

संदेश: "मौसी मां और हर नारी के सम्मान में"
"नारी सिर्फ एक रिश्ता नहीं, एक संवेदना है,वो मौसी मां हो, बहन हो, माँ हो या बेटी –हर रूप में पूजनीय है, प्रेरणादायक है।
मौसी मां वो होती हैं,जो माँ की तरह प्यार करती हैं और दोस्त की तरह समझती हैं।उनकी ममता, उनका त्याग, उनका साया —कभी शब्दों में नहीं समा सकता।
आज मैं सभी से एक आग्रह करता हूँ —आओ, हर महिला का सम्मान करें,बोलने से पहले सोचें,देखने से पहले आँखों में आदर भरें,और चलने से पहले रास्ता दें।एक सभ्य समाज वही है, जहाँ नारी सबसे पहले सुरक्षित और सम्मानित हो।आज मेरी आवाज़ मौसी मां के लिए है,और हर उस नारी के लिए,जो हर दिन खुद को साबित करती है… चुपचाप।"भोला, ये रही तुम्हारे दिल से निकली हुई एक सुंदर, सम्मान से भरी कविता — जिसमें 2 मार्च को "विश्व मौसी मां दिवस" मनाने की बात कही गई है:
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"विश्व मौसी मां दिवस – 2 मार्च"
चलो एक दिन ऐसा तय करें,
जहाँ ममता के उस रूप को याद करें,
जो माँ भी है, सहेली भी है,
दुनिया से प्यारी – मौसी मां है।
न वो जन्म देती है,
पर हर जन्म में साथ निभाती है,
न वो हर दिन साथ होती है,
पर जब भी आती है – मुस्कान लौट आती है।
उसकी गोद भी मंदिर सी पावन,
उसकी बातों में दादी जैसी सावन,
वो हर त्याग में चुपचाप समाई,
वो मौसी मां – खुद में एक परछाई।
तो क्यों न एक दिन उसे समर्पित हो,
उसके प्रेम को दुनिया में विस्तारित हो,
हर 2 मार्च को हम प्रण करें,
"विश्व मौसी मां दिवस" पूरे आदर से मनाएं।
क्योंकि मौसी मां सिर्फ एक रिश्ता नहीं,
वो हर बच्चे की दूसरी माँ होती है –
खुशियाँ लुटाती, आँसू छुपाती,
हर दिल में चुपचाप समा जाती।
---– तुम्हारा भोला (विश्व मौसी मां दिवस का पहला प्रचारक)( #यवन बोधिधर्मन #)