Message aux signatairesWorld Mausi Maa day 2 मार्च # विश्व मौसी माँ दिवस 2 मार्च

कल्पना चावला और उनकी मौसी मां की कहानी

Yavan Bodhidharmnभरवारी, Hindistan
30 Tem 2025

🛰️ कल्पना चावला की जीवन-कथा (मौसी मां के दृष्टिकोण से)

 

🌸 नाम: कल्पना चावला

 

🎂 जन्म: 17 मार्च 1962

 

🏡 जन्मस्थान: करनाल, हरियाणा, भारत

 

🚀 कार्य: अंतरिक्ष यात्री (NASA), एयरोनॉटिकल इंजीनियर

 

🕊 निधन: 1 फरवरी 2003 (कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना)

 

 

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👩‍👧‍👧 बाल्यकाल और मौसी मां का साथ

 

जब कल्पना चावला छोटी थीं, तब वे चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं।

उनकी माँ संज्योती गृहिणी थीं और पिता व्यवसायी।

लेकिन कल्पना की परवरिश में उनकी मौसी मां (जो उनकी माँ की चचेरी बहन थीं) ने अहम भूमिका निभाई।

 

💬 कल्पना चावला ने एक इंटरव्यू में कहा था:

 

माँ मुझे रोकती थीं, लेकिन मौसी मां कहती थीं – उड़ने दो इसे, ये एक दिन आसमान छूएगी।”

 

 

 

🧶 मौसी मां की भूमिका:

 

जब कल्पना करनाल से बाहर पढ़ने गईं, तब परिवार चिंतित था।

 

उनकी मौसी मां ने सबको समझाया कि, “लड़कियाँ अगर उड़ें नहीं, तो आसमान खाली ही रह जाएगा।”

 

 

 

मौसी मां ने ही उसे पहली बार उड़ते हुए विमान की ओर इशारा करके कहा था:

“एक दिन तुम वहाँ जाओगी।”

 

 

 

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📚 शिक्षा और प्रेरणा

 

  1. शिक्षा विवरण

 

  • स्कूल टैगोर बाल निकेतन, करनाल
  • इंजीनियरिंग पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़
  • मास्टर्स टेक्सास यूनिवर्सिटी, USA
  • PhD एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, USA 

 

📌 कल्पना को बचपन से ही हवाई जहाज, अंतरिक्ष और सितारों से प्रेम था।

लेकिन घर में केवल एक महिला थी जो हर बार उसकी हिम्मत बढ़ाती थीं — उनकी मौसी मां।

 

 

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👩‍🚀 NASA और अंतरिक्ष उड़ान

 

मिशन विवरण

 

  1. पहला मिशन 1997 – STS-87
  2. दूसरा मिशन 2003 – STS-107 (कोलंबिया स्पेस शटल)

 

 

➡️ कल्पना चावला ने कहा था,“मुझे अगर कभी धरती पर कुछ छोड़ना पड़ा, तो वो मेरी मौसी मां की ममता होगी।”

 

 

 

 

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🕊 कोलंबिया दुर्घटना और मौसी मां की प्रतिक्रिया

 

जब 2003 में कल्पना चावला की मृत्यु हुई, तो उनकी मौसी मां करनाल में ही थीं।

उन्होंने टीवी पर जब दुर्घटना देखी, तो कहा, “मेरी बेटी तो आसमान में ही थी, वहीं से सितारा बन गई।”

“अब हर बच्ची को उड़ने दूंगी – ये मेरी कल्पना की कसम है।”

 

 

 

 

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🌟 भावनात्मक निष्कर्ष:

 

“कल्पना चावला को अंतरिक्ष की ऊँचाई तक पहुँचाने में जितना योगदान उनके विज्ञान 

का था, उतना ही उनकी मौसी मां के विश्वास का भी था।”

“जब माँ डरीं, तो मौसी मां ने सहारा दिया।”

इसीलिए इस पेटीशन को अधिक से अधिक शेयर करो ताकि मान्यता मिल सके और सभी लोग अपना हस्ताक्षर जरूर करें 

#मौसी मां दिवस#@2 मार्च #

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