"अंतिम पुकार: धरा की चीख या आपका संकल्प?"


"अंतिम पुकार: धरा की चीख या आपका संकल्प?"
The Issue
"सुनो ओ भारत के वीर पुत्रों, धरा तुम्हे हैं पुकार रही,
लालच की ये आरी देखो, कैसे मेरे रग-रग फाड़ रही।"
" केवल तुमको दिया हैं मैने, तुमसे कुछ नहीं मांगा हैं,
तुम्हारा पालन पोषण करके केवल तुम्हे सम्हाला हैं।"
"क्या सो गए हो देशवासियों? या रक्त तुम्हारा पानी है?
प्रकृति को जो उजाड़ दे, वो कैसा हिंदुस्तानी है?"
"सोना-चाँदी बहुत कमाया, क्या प्राण बचा ये पाएगा?
जब शुद्ध हवा ही नहीं बचेगी, तो क्या तिजोरी बैठा खाएगा?"
"ये सिर्फ जंगलों की जंग नहीं, ये राष्ट्र का स्वाभिमान है,
प्रकृति बची तो देश बचेगा, यही सनातन ज्ञान है।"
"ये जंग नहीं है पेड़ों की, ये अस्तित्व की लड़ाई है,
जो मौन खड़ा है आज यहाँ, उसने ही कब्र खुदाई है।"
"उठो वीरों! अब शपथ उठाओ! माँ का आँचल बचा लो तुम,
होने वाले महाविनाश से, इस माँ को छुड़ा लो तुम।
एक हस्ताक्षर, एक शपथ, और एक संकल्प महान करो,
भारत की इस पावन धरा का, फिर से तुम उत्थान करो!"
याचिका का मुख्य संदेश
प्रकृति का अपना एक संतुलन है। विधाता ने जितने मनुष्य और जीव-जंतु बनाए हैं, उनके अस्तित्व को बचाने के लिए उतने ही पेड़-पौधे भी दिए हैं। लेकिन आज का मनुष्य अपने लालच और लोभ में इस संतुलन को अपने हाथों से उजाड़ रहा है।जिसको पृथ्वी का महान जीव माना जाता हैं, जिसके पास अपने बुद्धि से निर्णय लेने की क्षमता हैं। जो इस दुनिया को आकर दे सकता हैं, मगर क्या कर रहा हैं विध्वंस।
अमीरों के फायदे के लिए सबका विनाश क्यों?
भारत के कई राज्यों में केवल मुट्ठी भर अमीर लोगों को और अधिक अमीर बनाने के लिए हज़ारों एकड़ जंगलों को साफ़ किया जा रहा है। "विकास के नाम पर हो रहा यह विनाश" असल में "मानव सभ्यता के अंत की शुरुआत" है। हम भूल रहे हैं कि जब पेड़ ही नहीं रहेंगे, तो ऑक्सीजन कहाँ से आएगी? और जब ऑक्सीजन ही नहीं होगी, तो यह सारा रुपया-पैसा और धन-दौलत किस काम आयेगा?
हम अपने विनाश के कारण खुद बन रहे हैं:
असंतुलन: वनों की अंधाधुंध कटाई से प्रकृति का चक्र टूट चुका है। कहीं भीषण गर्मी है, तो कहीं बिना मौसम की बाढ़।
बेघर होते जीव-जंतु: जंगल कटने से मासूम जानवर बस्तियों की ओर आ रहे हैं और मारे जा रहे हैं।
भविष्य का संकट: हम अपनी आने वाली पीढ़ी को विरासत में शुद्ध हवा नहीं, बल्कि जहरीला धुआं और बीमारियां देकर जा रहे हैं।
हमारी मांग:
हम भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से यह मांग करते हैं कि कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए वनों और प्रकृति की बलि देना तुरंत बंद किया जाए। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना बंद करें क्योंकि प्रकृति के बिना मानव जीवन संभव नहीं है।
प्रकृति की पूजा मतलब इसका संरक्षण केवल हम मनुष्य ही कर सकते हैं अगर हम केवल अपने इंसान होने का कर्तव्य निभाए ।
#SaveIndianForests #StopDeforestation #NatureBalance #OxygenFirst #EnvironmentProtection #GreenIndia #SaveHasedeo #ForestRights #ClimateActionNow
आज हस्ताक्षर करें! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और हमारे पास पछताने के लिए जीवन ही न बचे।

