लोकतंत्र शुद्धिकरण एवं प्रशासनिक जवाबदेही विधेयक

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The Issue

भारत गणराज्य चुनाव सुधार  और प्रशासनिक सुधारों के लिए एक विधेयक - 2025

कई मौलिक और कानूनी संशोधन  किया जाना चाहिए,

 

सुधार विधेयक, 2025 ( Reforms Bill, 2025)

भाग I: उद्देश्यों और कारणों का विवरण (Statement of Objects and Reasons)

भारत के लोकतंत्र की गुणवत्ता, विधायी संस्थाओं की शुचिता, और जनप्रतिनिधियों की योग्यता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विधेयक प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

1.  प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता: संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करना।

2.  न्यायिक स्वतंत्रता की सुरक्षा: सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु उन्हें सेवा-निवृत्ति के बाद लोकसभा/राज्यसभा सीट का आवंटन पर प्रतिबंधित करना। (निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।)

3.  राजनीति का अपराधीकरण रोकना: गंभीर आरोपित व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से अस्थायी रूप से अयोग्य घोषित करना।

4.  वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही: उम्मीदवारों की घोषित संपत्ति एवं आय के स्रोत का पूर्व-सत्यापन।

5.  NOTA को परिणामी शक्ति देना: ‘इनमें से कोई नहीं’ (NOTA) विकल्प को प्रभावी बनाना ताकि जन असंतोष को महत्व मिल सके।

6.  चुनावी सुरक्षा प्रणाली और निगरानी में पारदर्शिता।

7.  जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं, जवाबदेही एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

8.  लोकसभा व विधानसभा सदस्यों के आवागमन पर नियंत्रण एवं सार्वजनिक जीवन में अनुशासन की स्थापना, सार्वजनिक परिवहन समाधान – ट्रैफिक और प्रदूषण नियंत्रण हेतु।

9.  सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर नियंत्रण: औद्योगिक ऋणों की माफी/रियायतों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली स्थापित करना ताकि करदाताओं के पैसे की सुरक्षा हो सके।

10.  सार्वजनिक धन, वित्तीय जानकारी, और राजनीतिक/सरकारी पदाधिकारियों की संपत्ति की पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

11.  राजनीतिक/सरकारी पदाधिकारियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य उपयोग ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार हो।

12.  खेल शासी निकायों से राजनीतिक हस्तक्षेप को हटाना और योग्यता आधारित नेतृत्व को बढ़ावा देना।

13.  आरक्षण प्रमाणन में पारदर्शिता और सरकारी परीक्षाओं को घोटाला-मुक्त बनाना।

14.  सरकारी परीक्षाओं में सुधार और सुरक्षा

 

 

भाग II: प्रस्तावित कानूनी संशोधन खंड

1. न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता

संविधान संशोधन

अनुच्छेद 84 (लोकसभा) में नया उप-खंड (d):
"(d) उसके पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री या समकक्ष शैक्षणिक योग्यता हो।"
अनुच्छेद 173 (राज्य विधानसभाएं) में नया उप-खंड (d):
"(d) उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 12वीं कक्षा उत्तीर्ण का प्रमाण पत्र हो।"
शैक्षणिक योग्यता का विशिष्ट ढाँचा (संशोधित)

सदन/निकाय          पुरुष के लिए न्यूनतम योग्यता         महिला के लिए न्यूनतम योग्यता

लोकसभा                            स्नातक                                                 12वीं कक्षा

विधानसभा                          12वीं कक्षा                                            8वीं कक्षा

पंचायत/नगरपालिका       8वीं कक्षा                                             5वीं कक्षा

प्रमाणन: सभी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ सत्यापित शैक्षिक प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।

 

2. न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना (सेवानिवृत्त न्यायाधीशों पर प्रतिबंध)

संविधान संशोधन

अनुच्छेद 102 (1) – संसद सदस्यता की निरर्हता में नया उप-खंड (f):
"(f) यदि व्यक्ति भारत के सर्वोच्च न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहा हो, तो सेवानिवृत्ति के बाद वह संसद का मनोनीत सदस्य नहीं बन सकेगा।"
 

