देशभर में बढ़ते महिला अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं

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The Issue

याचिका का नया शीर्षक (New Petition Title)
"निर्भया! क्या तुमको अब भी बचाया न जाएगा?" संसद विशेष कानून बनाए—हर जिले में 50% महिला टास्क फोर्स हो और 6 महीने में इंसाफ मिलेयाचिका का शीर्षक (Petition Title)

"निर्भया! क्या तुमको अब भी बचाया न जाएगा?" संसद विशेष कानून बनाए—हर जिले में 50% महिला टास्क फोर्स हो और 6 महीने में इंसाफ मिले

याचिका का मुख्य विवरण (Petition Body / Description)आदरणीय प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी एवं देश की सभी महिला सांसदों,क्या भारत की बेटियों के साथ होने वाली बर्बरता सिर्फ एक अंतहीन चक्र बनकर रह जाएगी? कोई जघन्य अपराध होता है ➡️ राजनीतिक दल वहां सहानुभूति जताने और वोट बैंक की रोटियां सेकने पहुँचते हैं ➡️ पुलिस और अदालतों के चक्कर में कानूनी पेचीदगियां शुरू होती हैं ➡️ और कुछ समय बाद मामला हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।हम कब तक किसी नई निर्भया या किसी नई बेटी के साथ होने वाली क्रूरता का इंतजार करेंगे और फिर मोमबत्तियां जलाएंगे? अब 'नियति' मानकर चुप बैठने का समय हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। हम देश की आधी आबादी (लगभग 65 करोड़ महिलाओं) की तरफ से संसद में बैठी अपनी महिला सांसदों से सीधा सवाल पूछती हैं—"आपके पास कानून बनाने की सर्वोच्च शक्ति है, फिर भी आज तक इस समस्या को जड़ से खत्म करने वाली कोई विशेष नीति क्यों नहीं बन पाई?"अब हमें खोखले आश्वासनों और बार-बार होने वाली राजनीतिक बहसों की जरूरत नहीं है। हमें सीधे और ठोस एक्शन की जरूरत है। हम मांग करते हैं कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों को देश से उखाड़ फेंकने के लिए संसद में एक विशेष कानून पास किया जाए और इस 5-सूत्रीय 'जस्टिस मॉडल' (Root Cause Solution) को तुरंत देश के हर जिले में लागू किया जाए:🏢 एक जिला, एक केंद्रीय कार्यालय (Single Window Central Office): क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का लफड़ा हमेशा के लिए खत्म किया जाए। जिले के किसी भी कोने में अपराध हुआ हो, पीड़ित परिवार को थानों के चक्कर न काटने पड़ें, शिकायत सीधे इसी एक केंद्रीय कार्यालय में दर्ज हो।👮‍♀️ 50% महिला टास्क फोर्स (Dedicated Force): इस केंद्रीय कार्यालय में अनिवार्य रूप से न्यूनतम 50% महिला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात हों। इससे पीड़िता बिना किसी डर, संकोच या मानसिक प्रताड़ना के तुरंत हर सच और वैज्ञानिक सबूत बिना किसी देरी के दर्ज करा सकेगी।🔒 नो बेल, फुल प्रोटेक्शन (Zero Tampering): ट्रायल के दौरान आरोपी को किसी भी कीमत पर जमानत न मिले, वह अनिवार्य रूप से जेल में रहे ताकि गवाहों या सबूतों से छेड़छाड़ न हो। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को 24 घंटे पुख्ता कानूनी व पुलिस सुरक्षा दी जाए।⏳ 6 महीने में अंतिम फैसला (Time-Bound Trial): एफआईआर और चार्जशीट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत के आखिरी फैसले तक की पूरी समय-सीमा अधिकतम 6 महीने (180 दिन) तय हो। जुर्म साबित होते ही अपराधी को सीधे फांसी दी जाए।⚖️ संपत्ति कुर्की और झूठे आरोपों पर सख्त कार्रवाई: दोष सिद्ध होने पर अपराधी की पूरी कानूनी संपत्ति कुर्क (बेचकर) करके पीड़िता के पुनर्वास और इलाज के लिए सौंपी जाए। वहीं दूसरी तरफ, यदि किसी दुर्भावना या आपसी रंजिश के तहत किसी निर्दोष पर झूठा केस दर्ज कराया गया है, तो झूठा आरोप लगाने वाले के घर की नीलामी हो ताकि कानून का दुरुपयोग पूरी तरह रुके।यह मांग किसी एक दल या राजनीति की नहीं है, यह इस देश की हर मां, बहन और बेटी की सुरक्षा का सवाल है। जब तक हम समस्या का समाधान जड़ से नहीं करेंगे, यह अपराध चलते रहेंगे।मैं देश के सभी जागरूक नागरिकों, माताओं और बहनों से अपील करती हूँ कि इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और अपनी आवाज को राजनीतिक गलियारों तक पहुँचाने में मदद करें।अब बदलाव चाहिए, अब न्याय चाहिए!

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Barkha Rani SharmaPetition StarterInnovator

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