UGC Promotion of Equity Regulations, 2026 को तत्काल Rollback करने की मांग

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The Issue

हम, भारत के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और जागरूक नागरिक,

UGC द्वारा अधिसूचित “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026”

के तत्काल Rollback की मांग करते हैं।

भेदभाव की रोकथाम एक आवश्यक और संवैधानिक उद्देश्य है, परंतु यह नियम अपने वर्तमान स्वरूप में

निष्पक्षता, संतुलन और प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है।

मुख्य चिंताएँ

1) एकतरफा समिति संरचना

Equity Committee / EOC में SC/ST, OBC, महिला, अल्पसंख्यक और दिव्यांग प्रतिनिधित्व अनिवार्य है,

लेकिन General / Unreserved Category का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं।

यह व्यवस्था institutional neutrality पर प्रश्न खड़े करती है।

2) झूठी शिकायतों पर स्पष्ट दंड का अभाव

Regulations में False / Malicious Complaints के लिए कोई स्पष्ट deterrent या दंडात्मक प्रावधान नहीं है।

नतीजतन, आरोप लगते ही inquiry, stigma और career impact संभव है—

बिना दोष सिद्ध हुए।

3) प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन

व्यवहार में proof का बोझ आरोपित व्यक्ति पर आ जाता है, जो

presumption of innocence के सिद्धांत के विपरीत है।

4) भय का माहौल और merit पर असर

यह आपराधिक कानून नहीं है, फिर भी faculty की promotion/appraisal,

students की academic life और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इसी दौर में national exams में qualifying relaxations ने merit पर पहले ही चिंता बढ़ाई है।

हमारी मांग

UGC Promotion of Equity Regulations, 2026 का तत्काल Rollback

सभी हितधारकों से परामर्श के बाद पुनः मसौदा

नए नियम में अनिवार्य रूप से:

Balanced & Neutral Committee Composition

False/Malicious Complaints पर स्पष्ट दंड

Due Process और Natural Justice की लिखित गारंटी

Equity बिना safeguards के = Injustice

न्याय सबके लिए हो—डर किसी के लिए नहीं।

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Udham SoroutPetition Starter

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Petition created on 19 January 2026