अनुच्छेद 191 (1) – राज्य विधानमंडल सदस्यता की निरर्हता में समान उप-खंड (f) जोड़ा जाए।

         नोट:  निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।

 
3. गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि पर प्रतिबंध (राजनीति का अपराधीकरण रोकना)

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन

धारा 8 में नया उप-खंड (3A) जोड़ा जाए:
"कोई भी व्यक्ति जिसके विरुद्ध 5 वर्ष या उससे अधिक की सज़ा वाले संज्ञेय अपराध के लिए न्यायालय द्वारा आरोप तय किए गए हों, वह तब तक अस्थायी रूप से चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य होगा जब तक वह दोषमुक्त (Acquitted) न हो जाए।"
          *शर्त:   ऐसे मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा पूरी की जाएगी।

नई धारा (संगठित अपराध पर स्थायी अयोग्यता):
"यदि व्यक्ति किसी डॉन, आतंकी, बाहुबली या संगठित अपराध से जुड़ा है या ऐसे व्यक्तियों का समर्थन करता है, तो उसे स्थायी रूप से अयोग्य ठहराया जाए।"
 

अत्यधिक गंभीर अपराधों के लिए नई धारा (पीढ़ीगत अयोग्यता):
"जिन पर हत्या, बलात्कार, भ्रष्टाचार, चोरी, या सरकारी कर्मी पर हमले जैसे गंभीर अपराध के केस हैं, उन्हें और उनकी आगामी पांच पीढ़ियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए।"
 
4. वित्तीय पारदर्शिता और सत्यापन

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन

धारा 33A में संशोधन:
"हर उम्मीदवार को पिछले तीन वर्षों के ITR (आयकर रिटर्न) की प्रमाणित प्रतिलिपि जमा करनी होगी।"
 

नई धारा 33AA (सत्यापन तंत्र):
"निर्वाचन आयोग, आयकर विभाग और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से सभी उम्मीदवारों की संपत्ति और आय के स्रोतों का सत्यापन करेगा। यदि कोई जानकारी झूठी पाई जाती है, तो धारा 125A के अंतर्गत नामांकन रद्द किया जाएगा।"
 

धारा 125A (झूठे हलफनामे पर दंड) में कठोर दंड का प्रावधान जोड़ा जाए।
 

नया नियम (व्यय की पारदर्शिता):
"सभी राजनेताओं व सरकारी कर्मियों को ₹75,000 से ऊपर की कोई संपत्ति या वस्तु खरीदने पर उसका वित्तीय स्रोत बताना अनिवार्य होगा।"
 
5. NOTA (इनमें से कोई नहीं) को प्रभावी बनाना

चुनाव संचालन नियम, 1961 में संशोधन

नया नियम 64A (परिणामी NOTA):
"यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में NOTA को डाले गए मत कुल वैध मतों का 50% या उससे अधिक हों, तो चुनाव परिणाम रद्द कर दिया जाएगा।"
 

नया नियम 64B (NOTA बहुमत के बाद की स्थिति):
"NOTA बहुमत के कारण रद्द चुनाव की स्थिति में:
                   a). 60 दिनों के भीतर पुनः चुनाव कराए जाएं।

                   b). सभी पूर्ववर्ती उम्मीदवार (और उनके परिवार के सदस्य) उस निर्वाचन क्षेत्र और आने वाले किसी भी चुनाव में, 5 चुनावों तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे।"
 
6. चुनावी सुरक्षा प्रणाली और निगरानी में पारदर्शिता

निर्वाचन आयोग अधिनियम/अधिसूचना के माध्यम से प्रावधान

बूथ निगरानी: सभी मतदान केंद्रों पर CCTV कैमरे अनिवार्य किए जाएं। मतदान केंद्र से 500 मीटर के दायरे में लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था हो।
 

मतदाता सत्यापन: मतदान के तुरंत बाद मतदाता को SMS प्राप्त हो जिसमें वोट देने का समय, बूथ नंबर और पता हो।
 