7
The Issue
"सुनो ओ भारत के वीर पुत्रों, धरा तुम्हे हैं पुकार रही,
लालच की ये आरी देखो, कैसे मेरे रग-रग फाड़ रही।"
" केवल तुमको दिया हैं मैने, तुमसे कुछ नहीं मांगा हैं,
तुम्हारा पालन पोषण करके केवल तुम्हे सम्हाला हैं।"
"क्या सो गए हो देशवासियों? या रक्त तुम्हारा पानी है?
प्रकृति को जो उजाड़ दे, वो कैसा हिंदुस्तानी है?"
"सोना-चाँदी बहुत कमाया, क्या प्राण बचा ये पाएगा?
जब शुद्ध हवा ही नहीं बचेगी, तो क्या तिजोरी बैठा खाएगा?"
"ये सिर्फ जंगलों की जंग नहीं, ये राष्ट्र का स्वाभिमान है,
प्रकृति बची तो देश बचेगा, यही सनातन ज्ञान है।"
"ये जंग नहीं है पेड़ों की, ये अस्तित्व की लड़ाई है,
जो मौन खड़ा है आज यहाँ, उसने ही कब्र खुदाई है।"
"उठो वीरों! अब शपथ उठाओ! माँ का आँचल बचा लो तुम,
होने वाले महाविनाश से, इस माँ को छुड़ा लो तुम।
एक हस्ताक्षर, एक शपथ, और एक संकल्प महान करो,
भारत की इस पावन धरा का, फिर से तुम उत्थान करो!"
याचिका का मुख्य संदेश
प्रकृति का अपना एक संतुलन है। विधाता ने जितने मनुष्य और जीव-जंतु बनाए हैं, उनके अस्तित्व को बचाने के लिए उतने ही पेड़-पौधे भी दिए हैं। लेकिन आज का मनुष्य अपने लालच और लोभ में इस संतुलन को अपने हाथों से उजाड़ रहा है।जिसको पृथ्वी का महान जीव माना जाता हैं, जिसके पास अपने बुद्धि से निर्णय लेने की क्षमता हैं। जो इस दुनिया को आकर दे सकता हैं, मगर क्या कर रहा हैं विध्वंस।
अमीरों के फायदे के लिए सबका विनाश क्यों?
भारत के कई राज्यों में केवल मुट्ठी भर अमीर लोगों को और अधिक अमीर बनाने के लिए हज़ारों एकड़ जंगलों को साफ़ किया जा रहा है। "विकास के नाम पर हो रहा यह विनाश" असल में "मानव सभ्यता के अंत की शुरुआत" है। हम भूल रहे हैं कि जब पेड़ ही नहीं रहेंगे, तो ऑक्सीजन कहाँ से आएगी? और जब ऑक्सीजन ही नहीं होगी, तो यह सारा रुपया-पैसा और धन-दौलत किस काम आयेगा?
हम अपने विनाश के कारण खुद बन रहे हैं:
असंतुलन: वनों की अंधाधुंध कटाई से प्रकृति का चक्र टूट चुका है। कहीं भीषण गर्मी है, तो कहीं बिना मौसम की बाढ़।
बेघर होते जीव-जंतु: जंगल कटने से मासूम जानवर बस्तियों की ओर आ रहे हैं और मारे जा रहे हैं।
भविष्य का संकट: हम अपनी आने वाली पीढ़ी को विरासत में शुद्ध हवा नहीं, बल्कि जहरीला धुआं और बीमारियां देकर जा रहे हैं।
हमारी मांग:
हम भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से यह मांग करते हैं कि कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए वनों और प्रकृति की बलि देना तुरंत बंद किया जाए। प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना बंद करें क्योंकि प्रकृति के बिना मानव जीवन संभव नहीं है।
प्रकृति की पूजा मतलब इसका संरक्षण केवल हम मनुष्य ही कर सकते हैं अगर हम केवल अपने इंसान होने का कर्तव्य निभाए ।
#SaveIndianForests #StopDeforestation #NatureBalance #OxygenFirst #EnvironmentProtection #GreenIndia #SaveHasedeo #ForestRights #ClimateActionNow
आज हस्ताक्षर करें! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और हमारे पास पछताने के लिए जीवन ही न बचे।

7
The Decision Makers
Share this petition
Petition created on 19 December 2025