दिल्ली के Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं को कानूनी मान्यता वाला एकीकृत सत्यापन पत्र मिले


दिल्ली के Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं को कानूनी मान्यता वाला एकीकृत सत्यापन पत्र मिले
The Issue
दिल्ली में अनेक बच्चे बाल गृहों (Child Care Institutions) में अनाथ या देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (CNCP) के रूप में पलते हैं। जब ये बच्चे 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेते हैं, तो इन्हें Care Leaver कहा जाता है।
बाल कल्याण समिति (CWC) इन बच्चों को आधिकारिक आदेश देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई सरकारी विभाग इन आदेशों को मान्यता नहीं देते। अक्सर Care Leaver युवाओं से बार-बार सिफारिश पत्र मांगे जाते हैं, जिससे उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण योजनाओं और रोजगार में कठिनाइयाँ आती हैं।
इन बच्चों के पास कोई माता-पिता, परिवार या संपत्ति नहीं होती। उन्हें पहचान और अधिकार से वंचित रखना संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
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कानूनी आधार और मानवता का पहलू:
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 (JJ Act 2015, Section 46): Care Leaver युवाओं को पुनर्वास, वित्तीय सहायता और पहचान पत्र प्रदान करने का प्रावधान है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देश: Care Leaver को सभी सुविधाएँ और EWS/BPL मान्यता मिलनी चाहिए।
मानवता का पहलू: ये युवा अपनी बचपन की कठिनाइयाँ झेलकर बड़े हुए हैं। उन्हें एक कानूनी और एकीकृत सत्यापन पत्र देना न्याय, सम्मान और सहानुभूति का काम है।
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हमारी मांग:
हम मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से निवेदन करते हैं कि:
1. जिन Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं के पास CWC का आधिकारिक आदेश है, उन्हें Care Leaver के रूप में साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS/BPL) के रूप में कानूनी मान्यता दी जाए।
2. डिविजनल कमिश्नर कार्यालय से एकीकृत सत्यापन पत्र जारी किया जाए, जिसमें यह द्वितीयक मान्यता स्पष्ट रूप से लिखी हो।
3. यह सत्यापन पत्र दिल्ली के सभी विभागों में सर्वमान्य और बाध्यकारी हो — शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण योजनाएँ, पहचान पत्र और रोजगार के लिए।
4. विभाग Care Leaver से बार-बार सिफारिश पत्र न माँगें।
5. डिविजनल कमिश्नर सुनिश्चित करें कि हर जिले में समान और प्रभावी पालन हो।
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क्यों यह जरूरी है:
Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं का कोई परिवार या संपत्ति नहीं होती।
उन्हें अधिकार और पहचान से वंचित रखना उनके संवैधानिक और मानव अधिकारों का उल्लंघन है।
एकीकृत सत्यापन पत्र उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और रोजगार तक पहुँच सुनिश्चित करेगा।
यह कदम दिल्ली को Care Leaver और अनाथ बच्चों के अधिकारों का राष्ट्रीय मॉडल बनाएगा।
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अपील:
हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस पिटीशन पर हस्ताक्षर करें और मुख्यमंत्री व डिविजनल कमिश्नर से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करें कि Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं को तुरंत कानूनी मान्यता वाला एकीकृत सत्यापन पत्र और EWS/BPL की मान्यता मिले।
पिटीशन: दिल्ली के Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं की ओर से

The Issue
दिल्ली में अनेक बच्चे बाल गृहों (Child Care Institutions) में अनाथ या देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (CNCP) के रूप में पलते हैं। जब ये बच्चे 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेते हैं, तो इन्हें Care Leaver कहा जाता है।
बाल कल्याण समिति (CWC) इन बच्चों को आधिकारिक आदेश देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई सरकारी विभाग इन आदेशों को मान्यता नहीं देते। अक्सर Care Leaver युवाओं से बार-बार सिफारिश पत्र मांगे जाते हैं, जिससे उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण योजनाओं और रोजगार में कठिनाइयाँ आती हैं।
इन बच्चों के पास कोई माता-पिता, परिवार या संपत्ति नहीं होती। उन्हें पहचान और अधिकार से वंचित रखना संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
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कानूनी आधार और मानवता का पहलू:
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 (JJ Act 2015, Section 46): Care Leaver युवाओं को पुनर्वास, वित्तीय सहायता और पहचान पत्र प्रदान करने का प्रावधान है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देश: Care Leaver को सभी सुविधाएँ और EWS/BPL मान्यता मिलनी चाहिए।
मानवता का पहलू: ये युवा अपनी बचपन की कठिनाइयाँ झेलकर बड़े हुए हैं। उन्हें एक कानूनी और एकीकृत सत्यापन पत्र देना न्याय, सम्मान और सहानुभूति का काम है।
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हमारी मांग:
हम मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से निवेदन करते हैं कि:
1. जिन Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं के पास CWC का आधिकारिक आदेश है, उन्हें Care Leaver के रूप में साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS/BPL) के रूप में कानूनी मान्यता दी जाए।
2. डिविजनल कमिश्नर कार्यालय से एकीकृत सत्यापन पत्र जारी किया जाए, जिसमें यह द्वितीयक मान्यता स्पष्ट रूप से लिखी हो।
3. यह सत्यापन पत्र दिल्ली के सभी विभागों में सर्वमान्य और बाध्यकारी हो — शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण योजनाएँ, पहचान पत्र और रोजगार के लिए।
4. विभाग Care Leaver से बार-बार सिफारिश पत्र न माँगें।
5. डिविजनल कमिश्नर सुनिश्चित करें कि हर जिले में समान और प्रभावी पालन हो।
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क्यों यह जरूरी है:
Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं का कोई परिवार या संपत्ति नहीं होती।
उन्हें अधिकार और पहचान से वंचित रखना उनके संवैधानिक और मानव अधिकारों का उल्लंघन है।
एकीकृत सत्यापन पत्र उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और रोजगार तक पहुँच सुनिश्चित करेगा।
यह कदम दिल्ली को Care Leaver और अनाथ बच्चों के अधिकारों का राष्ट्रीय मॉडल बनाएगा।
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अपील:
हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इस पिटीशन पर हस्ताक्षर करें और मुख्यमंत्री व डिविजनल कमिश्नर से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करें कि Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं को तुरंत कानूनी मान्यता वाला एकीकृत सत्यापन पत्र और EWS/BPL की मान्यता मिले।
पिटीशन: दिल्ली के Care Leaver और पूर्ण अनाथ युवाओं की ओर से

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Petition created on 23 September 2022