दिल्ली के आदेश को रद्द करें: आवारा कुत्तों का संरक्षण


दिल्ली के आदेश को रद्द करें: आवारा कुत्तों का संरक्षण
The Issue
एक पशु प्रेमी के रूप में यह देख कर मेरा दिल दुखता है कि हमारे शहर दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़ कर उन्हें हटाने का आदेश जारी किया गया है। ये कुत्ते कोई समस्या नहीं, बल्कि हमारे समाज का एक हिस्सा हैं। वे हमारे शहर की गलियों का हिस्सा हैं और कई बार ये लोग के लिए सुरक्षा का काम भी करते हैं। हमें इन निर्दोष जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं करना चाहिए।
दिल्ली में कई गैर-लाभकारी संगठन और एनजीओ हैं जो आवारा कुत्तों की देखभाल में लगे हुए हैं। इन समूहों ने कई सफल टीकाकरण और नसबंदी अभियान चलाए हैं जो इन कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रण में रखते हैं। उचित योजना और सहयोग से हम इन कुत्तों को मानव समाज के साथ समायोजित कर सकते हैं, बिना उनपर किसी प्रकार की हिंसा किए।
आंकड़ों से पता चलता है कि आवारा कुत्ते हमारे शहर की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे कचरा प्रबंधन में सहायता करते हैं और उनसे जुड़े कई मिथक बेबुनियाद हैं। इनकी मौजूदगी से कोई विशेष वृद्धि निरंतर नहीं हुई है।
हमारी अपील है कि इस आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और इसकी जगह एक पशु-अनुकूल नीति का विकास किया जाए जो इन कुत्तों की भलाई को सुनिश्चित करे और साथ ही साथ जनसुरक्षा को भी ध्यान में रखे।
इस याचिका पर हस्ताक्षर करके, आप इन निर्दोष जीवों के अधिकारों की रक्षा में हिस्सा ले सकते हैं और एक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकते हैं। कृपया हस्ताक्षर करें और हमारे अभियान में शामिल हों।
दिल्ली में कई गैर-लाभकारी संगठन और एनजीओ हैं जो आवारा कुत्तों की देखभाल में लगे हुए हैं। इन समूहों ने कई सफल टीकाकरण और नसबंदी अभियान चलाए हैं जो इन कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रण में रखते हैं। उचित योजना और सहयोग से हम इन कुत्तों को मानव समाज के साथ समायोजित कर सकते हैं, बिना उनपर किसी प्रकार की हिंसा किए।
आंकड़ों से पता चलता है कि आवारा कुत्ते हमारे शहर की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे कचरा प्रबंधन में सहायता करते हैं और उनसे जुड़े कई मिथक बेबुनियाद हैं। इनकी मौजूदगी से कोई विशेष वृद्धि निरंतर नहीं हुई है।
हमारी अपील है कि इस आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और इसकी जगह एक पशु-अनुकूल नीति का विकास किया जाए जो इन कुत्तों की भलाई को सुनिश्चित करे और साथ ही साथ जनसुरक्षा को भी ध्यान में रखे।
इस याचिका पर हस्ताक्षर करके, आप इन निर्दोष जीवों के अधिकारों की रक्षा में हिस्सा ले सकते हैं और एक सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण को बढ़ावा दे सकते हैं। कृपया हस्ताक्षर करें और हमारे अभियान में शामिल हों।
Piyush SoniPetition Starter
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एक पशु प्रेमी के रूप में यह देख कर मेरा दिल दुखता है कि हमारे शहर दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़ कर उन्हें हटाने का आदेश जारी किया गया है। ये कुत्ते कोई समस्या नहीं, बल्कि हमारे समाज का एक हिस्सा हैं। वे हमारे शहर की गलियों का हिस्सा हैं और कई बार ये लोग के लिए सुरक्षा का काम भी करते हैं। हमें इन निर्दोष जानवरों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं करना चाहिए।
दिल्ली में कई गैर-लाभकारी संगठन और एनजीओ हैं जो आवारा कुत्तों की देखभाल में लगे हुए हैं। इन समूहों ने कई सफल टीकाकरण और नसबंदी अभियान चलाए हैं जो इन कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रण में रखते हैं। उचित योजना और सहयोग से हम इन कुत्तों को मानव समाज के साथ समायोजित कर सकते हैं, बिना उनपर किसी प्रकार की हिंसा किए।
आंकड़ों से पता चलता है कि आवारा कुत्ते हमारे शहर की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे कचरा प्रबंधन में सहायता करते हैं और उनसे जुड़े कई मिथक बेबुनियाद हैं। इनकी मौजूदगी से कोई विशेष वृद्धि निरंतर नहीं हुई है।
हमारी अपील है कि इस आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और इसकी जगह एक पशु-अनुकूल नीति का विकास किया जाए जो इन कुत्तों की भलाई को सुनिश्चित करे और साथ ही साथ जनसुरक्षा को भी ध्यान में रखे।
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दिल्ली में कई गैर-लाभकारी संगठन और एनजीओ हैं जो आवारा कुत्तों की देखभाल में लगे हुए हैं। इन समूहों ने कई सफल टीकाकरण और नसबंदी अभियान चलाए हैं जो इन कुत्तों की जनसंख्या को नियंत्रण में रखते हैं। उचित योजना और सहयोग से हम इन कुत्तों को मानव समाज के साथ समायोजित कर सकते हैं, बिना उनपर किसी प्रकार की हिंसा किए।
आंकड़ों से पता चलता है कि आवारा कुत्ते हमारे शहर की पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे कचरा प्रबंधन में सहायता करते हैं और उनसे जुड़े कई मिथक बेबुनियाद हैं। इनकी मौजूदगी से कोई विशेष वृद्धि निरंतर नहीं हुई है।
हमारी अपील है कि इस आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और इसकी जगह एक पशु-अनुकूल नीति का विकास किया जाए जो इन कुत्तों की भलाई को सुनिश्चित करे और साथ ही साथ जनसुरक्षा को भी ध्यान में रखे।
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Petition created on 12 August 2025