नक्सल/प्रभावित क्षेत्र: नक्सल प्रभावित/अशांत क्षेत्रों में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर जाँच हो, और नई टीम की निगरानी में 30-60 दिनों के भीतर पुनः चुनाव, दोगुनी नई सुरक्षा टीम के साथ की जाए।
 
 
7. जनप्रतिनिधियों की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाओं का युक्तिकरण

विशेष कानून / RPA / लोकसभा/विधानसभा नियमों के अंतर्गत

दैनिक कार्य सूची और प्रकाशन: सभी MP/MLA रोज़ किए गए जनसेवा कार्यों की एक नोटबुक में दर्ज करें, जिसे अगली सुबह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के समाचारपत्रों में प्रकाशित किया जाए।
 

वेतन कटौती और जवाबदेही: यदि कोई सांसद/विधायक किसी दिन कोई भी निर्धारित विधायी या जनसेवा कार्य नहीं करता है, तो उस दिन का वेतन काट लिया जाए।
 

सुविधाएँ और पेंशन (कार्यकाल आधारित):
                 a).  जनसेवक को मिलने वाली सरकारी सुविधाएँ केवल कार्यकाल के दौरान मिलें, चुनाव हारने के बाद समाप्त कर दी जाएँ।


                b). पेंशन: केवल वही प्रतिनिधि जो लगातार तीन बार चुनाव जीते हों और जिनका कार्यकाल स्वच्छ हो (कोई आपराधिक/अनुशासनात्मक केस न हो), केवल उन्हीं को पेंशन का लाभ दिया जाए।


                  c). निजी सुरक्षा रखने वाले जनप्रतिनिधियों को सरकारी सुरक्षा न दी जाए।
 

 
8. सार्वजनिक परिवहन समाधान (ट्रैफिक और प्रदूषण नियंत्रण हेतु)

निर्वाचन आयोग और लोकसभा सचिवालय द्वारा नियमावली

समूह यात्रा अनिवार्य: सभी लोकसभा और विधान सभा सदस्यों के लिए समर्पित बस सेवा शुरू की जाए। सदस्यों का अपने घर/बंगले से विधानसभा/संसद भवन तक आवागमन बसों के माध्यम से अनिवार्य किया जाए।
 

वीआईपी सुविधा का निलंबन: यदि कोई सदस्य बस का समय पर उपयोग नहीं करता है तो उसे कोई विशेष वीआईपी सुविधा (जैसे समर्पित सरकारी वाहन) नहीं मिलेगी।
 
 
9. सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर नियंत्रण (औद्योगिक ऋणों की माफी/रियायत)

संविधान, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, या विशेष कानून के अंतर्गत संशोधन

सार्वजनिक ऋण माफी पर प्रतिबंध: केंद्र या राज्य सरकार सार्वजनिक करदाताओं के पैसे (टैक्स) के आधार पर किसी भी औद्योगिक या सार्वजनिक व्यक्ति के करोड़ों के ऋण को पूर्णतः माफ़ नहीं करेगी।
 

पार्टी फंड से माफी का विकल्प: यदि कोई राजनीतिक दल किसी उद्योगपति या व्यक्ति के ऋण को माफ़ करना चाहता है, तो यह केवल संबंधित पार्टी के कोष (Party Fund) से ही किया जा सकता है, न कि सरकारी खजाने से।
 

घाटे की स्थिति में सहायता: यदि कोई कंपनी वर्तमान में घाटे की स्थिति के कारण ऋण राशि नहीं लौटा पाती है, तो सरकार निर्धारित ब्याज दर के (आधा) पर उसे ऋण चुकाने में सहायता प्रदान कर सकती है, जिसके लिए एक स्पष्ट पुनर्भुगतान योजना (Repayment Plan) बनाना अनिवार्य होगा। ऋण राशि का  1/25 भाग ही मात्र माफ किया जा सकता है।


10. सार्वजनिक धन और पदाधिकारियों की संपत्ति की पारदर्शिता (RTI संशोधन)

