फाइनल ईयर स्टूडेंट के साथ पक्षपात क्यों? हमारी परीक्षा रद्द कर दी जाए, हमें भी प्रमोट करें


फाइनल ईयर स्टूडेंट के साथ पक्षपात क्यों? हमारी परीक्षा रद्द कर दी जाए, हमें भी प्रमोट करें
समस्या
यह प्रार्थना पत्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ,पंजाब विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा विभाग हरियाणा एवं पंजाब को लिखी जा रही है। यह अंतिम वर्षीय विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर है। मैं चाहता हूं, हमारे समर्थन में हरियाणा और पंजाब के ही नहीं ,बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों को सामने आना चाहिए।
मैं नहीं जानता, इस प्रार्थना पत्र पर कौन-कौन साइन करेगा। मैं जो बस जानता हूं, वह यह है कि फाइनल ईयर स्टूडेंट के साथ सही नहीं हो रहा है। कोरोनावायरस को आए कई दिन हो चुके हैं। लॉकडाउन भी लगा, और अब खूल भी गया । अब दिनों दिन कोरोनावायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई इलाकों में, जहां कोरोनावायरस का नाम भी नहीं था , वहां फिर से सख्ती बढ़ाई जा चुकी है क्योंकि वहां करोना के नए केस आ गए हैं।
प्रथम वर्षीय एवं द्वितीय वर्षीय विद्यार्थियों को प्रमोट करने की बात की जा रही है, जिन्होंने अभी तक इतनी परीक्षाएं भी नहीं दी हैं, जितनी अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने दे दी हैं। अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की चिंता कौन करेगा?
वहीं दूसरी ओर , जिन विद्यार्थियों की परीक्षाओं में रिअपीयर है , जो अभी पेपर देकर खत्म हो जानी थी। उनको अगले वर्ष तक का इंतजार करने के लिए कहा गया है। विद्यार्थियों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जहां डिग्री 3 साल में मिलनी थी, वह 4 साल में मिलती नजर आ रही है।
और तो और, higher education department की ओर से जारी गाइड लाइन में यह भी लिखा है की हॉस्टल्स बंद रहेंगे।
अन्य राज्यों के बच्चे, जो दूसरे राज्य में पढ़ने जाते हैं वो आखिर कहां रुकेंगे? बस ट्रांसपोर्ट सिस्टम अभी पूरी तरह से खुला नहीं है।
हमें परवाह करनी चाहिए , उस चीज के लिए की परीक्षा के दौरान हम में से किसी को यह बीमारी ना लग जाए।
वहीं परीक्षा को लेकर सभी विद्यार्थियों के मन में एक दबाव सा है। यह दबाव एक प्रकार का डर ही है।
यह समस्या है देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की। चाहे वह हरियाणा के विश्वविद्यालय हो, या फिर पंजाब के।
मुझे परवाह है, मेरे परिवार की, मेरे समाज की । मैं चाहता हूं की मैं यह बीमारी मेरे समाज में और मेरे परिवार में न लेकर जाऊं ।
इसी उद्देश्य से , मैं यह प्रार्थना करता हूं की अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षा रद्द की जाए एवं सभी के साथ बराबर व्यवहार करते हुए सभी अगली कक्षाओं में प्रमोट किए जाएं।
इसलिए मैं इस प्रार्थना पत्र पर अपने हस्ताक्षर करता हूं, एवं समर्थन के तौर पर इसे मेरे अन्य सहपाठियों को शेयर भी करता हूं। कृपया मेरा समर्थन करें।
समस्या
यह प्रार्थना पत्र कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ,पंजाब विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा विभाग हरियाणा एवं पंजाब को लिखी जा रही है। यह अंतिम वर्षीय विद्यार्थियों की परीक्षा को लेकर है। मैं चाहता हूं, हमारे समर्थन में हरियाणा और पंजाब के ही नहीं ,बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों को सामने आना चाहिए।
मैं नहीं जानता, इस प्रार्थना पत्र पर कौन-कौन साइन करेगा। मैं जो बस जानता हूं, वह यह है कि फाइनल ईयर स्टूडेंट के साथ सही नहीं हो रहा है। कोरोनावायरस को आए कई दिन हो चुके हैं। लॉकडाउन भी लगा, और अब खूल भी गया । अब दिनों दिन कोरोनावायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई इलाकों में, जहां कोरोनावायरस का नाम भी नहीं था , वहां फिर से सख्ती बढ़ाई जा चुकी है क्योंकि वहां करोना के नए केस आ गए हैं।
प्रथम वर्षीय एवं द्वितीय वर्षीय विद्यार्थियों को प्रमोट करने की बात की जा रही है, जिन्होंने अभी तक इतनी परीक्षाएं भी नहीं दी हैं, जितनी अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने दे दी हैं। अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की चिंता कौन करेगा?
वहीं दूसरी ओर , जिन विद्यार्थियों की परीक्षाओं में रिअपीयर है , जो अभी पेपर देकर खत्म हो जानी थी। उनको अगले वर्ष तक का इंतजार करने के लिए कहा गया है। विद्यार्थियों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। जहां डिग्री 3 साल में मिलनी थी, वह 4 साल में मिलती नजर आ रही है।
और तो और, higher education department की ओर से जारी गाइड लाइन में यह भी लिखा है की हॉस्टल्स बंद रहेंगे।
अन्य राज्यों के बच्चे, जो दूसरे राज्य में पढ़ने जाते हैं वो आखिर कहां रुकेंगे? बस ट्रांसपोर्ट सिस्टम अभी पूरी तरह से खुला नहीं है।
हमें परवाह करनी चाहिए , उस चीज के लिए की परीक्षा के दौरान हम में से किसी को यह बीमारी ना लग जाए।
वहीं परीक्षा को लेकर सभी विद्यार्थियों के मन में एक दबाव सा है। यह दबाव एक प्रकार का डर ही है।
यह समस्या है देश के तमाम बड़े विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की। चाहे वह हरियाणा के विश्वविद्यालय हो, या फिर पंजाब के।
मुझे परवाह है, मेरे परिवार की, मेरे समाज की । मैं चाहता हूं की मैं यह बीमारी मेरे समाज में और मेरे परिवार में न लेकर जाऊं ।
इसी उद्देश्य से , मैं यह प्रार्थना करता हूं की अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षा रद्द की जाए एवं सभी के साथ बराबर व्यवहार करते हुए सभी अगली कक्षाओं में प्रमोट किए जाएं।
इसलिए मैं इस प्रार्थना पत्र पर अपने हस्ताक्षर करता हूं, एवं समर्थन के तौर पर इसे मेरे अन्य सहपाठियों को शेयर भी करता हूं। कृपया मेरा समर्थन करें।
कामयाबी
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13 जून 2020 पर पेटीशन बनाई गई