ? चरागाह के लिए ज़मीन मिलने से , ये पशु स्वस्थ और सम्मान पूर्ण जीवन जी सकते हैं . आज पूरे भारतवर्ष मे गाय कचरा खाती हुई दिखाई देती है, बीमार और उदास दिखाई देती है, जो कि दुखद और हमारे गैर ज़िम्मेदार रवैये को उजागर करती है
आईये , इस समस्या पर मिल कर ध्यान दें और पशुओं के अधिकारों की सुरक्षा करें . राज्य सरकार से अनुरोध है की वे तुरंत इस समस्या का निदान करें और गायों को चरागाह हेतु ज़मीन प्रदान करें . ज़मीन को अतिक्रमण से बचाकर पशु कल्याण हेतु संरक्षण को बढ़ावा दे. जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाये जाएँ. डिस्पोजबल प्लास्टिक आइटम फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द हो तथा उन्हें नया, पर्यायवरण अनुकूल उद्योग को करने हेतु प्रोत्साहन, ट्रेनिंग दी जाये.
पशुओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए इस अपील को साइन करके सपोर्ट दें. हम मनुष्यों द्वारा ही बनाई गयी यह समस्या अब समाधान चाहती है जिसमें आपके समर्थन का योगदान अपेक्षित है।

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Petition created on 14 May 2026