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI) में संशोधन

नई धारा 4(1)(b)(xi-A) (सार्वजनिक धन का प्रकटीकरण):
"प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण, केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राप्त और निवेश किए गए सार्वजनिक धन के स्रोत, राशि, और उपयोग के संबंध में सभी जानकारी को सक्रिय रूप से सार्वजनिक करेगा, और ऐसी जानकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत 'सूचना' की परिभाषा में शामिल माना जाएगा।"
 

विशेष स्पष्टीकरण (RTI अधिनियम, धारा 2(f) में):
"सार्वजनिक धन से संबंधित सभी फंड, जिनमें मुख्यमंत्री राहत कोष (CM Fund), आपदा राहत कोष, प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (PM CARES Fund), और सार्वजनिक सेवा/टैक्स के माध्यम से जमा/उपयोग किए गए कोई भी अन्य फंड शामिल हैं, को स्पष्ट रूप से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 'सूचना' के दायरे में लाया जाएगा..."
 

नई धारा 4(1)(b)(xxi) (पदाधिकारियों की संपत्ति का प्रकटीकरण):
"प्रत्येक सांसद, विधायक, और 'ए' ग्रुप के सरकारी अधिकारी (जैसे IAS, IPS) और उनके जीवनसाथी की घोषित वित्तीय जानकारी, संपत्ति विवरण, और निवेश संबंधी विवरण (जिसमें ITR और संपत्ति के हलफनामे शामिल हैं) को भी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रकट किया जाने योग्य माना जाएगा, बशर्ते यह सार्वजनिक हित के अनुरूप हो।"
 

11. राजनीतिक/सरकारी पदाधिकारियों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य उपयोग

लोकसभा और राज्यसभा सदस्य वेतन, भत्ते और पेंशन अधिनियम, 1954/राज्य विधानमंडल अधिनियमों में संशोधन

नई धारा 8A (स्वास्थ्य सेवा का अनिवार्य उपयोग):
"वर्तमान में कार्यरत सांसद, विधायक, और 'ए' ग्रुप के सरकारी अधिकारी (जैसे IAS, IPS) और उनके आश्रित पारिवारिक सदस्यों को किसी भी सरकारी या संसदीय चिकित्सा प्रतिपूर्ति या वित्तीय सहायता का लाभ लेने के लिए, उनके निवास क्षेत्र/निर्वाचन क्षेत्र/कार्यस्थल के सबसे नज़दीकी सरकारी अस्पताल में अपना उपचार कराना अनिवार्य होगा।"
              o   शर्त: गंभीर आपातकाल की स्थिति में, उन्हें किसी भी नज़दीकी अस्पताल में प्रारंभिक उपचार लेने की अनुमति होगी, लेकिन निरंतर देखभाल (Continuing Care) और सभी प्रतिपूर्ति या वित्तीय सहायता सरकारी अस्पताल की सिफारिशों के अधीन होगी।

 

12. खेल शासी निकायों से राजनीतिक हस्तक्षेप को हटाना

भारतीय खेल संहिता (National Sports Code of India) या विशेष 'राष्ट्रीय खेल प्रबंधन अधिनियम' में संशोधन

नया खंड (पदाधिकारियों की अयोग्यता):
"कोई भी व्यक्ति जिसने राज्य या केंद्र सरकार में किसी भी विधायी, कार्यकारी, या सार्वजनिक पद पर (जैसे सांसद, विधायक, मंत्री, या किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी) पिछले 10 वर्षों के दौरान कार्य किया हो, वह IOA, BCCI, या किसी भी अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के गवर्निंग काउंसिल, कार्यकारी बोर्ड, या किसी भी अन्य शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए चुनाव लड़ने या मनोनीत होने हेतु स्थायी रूप से अयोग्य होगा।"
 

