आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग

समस्या

"रूह-ए-आजमगढ़ में तामीर-ए-विश्वविद्यालय, उतना ही प्रासंगिक है जितना किसी बेघर को घर देना।"

गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा की जरुरत ने आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग के लिए प्रेरित किया। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग चार दशक से भी ज्यादा पुरानी है। शिक्षा के दृष्टिकोण से अगर एक पीढ़ी के लिए  20 वर्ष माना जाय तो 40 वर्ष में दो पीढ़िया बीत चुकी है। अब हम तीसरी पीढ़ी के लोग हैं जो आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश सरकार इस मांग को ठुकरा  रही है। सरकार के मंत्री श्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना का औचित्य इस लिए नहीं पाया गया क्योंकि पड़ोस के जनपद वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, इलाहाबाद में पहले से ही विश्वविद्यालय स्थापित है। माननीय मंत्री महोदय के इस जबाब से, आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की चाहत रखने वाले  लोग हतप्रभ और इताव हैं क्योंकि ऐसे तर्कहीन और मनमानीपूर्ण जबाब की तख़य्युल नहीं थी। माननीय जी का यह जबाब उस डरावने  सांप जैसा है जो विश्वविद्यालय में पढ़ने की चाहत रखने वाले हजारों युवाओं को अपनी फुंफकार से डरा रहा है।

      मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्या आपकी सरकार वास्तव में इस तरह के प्रतिमान पर निर्णय लेती है? माननीय मंत्री जी मैं आपको याद दिला दू कि वर्तमान सरकार ने ही 2013-2014 के बजट भाषण में इलाहाबाद में राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया था। जबकि इलाहाबाद में पहले से ही केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, ओपेन विश्वविद्यालय सहित चार विश्वविद्यालय थे। इसके अलावा एनo आईo टीo और ट्रिपल आईo टीo भी था। ऐसे में वहा विश्वविद्यालय की खास जरुरत नहीं थी लेकिन  सरकार ने वहा विश्वविद्यालय खोला।  माननीय मंत्री जी मेरा मानना है कि एक जनपद में चार विश्वविद्यालय स्थापित करने से अच्छा है कि चार जनपद में एक-एक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय। जो ज्यादा तर्क संगत और प्रासंगिक होगा। 

       दूसरा सवाल, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि अगर जौनपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, फैजाबाद की जनसँख्या 24 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, गोरखपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा दो विश्वविद्यालय है, बनारस (वाराणसी) की जनसँख्या 36 लाख है और वहा तीन विश्वविद्यालय है, इलाहाबाद की जनसँख्या 59 लाख है और वहा चार विश्वविद्यालय है। तो आजमगढ़ की जनसँख्या 46 लाख है फिर वहा विश्वविद्यालय क्यों नहीं होनी चाहिए? इस बात से तो हर कोई सहमत होता है कि आज विश्वविद्यालय बड़े-बड़े शहरों में बनाने के बजाय गरीब ग्रामीण इलाकों में बनाया जाय तो ज्यादा प्रासंगिक होगा। इस लेहाज से भी आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना जरुरी है क्योंकि जनगड़ना 2011 के अनुसार आजमगढ़ में 91.5 % जनसंख्या ग्रामीण है और जनसंख्या के दृष्टिकोण से आजमगढ़ उत्तर प्रदेश का चौथा सबसे बड़ा जनपद है इस लिए यहाँ विश्वविद्यालय बनाया जाना अत्यंत जरुरी है।

तीसरा सवाल, माननीय मंत्री जी, आपने इलाहाबाद, बनारस, और गोरखपुर में विश्वविद्यालय होने की बात की है। श्रीमान जी, बता दू की आजमगढ़ से बनारस और इलाहाबाद की दूरी 100 से 200 किलोमीटर  है यहाँ पढ़ने के लिए प्रवसन करना पड़ता है। जो गरीब और अतिगरीब का बच्चा सोच भी नहीं पाता है और उसके प्रतिस्थापन में वह दिल्ली, बम्बई .... आदि जगहों पर रोजगार तलासता है जिससे वह उच्च शिक्षा से पूरी तरह बंचित हो जाता है।

