उत्तराखंड की ज़मीन बचाने के लिए मुख्यमंत्री से अपील
उत्तराखंड की ज़मीन बचाने के लिए मुख्यमंत्री से अपील
The Issue
उत्तराखंड की ज़मीन और यहां के लोगों का हक़ छिनता हुआ दिख रहा है। यह प्रश्न हमारे असंख्य भाई-बहनों के लिए चिंता का विषय बन चुका है। बाहर से आकर लोग कैसे इतनी आसानी से यहाँ की ज़मीन-जायदाद खरीद पा रहे हैं, और स्थानीय लोग पलायन के लिए मजबूर क्यों हो रहे हैं?
उत्तराखंड की भूमि उत्तराखंडियों का वज़ूद है। लेकिन, आज स्थिति यह हो गई है कि स्थानीय युवा रोजगार के अभाव में अपने पहाड़ों से बाहर की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, बाहरी लोग बिना किसी रुकावट के अपनी धन-दौलत से यहाँ अपनी जड़ें फैलाने में सफल हो रहे हैं। इस प्रक्रिया में, उत्तराखंड के व्यक्तिगत और सामाजिक ढांचे को गहरी चोट पहुँच रही है।
सरकारी नीति की कमी और प्रशासकीय उदासीनता इस परेशानी की जड़ें हैं। राज्य सरकार के द्वारा पहले से मौजूद कड़े नियम और पाबंदियों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। चाहे वह भूमि खरीद पर लगाम हो, या स्थानीय निवासियों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं हों—हर कदम ज़रूरी है ताकि लोग अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, हमें यह समझना होगा कि यह सिर्फ़ ज़मीन का मसला नहीं है। यह हमारे जीवन, संस्कृति और पहचान की रक्षा का विषय है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि उचित कदम उठाकर स्थानीय लोगों के हक़ों की रक्षा करें और इस गंभीर स्थिति पर ध्यान दें।
यदि आप चाहते हैं कि उत्तराखंड की पहचान और संस्कृति सुरक्षित रहे, तो कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और हमारी आवाज़ को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने में मदद करें।

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The Issue
उत्तराखंड की ज़मीन और यहां के लोगों का हक़ छिनता हुआ दिख रहा है। यह प्रश्न हमारे असंख्य भाई-बहनों के लिए चिंता का विषय बन चुका है। बाहर से आकर लोग कैसे इतनी आसानी से यहाँ की ज़मीन-जायदाद खरीद पा रहे हैं, और स्थानीय लोग पलायन के लिए मजबूर क्यों हो रहे हैं?
उत्तराखंड की भूमि उत्तराखंडियों का वज़ूद है। लेकिन, आज स्थिति यह हो गई है कि स्थानीय युवा रोजगार के अभाव में अपने पहाड़ों से बाहर की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, बाहरी लोग बिना किसी रुकावट के अपनी धन-दौलत से यहाँ अपनी जड़ें फैलाने में सफल हो रहे हैं। इस प्रक्रिया में, उत्तराखंड के व्यक्तिगत और सामाजिक ढांचे को गहरी चोट पहुँच रही है।
सरकारी नीति की कमी और प्रशासकीय उदासीनता इस परेशानी की जड़ें हैं। राज्य सरकार के द्वारा पहले से मौजूद कड़े नियम और पाबंदियों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। चाहे वह भूमि खरीद पर लगाम हो, या स्थानीय निवासियों के लिए विशेष रोजगार योजनाएं हों—हर कदम ज़रूरी है ताकि लोग अपने अस्तित्व की रक्षा कर सकें।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, हमें यह समझना होगा कि यह सिर्फ़ ज़मीन का मसला नहीं है। यह हमारे जीवन, संस्कृति और पहचान की रक्षा का विषय है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि उचित कदम उठाकर स्थानीय लोगों के हक़ों की रक्षा करें और इस गंभीर स्थिति पर ध्यान दें।
यदि आप चाहते हैं कि उत्तराखंड की पहचान और संस्कृति सुरक्षित रहे, तो कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और हमारी आवाज़ को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने में मदद करें।

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Petition created on 14 August 2026