योग्यता मापदंड का सख्त क्रियान्वयन:
"NSF के अध्यक्ष, सचिव, और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए अनिवार्य योग्यता मापदंड केवल ऐसे व्यक्तियों तक सीमित रहेंगे:
                    a). जिन्होंने राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उस खेल का प्रतिनिधित्व किया हो।

                   b). खेल प्रबंधन, वित्त, या संबंधित कानूनी क्षेत्र में मान्यता प्राप्त पेशेवर डिग्री और न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव हो।

                   c). खेल से संबंधित कोई भी व्यक्ति अपने निकट संबंधी (जीवनसाथ्री, संतान) को किसी भी पद पर सीधे मनोनीत या चुनाव लड़ने के लिए प्रस्तावित नहीं कर सकता।"

 

13. आरक्षण प्रमाणन में पारदर्शिता और सत्यापन

एक विशेष "आरक्षण एवं पात्रता सत्यापन अधिनियम" या मौजूदा कानूनों में संशोधन

आरक्षण प्रमाणन में पारदर्शिता:
                     a). डिजिटल और आधार-आधारित प्रमाणन: SC/ST, OBC, EWS, विकलांगता, और आय प्रमाण पत्र जारी करने और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज़ किया जाएगा और आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से जोड़ा जाएगा।

                     b). समय-सीमा: किसी भी प्रमाण पत्र के आवेदन और अंतिम सत्यापन के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की जाएगी।

                    c). जाली प्रमाण पत्रों पर दंड: जाली प्रमाण पत्रों के उपयोग पर 7 वर्ष तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान होगा, और ऐसे लाभ प्राप्त करने वाले को सरकारी नौकरियों या शैक्षणिक संस्थानों से स्थायी रूप से अयोग्य घोषित किया जाएगा।

                  d). त्रुटिपूर्ण प्रमाणन पर अधिकारियों की जवाबदेही: यदि कोई अधिकारी जानबूझकर गलत प्रमाण पत्र जारी करता है, तो उसे निलंबित कर, उस पर जांच होनी चाहिए उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।

 

14. सरकारी परीक्षाओं में सुधार और सुरक्षा

'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' का सख्त कार्यान्वयन और अतिरिक्त प्रावधान

सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्यवाही:  सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' को सख्ती से लागू किया जाएगा, जिसमें पेपर लीक और नकल में शामिल व्यक्तियों के लिए कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान होगा
 

तकनीकी सुरक्षा उपाय:   
                a).डिजिटल पेपर वितरण: प्रश्न-पत्रों के अलावा, उत्तर-पत्रक (OMR) की स्कैनिंग और कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) के रॉ स्कोर डेटा को एन्क्रिप्टेड और टेंपर-प्रूफ सर्वर पर स्टोर करने का प्रावधान जोड़ा जाए।

               b). AI-आधारित निगरानी और प्रमाणीकरण: AI-आधारित निगरानी को परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद डेटा एनालिसिस (जैसे: असामान्य स्कोर पैटर्न, एक ही केंद्र से ज़्यादा चयन) के लिए भी अनिवार्य किया जाए ताकि गिरोहों की पहचान हो सके ।

 

पारदर्शिता और जवाबदेही:
               a). प्रश्न-पत्रों का सार्वजनिकरण: उत्तर कुंजी जारी होने के बाद सभी प्रश्न-पत्रों को अनिवार्य रूप से सार्वजनिक किया जाएगा।

               b). निश्चित समय-सीमा: भर्ती प्रक्रिया (परीक्षा की तिथि से लेकर अंतिम नियुक्ति तक) के लिए अधिकतम 180 दिनों की समय-सीमा तय की जाएगी, और इस समय-सीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
 

 

भाग III: निष्कर्ष और संकल्प

"इस विधेयक का उद्देश्य भारतीय लोकतंत्र में योग्यता, पारदर्शिता, और जवाबदेही की स्थापना करना है। इसके माध्यम से लोकतंत्र में अपराध, भ्रष्टाचार और अपात्रता का समापन हो सकेगा और एक नया आदर्श स्थापित किया जा सकेगा।"

"जनता के पैसे का सही उपयोग हो, सार्वजनिक ऋण माफी पर जवाबदेही और पारदर्शिता हो, और संसद/विधानसभा में सिर्फ योग्य, ईमानदार, और जनसेवक सोच रखने वाले लोग पहुँचें।"

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Petition created on 30 October 2025