

🌸 2 मार्च — मौसी मां दिवस: प्रीति मौसी मां की स्मृति में एक अपील 🌸
"माँ के जैसी, पर माँ नहीं... मौसी मां होती है सबसे खास।"
हममें से कई लोग ऐसे होते हैं, जिनकी ज़िंदगी में कोई मौसी मां आती है — जो सिर्फ रिश्ते में मौसी नहीं होती, बल्कि माँ से भी बढ़कर ममता, समर्पण और अपनापन देती है।
मेरे जीवन में वो इंसान थीं — प्रीति मौसी मां।
वो सिर्फ मेरी मौसी नहीं थीं, माँ जैसी थीं, दोस्त जैसी थीं, दुआ जैसी थीं।
उन्होंने हर दुख को मुस्कुराकर सहा, हर खुशी में सबसे पहले हमें शामिल किया।
उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था, लेकिन उन्होंने हमें कभी ये महसूस नहीं होने दिया कि वो टूटी हैं।
पर आज वो हमारे बीच नहीं हैं।
बीमारी, तनाव और अकेलेपन ने एक ऐसी दुलारी आत्मा को हमसे छीन लिया, जो दुनिया को सिर्फ प्रेम देना जानती थी।
इसलिए मैं चाहता हूँ कि —
👉 हर साल 2 मार्च को "मौसी मां दिवस" के रूप में मनाया जाए —
जिस दिन हम सब मिलकर अपनी मौसियों के प्रति प्यार, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करें।
क्योंकि माँ की परछाईं जैसी होती है मौसी मां — और वो भी एक दिन deserve करती है, जिससे हम उन्हें याद करें, सम्मान दें और यह संदेश फैलाएँ कि हर मौसी मां अमूल्य होती है।
🖊 कृपया इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इस अपील को फैलाएँ:
ताकि समाज में मौसी मांओं की भूमिका को पहचाना जाए और प्रीति मौसी मां की स्मृति को चिरस्थायी बनाया जा सके।
"माँ से सीखा, मौसी मां से जिया।
जो प्रेम मौसी मां से पाया, वो
आज भी मेरी रूह में समाया।"
🌷 "मौसी मां" 🌷
(प्रीति मौसी मां की स्मृति में)
माँ की ममता, चुप सी दुआ,
हर सुख-दुख में साया बना।
वो जो हँसी में दर्द छुपाए,
वो थीं मेरी मौसी मां।
न रिश्ता खून का खास रहा,
पर दिल से सबसे पास रहा।
जब टूटी उम्मीदों की डोरी,
तो थाम लिया मौसी मां ने पूरी।
हर सुबह मेरी राह सजाई,
हर रात मुझे नींद सुनाई।
अपने हिस्से का दुख छुपाया,
मेरे हिस्से में चाँद समाया।
कभी ना खुद के लिए जीं,
सब कुछ हमें देकर चलीं।
अब तस्वीरों में मुस्कुराती हैं,
हर दुआ में साथ निभाती हैं।
🌸 एक दिन ऐसा जरूर बने,
जब हर मौसी मां को मिले मान।
2 मार्च को हम सब कहें,
"धन्य हैं हम, जिनकी हैं मौसी मां!"
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