     उत्तर प्रदेश और विश्व बैंक के संयुक्त रिपोर्ट में यह  बताया गया था कि आजमगढ़ मंडल का शहरी इलाका उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से पीछे है और ग्रामीण इलाका दूसरा सबसे पीछे है। पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार ने 2006  में आजमगढ़ को भारत के 250 अत्याधिक पिछड़े जिलों में पाया था और यह उत्तर प्रदेश के 34 सबसे पिछड़े  जिलों में से एक है। जो बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड का हिस्सा है। भारत सरकार ने 2006 में नरेगा योजना को शुरू किया था जिसमें देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों का चयन किया था। आजमगढ़ देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों में एक तथा उत्तर प्रदेश के 22 सबसे पिछड़े जिलों में एक हैं। अगर यहाँ विश्वविद्यालय बनवाया गया तो आजमगढ़ का बहुमुखी विकास होगा। 

अध्यात्म हो या स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई हो या राजनीति हो या सामाजिक सरोकार का अन्य कोई भी रूप आजमगढ़ हमेशा अग्रणी रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में अस्मित्ता धूमिल होने के पीछे मुख्य कारण उच्च शिक्षण संस्थान का कमी होना है। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय को राजनैतिक मुद्दा के रूप में भी इंटरटेन किया जाता है लेकिन वो महज भाषणों तक ही सिमित रहता है, प्रैक्टिकल का हिस्सा अभी तक नहीं हुआ है।मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह अपील कर रहा हूँ कि राजनीतिक आपा-धापी से ऊपर उठकर आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग को पूरा किया जाय। जो सिर्फ सर्टीफिकेट बाटने वाली संस्था न होकर विश्व स्तरीय सुविधायुक्त विश्वविद्यालय हो। 

avatar of the starter
Raghavendra Yadavपेटीशन स्टार्टरResearch Scholar, Centre for Studies and Research in Economics & Planning School of Social Science Central University of Gujarat Gandhinagar, Gujarat Email- raghuyadav50@gmail.com
कामयाबी
132 समर्थकों के साथ इस पेटीशन ने बदलाव लाया!

समस्या

"रूह-ए-आजमगढ़ में तामीर-ए-विश्वविद्यालय, उतना ही प्रासंगिक है जितना किसी बेघर को घर देना।"

गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा की जरुरत ने आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग के लिए प्रेरित किया। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग चार दशक से भी ज्यादा पुरानी है। शिक्षा के दृष्टिकोण से अगर एक पीढ़ी के लिए  20 वर्ष माना जाय तो 40 वर्ष में दो पीढ़िया बीत चुकी है। अब हम तीसरी पीढ़ी के लोग हैं जो आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश सरकार इस मांग को ठुकरा  रही है। सरकार के मंत्री श्री विजय बहादुर पाल ने कहा कि आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की स्थापना का औचित्य इस लिए नहीं पाया गया क्योंकि पड़ोस के जनपद वाराणसी, जौनपुर, गोरखपुर, फैजाबाद, इलाहाबाद में पहले से ही विश्वविद्यालय स्थापित है। माननीय मंत्री महोदय के इस जबाब से, आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की चाहत रखने वाले  लोग हतप्रभ और इताव हैं क्योंकि ऐसे तर्कहीन और मनमानीपूर्ण जबाब की तख़य्युल नहीं थी। माननीय जी का यह जबाब उस डरावने  सांप जैसा है जो विश्वविद्यालय में पढ़ने की चाहत रखने वाले हजारों युवाओं को अपनी फुंफकार से डरा रहा है।

      मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्या आपकी सरकार वास्तव में इस तरह के प्रतिमान पर निर्णय लेती है? माननीय मंत्री जी मैं आपको याद दिला दू कि वर्तमान सरकार ने ही 2013-2014 के बजट भाषण में इलाहाबाद में राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया था। जबकि इलाहाबाद में पहले से ही केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय, ओपेन विश्वविद्यालय सहित चार विश्वविद्यालय थे। इसके अलावा एनo आईo टीo और ट्रिपल आईo टीo भी था। ऐसे में वहा विश्वविद्यालय की खास जरुरत नहीं थी लेकिन  सरकार ने वहा विश्वविद्यालय खोला।  माननीय मंत्री जी मेरा मानना है कि एक जनपद में चार विश्वविद्यालय स्थापित करने से अच्छा है कि चार जनपद में एक-एक विश्वविद्यालय स्थापित किया जाय। जो ज्यादा तर्क संगत और प्रासंगिक होगा। 

