नीमच - जावद - सिंगोली - कोटा रेल लाइन को स्वीकृति दी जाए।

The Issue

नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन 47 साल से कागजों में दफन है। नागरिकों ने कई बार इसकी खातिर आवाज बुलंद की, लेकिन हर बार की तरह मुद्दा व जनता की सुविधा को दरकिनार कर दिया गया।

जिले के लिए औद्योगिक, व्यापारिक व अन्य स्तर पर नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन का काफी महत्व है, लेकिन 47 साल से जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। अनदेखी की जा रही है। इस रेल बजट में भी नागरिकों को काफी उम्मीद थी, लेकिन हताशा हाथ लगी।

नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन एक निगाह में

कहां से कहां तक नीमच से कोटा तक

संभावित दूरी करीब 140 किमी

राज्यवार लंबाई मप्र में 65 व राजस्थान में 75 किमी

प्रस्तावित रूट नीमच, जावद, डीकेन, रतनगढ़, सिंगोली, भैंसरोड़गढ़, जवाहर सागर, कोटा।

इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ मप्र व राजस्थान के 4 जिले व 6 तहसील इससे लाभान्वित होंगी। 325 से ज्यादा गांव के नागरिक भी योजना से सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

यह होगा फायदा

- नीमच से कोटा की दूरी रेल मार्ग से लगभग 120 किमी कम होगी।

- दिल्ली-मुंबई मार्ग पर रतलाम की ओर रेल यातायात का दबाव कम होगा।

- यात्री और मालगाड़ियों का आवागमन आसान व सस्ता होगा।

- अपेक्षाकृत दूरी कम होने से ट्रेनों का संचालन खर्च कम होगा।

- क्षेत्र के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को गति मिलेगी।

- नीमच व आसपास के क्षेत्र रेल मानचित्र पर प्रमुखता से उभरेंगे।

- क्षेत्र के पर्यटन व पुरातत्व के महत्व को बल मिलेगा। रोजगार बढ़ेगा।

1970 से कागजों में योजना

नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन का सपना 1970 के दशक से दिखाया जा रहा है। 1970 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस रेल लाइन का सपना संजोया था तभी से इस दिशा में प्रयास शुरू हुए। मप्र व राजस्थान की जनता की मांग पर जनप्रतिनिधियों ने फौरी तौर पर प्रयास किए। 1993 में भी मुद्दा उठाया, लेकिन अनदेखी के कारण भविष्य की गर्त में समा गया। 2014 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खडगे ने रेल लाइन के सर्वे के लिए बजट का प्रावधान किया। इसके बावजूद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को मजबूती से नहीं रख सके। यही कारण है कि जनता की मांग करीब 47 साल बीतने के बाद भी अधूरी है।

अतः आप से करबद्ध निवेदन है कि आप इस मामले में हस्तक्षेप करके आगे की कार्रवाई हेतु वित्तीय तथा निर्माण स्वीकृति दिलवाने की पहल करें।
ताकि आपकी अनुकंपा से नीमच क्षैत्र के विकास को गति देते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सके।

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Advocate Ibrahim BohraPetition Starterमालवा राज्य गठन विचार मंच

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नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन 47 साल से कागजों में दफन है। नागरिकों ने कई बार इसकी खातिर आवाज बुलंद की, लेकिन हर बार की तरह मुद्दा व जनता की सुविधा को दरकिनार कर दिया गया।

जिले के लिए औद्योगिक, व्यापारिक व अन्य स्तर पर नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन का काफी महत्व है, लेकिन 47 साल से जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। अनदेखी की जा रही है। इस रेल बजट में भी नागरिकों को काफी उम्मीद थी, लेकिन हताशा हाथ लगी।

नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन एक निगाह में

कहां से कहां तक नीमच से कोटा तक

संभावित दूरी करीब 140 किमी

राज्यवार लंबाई मप्र में 65 व राजस्थान में 75 किमी

प्रस्तावित रूट नीमच, जावद, डीकेन, रतनगढ़, सिंगोली, भैंसरोड़गढ़, जवाहर सागर, कोटा।

इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ मप्र व राजस्थान के 4 जिले व 6 तहसील इससे लाभान्वित होंगी। 325 से ज्यादा गांव के नागरिक भी योजना से सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

यह होगा फायदा

- नीमच से कोटा की दूरी रेल मार्ग से लगभग 120 किमी कम होगी।

- दिल्ली-मुंबई मार्ग पर रतलाम की ओर रेल यातायात का दबाव कम होगा।

- यात्री और मालगाड़ियों का आवागमन आसान व सस्ता होगा।

- अपेक्षाकृत दूरी कम होने से ट्रेनों का संचालन खर्च कम होगा।

- क्षेत्र के औद्योगिक और व्यावसायिक विकास को गति मिलेगी।

- नीमच व आसपास के क्षेत्र रेल मानचित्र पर प्रमुखता से उभरेंगे।

- क्षेत्र के पर्यटन व पुरातत्व के महत्व को बल मिलेगा। रोजगार बढ़ेगा।

1970 से कागजों में योजना

नीमच-सिंगोली-कोटा रेल लाइन का सपना 1970 के दशक से दिखाया जा रहा है। 1970 में राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस रेल लाइन का सपना संजोया था तभी से इस दिशा में प्रयास शुरू हुए। मप्र व राजस्थान की जनता की मांग पर जनप्रतिनिधियों ने फौरी तौर पर प्रयास किए। 1993 में भी मुद्दा उठाया, लेकिन अनदेखी के कारण भविष्य की गर्त में समा गया। 2014 के रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खडगे ने रेल लाइन के सर्वे के लिए बजट का प्रावधान किया। इसके बावजूद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को मजबूती से नहीं रख सके। यही कारण है कि जनता की मांग करीब 47 साल बीतने के बाद भी अधूरी है।

अतः आप से करबद्ध निवेदन है कि आप इस मामले में हस्तक्षेप करके आगे की कार्रवाई हेतु वित्तीय तथा निर्माण स्वीकृति दिलवाने की पहल करें।
ताकि आपकी अनुकंपा से नीमच क्षैत्र के विकास को गति देते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सके।

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The Decision Makers

Shri Ashwini Vaishnav
Shri Ashwini Vaishnav
Railway Minister of India

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