#TikTokTheekKaro ताकि ऐप की सुरक्षा और संवेदनशीलता को बढ़ाया जा सके

समस्या

एक मोबाइल और 15 सेकंड का एक वीडियो आपको इंटरनेट पर वायरल करने के लिए काफ़ी है!

ये ताकत है टिकटॉक की, एक प्लेटफॉर्म जिसके कि भारत में 8 करोड़ से भी ज़्यादा मंथली एक्टिव यूज़र्स हैं।

ये तो सच्चाई है कि हम सब एक डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं जहाँ हम घंटों कंटेंट देखते हैं, लाइक करते हैं, कमेंट करते हैं और शेयर करते हैं। कोरोना वायरस के बाद हुए लॉकडाउन में ये सब बढ़ा ही है।

बहुत अच्छी बात है कि देशवासी डि़जिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं पर इसका एक डरावना पहलू भी है। हाल के दिनों में टिकटॉक के कंटेंट पर सवाल खड़े हुए हैं। कई लोगों का मानना है कि समय के साथ टिकटॉक का कंटेंट पहले से हिंसक, विभाजनकारी, महिला विरोधी एवं उत्तेजक हो गया है। कई बार बच्चे भी ऐसे हिंसक कंटेंट का हिस्सा बन रहे हैं।

हाल ही में एक टिकटॉक इंफ्लूएंसर का वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें प्यार में ब्रेकअप के बाद महिला पर इनडायरेक्टली “एसिड अटैक” को दर्शाया गया। ये तो एक उदाहरण है, टिकटॉक की दुनिया में ऐसी ना जाने कितनी खतरनाक वीडियो हैं जो पूरे समाज, खासकर युवाओं को एक गलत दिशा में ले जा रही हैं।

जितनी आसानी से लोग टिकटॉक का इस्तेमाल करते हैं, उतनी आसानी से ही इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। साइबर बुलिंग भी बढ़ रही है। भारत में इंटरनेट के बढ़ने की तेज़ रफ्तार को देखते हुए, समय आ गया है कि टिकटॉक अपनी नीतियों में कुछ सकारात्मक बदलाव करे। मेरी पेटीशन साइन करें।

टिकटॉक में पहले से मौजूद कई गाइडलाइन्स हैं पर वो काफ़ी नहीं हैं। एक ज़िम्मेदार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के नाते कंटेंट की पर्याप्त मॉनिटरिंग होती रहनी चाहिए।

किसी भी ऐप को बैन करना समाधान नहीं होता। इसलिए मैं टिकटॉक से मांग कर रही हूँ कि वो अपने प्लेटफॉर्म को और संजीदा और सुरक्षित बनाने के लिए ये कदम उठाए:

“रिपोर्ट अब्यूज़” बटन को ठीक से जगह दें
टिकटॉक में लाइक बटन हर यूज़र के सामने होता है, “डिसलाइक” का बटन है ही नहीं पर कंटेंट को रिपोर्ट करने का बटन भी स्क्रीन पर ठीक से उपलब्ध नहीं होता। वक्त की ज़रूरत है कि “रिपोर्ट अब्यूज़” विकल्प को और ज़्यादा जगह दी जाए, सामने रखा जाए ताकि कोई भी कंटेंट अगर गाइडलाइन के खिलाफ हो तो उसे तुरंत रिपोर्ट किया जा सके।

वैधानिक चेतावनी देना
बहुत सारे सांप्रदायिक/महिला विरोधी कंटेंट बिना किसी वैधानिक चेतावनी के आते हैं जिससे लोग काल्पनिक और असली कंटेंट का फर्क नहीं समझ पाते। टिकटॉक को ऐसी वीडियोज़ के लिए वैधानिक चेतावनी को अनिवार्य करना चाहिए। प्लेटफॉर्म को देखना चाहिए कि कैसे किसी ट्रेंडिंग हैशटैग का गलत इस्तेमाल हो रहा है ताकि उसके माध्यम से यूज़र्स तक गलत चीज़ें ना पहुँचे, इसलिए उसकी रीच को मॉनिटर किया जाए।

एक ऐसे दौर में कि जब हम सब डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहे हैं, हमें मिलकर कोशिश करनी होगी कि वो डिजिटल इंडिया हर धर्म, लिंग और समाज के लोगों के लिए सुरक्षित हो। मेरी पेटीशन साइन करें ताकि “रिपोर्ट अब्यूज़” बटन को ठीक से जगह देकर और कंटेंट पर वैधानिक चेतावनी देकर टिकटॉक इंडिया की ऐप में सुरक्षा और संवेदनशीलता को बढ़ाया जा सके।

मेरा विश्वास है कि इन छोटे से बदलावों से ये ऐप सच में लोगों के मनोरंजन के काम आ सकेगा ना कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनकर रह जाएगा जहाँ संवेदनशील मुद्दों को गलत तरह से पेश किया जाता है।

#TikTokTheekKaro

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Ananya Singhपेटीशन स्टार्टर
यह पेटीशन 1,58,084 हस्ताक्षर जुट गई

समस्या

एक मोबाइल और 15 सेकंड का एक वीडियो आपको इंटरनेट पर वायरल करने के लिए काफ़ी है!