       दूसरा सवाल, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि अगर जौनपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, फैजाबाद की जनसँख्या 24 लाख है और वहा विश्वविद्यालय है, गोरखपुर की जनसँख्या 44 लाख है और वहा दो विश्वविद्यालय है, बनारस (वाराणसी) की जनसँख्या 36 लाख है और वहा तीन विश्वविद्यालय है, इलाहाबाद की जनसँख्या 59 लाख है और वहा चार विश्वविद्यालय है। तो आजमगढ़ की जनसँख्या 46 लाख है फिर वहा विश्वविद्यालय क्यों नहीं होनी चाहिए? इस बात से तो हर कोई सहमत होता है कि आज विश्वविद्यालय बड़े-बड़े शहरों में बनाने के बजाय गरीब ग्रामीण इलाकों में बनाया जाय तो ज्यादा प्रासंगिक होगा। इस लेहाज से भी आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनाया जाना जरुरी है क्योंकि जनगड़ना 2011 के अनुसार आजमगढ़ में 91.5 % जनसंख्या ग्रामीण है और जनसंख्या के दृष्टिकोण से आजमगढ़ उत्तर प्रदेश का चौथा सबसे बड़ा जनपद है इस लिए यहाँ विश्वविद्यालय बनाया जाना अत्यंत जरुरी है।

तीसरा सवाल, माननीय मंत्री जी, आपने इलाहाबाद, बनारस, और गोरखपुर में विश्वविद्यालय होने की बात की है। श्रीमान जी, बता दू की आजमगढ़ से बनारस और इलाहाबाद की दूरी 100 से 200 किलोमीटर  है यहाँ पढ़ने के लिए प्रवसन करना पड़ता है। जो गरीब और अतिगरीब का बच्चा सोच भी नहीं पाता है और उसके प्रतिस्थापन में वह दिल्ली, बम्बई .... आदि जगहों पर रोजगार तलासता है जिससे वह उच्च शिक्षा से पूरी तरह बंचित हो जाता है।

     उत्तर प्रदेश और विश्व बैंक के संयुक्त रिपोर्ट में यह  बताया गया था कि आजमगढ़ मंडल का शहरी इलाका उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों से पीछे है और ग्रामीण इलाका दूसरा सबसे पीछे है। पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार ने 2006  में आजमगढ़ को भारत के 250 अत्याधिक पिछड़े जिलों में पाया था और यह उत्तर प्रदेश के 34 सबसे पिछड़े  जिलों में से एक है। जो बैकवर्ड रीजन ग्रांट फंड का हिस्सा है। भारत सरकार ने 2006 में नरेगा योजना को शुरू किया था जिसमें देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों का चयन किया था। आजमगढ़ देश के 200 सबसे पिछड़े जिलों में एक तथा उत्तर प्रदेश के 22 सबसे पिछड़े जिलों में एक हैं। अगर यहाँ विश्वविद्यालय बनवाया गया तो आजमगढ़ का बहुमुखी विकास होगा। 

अध्यात्म हो या स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई हो या राजनीति हो या सामाजिक सरोकार का अन्य कोई भी रूप आजमगढ़ हमेशा अग्रणी रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में अस्मित्ता धूमिल होने के पीछे मुख्य कारण उच्च शिक्षण संस्थान का कमी होना है। आजमगढ़ में विश्वविद्यालय को राजनैतिक मुद्दा के रूप में भी इंटरटेन किया जाता है लेकिन वो महज भाषणों तक ही सिमित रहता है, प्रैक्टिकल का हिस्सा अभी तक नहीं हुआ है।मैं उत्तर प्रदेश सरकार से यह अपील कर रहा हूँ कि राजनीतिक आपा-धापी से ऊपर उठकर आजमगढ़ में विश्वविद्यालय की मांग को पूरा किया जाय। जो सिर्फ सर्टीफिकेट बाटने वाली संस्था न होकर विश्व स्तरीय सुविधायुक्त विश्वविद्यालय हो। 

avatar of the starter
Raghavendra Yadavपेटीशन स्टार्टरResearch Scholar, Centre for Studies and Research in Economics & Planning School of Social Science Central University of Gujarat Gandhinagar, Gujarat Email- raghuyadav50@gmail.com

फैसला लेने वाले

मुख्यमंत्री, यू पी/ राज्यपाल, यू पी/ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
मुख्यमंत्री, यू पी/ राज्यपाल, यू पी/ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय/ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
13 अप्रैल 2016 पर पेटीशन बनाई गई