ये ताकत है टिकटॉक की, एक प्लेटफॉर्म जिसके कि भारत में 8 करोड़ से भी ज़्यादा मंथली एक्टिव यूज़र्स हैं।

ये तो सच्चाई है कि हम सब एक डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं जहाँ हम घंटों कंटेंट देखते हैं, लाइक करते हैं, कमेंट करते हैं और शेयर करते हैं। कोरोना वायरस के बाद हुए लॉकडाउन में ये सब बढ़ा ही है।

बहुत अच्छी बात है कि देशवासी डि़जिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं पर इसका एक डरावना पहलू भी है। हाल के दिनों में टिकटॉक के कंटेंट पर सवाल खड़े हुए हैं। कई लोगों का मानना है कि समय के साथ टिकटॉक का कंटेंट पहले से हिंसक, विभाजनकारी, महिला विरोधी एवं उत्तेजक हो गया है। कई बार बच्चे भी ऐसे हिंसक कंटेंट का हिस्सा बन रहे हैं।

हाल ही में एक टिकटॉक इंफ्लूएंसर का वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें प्यार में ब्रेकअप के बाद महिला पर इनडायरेक्टली “एसिड अटैक” को दर्शाया गया। ये तो एक उदाहरण है, टिकटॉक की दुनिया में ऐसी ना जाने कितनी खतरनाक वीडियो हैं जो पूरे समाज, खासकर युवाओं को एक गलत दिशा में ले जा रही हैं।

जितनी आसानी से लोग टिकटॉक का इस्तेमाल करते हैं, उतनी आसानी से ही इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है। साइबर बुलिंग भी बढ़ रही है। भारत में इंटरनेट के बढ़ने की तेज़ रफ्तार को देखते हुए, समय आ गया है कि टिकटॉक अपनी नीतियों में कुछ सकारात्मक बदलाव करे। मेरी पेटीशन साइन करें।

टिकटॉक में पहले से मौजूद कई गाइडलाइन्स हैं पर वो काफ़ी नहीं हैं। एक ज़िम्मेदार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के नाते कंटेंट की पर्याप्त मॉनिटरिंग होती रहनी चाहिए।

किसी भी ऐप को बैन करना समाधान नहीं होता। इसलिए मैं टिकटॉक से मांग कर रही हूँ कि वो अपने प्लेटफॉर्म को और संजीदा और सुरक्षित बनाने के लिए ये कदम उठाए:

“रिपोर्ट अब्यूज़” बटन को ठीक से जगह दें
टिकटॉक में लाइक बटन हर यूज़र के सामने होता है, “डिसलाइक” का बटन है ही नहीं पर कंटेंट को रिपोर्ट करने का बटन भी स्क्रीन पर ठीक से उपलब्ध नहीं होता। वक्त की ज़रूरत है कि “रिपोर्ट अब्यूज़” विकल्प को और ज़्यादा जगह दी जाए, सामने रखा जाए ताकि कोई भी कंटेंट अगर गाइडलाइन के खिलाफ हो तो उसे तुरंत रिपोर्ट किया जा सके।

वैधानिक चेतावनी देना
बहुत सारे सांप्रदायिक/महिला विरोधी कंटेंट बिना किसी वैधानिक चेतावनी के आते हैं जिससे लोग काल्पनिक और असली कंटेंट का फर्क नहीं समझ पाते। टिकटॉक को ऐसी वीडियोज़ के लिए वैधानिक चेतावनी को अनिवार्य करना चाहिए। प्लेटफॉर्म को देखना चाहिए कि कैसे किसी ट्रेंडिंग हैशटैग का गलत इस्तेमाल हो रहा है ताकि उसके माध्यम से यूज़र्स तक गलत चीज़ें ना पहुँचे, इसलिए उसकी रीच को मॉनिटर किया जाए।

एक ऐसे दौर में कि जब हम सब डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहे हैं, हमें मिलकर कोशिश करनी होगी कि वो डिजिटल इंडिया हर धर्म, लिंग और समाज के लोगों के लिए सुरक्षित हो। मेरी पेटीशन साइन करें ताकि “रिपोर्ट अब्यूज़” बटन को ठीक से जगह देकर और कंटेंट पर वैधानिक चेतावनी देकर टिकटॉक इंडिया की ऐप में सुरक्षा और संवेदनशीलता को बढ़ाया जा सके।

मेरा विश्वास है कि इन छोटे से बदलावों से ये ऐप सच में लोगों के मनोरंजन के काम आ सकेगा ना कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनकर रह जाएगा जहाँ संवेदनशील मुद्दों को गलत तरह से पेश किया जाता है।

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TikTok India
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Nikhil Gandhi
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CEO, TikTok India
Nitin Saluja
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Director Public Policy, TikTok
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