Improvement in Quality of Govt Hospitals सार्वजनिक आरोग्य व्यवस्था का दर्जा उच्च हो .

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STOP MEDICAL BILL REIMBURSEMENT (*)  OF PRIVATE HOSPITALS FOR POLITICIANS, CORPORATION EXECUTIVES /STAFF AND STAFF OF STATE AND CENTRAL HEALTH DEPARTMENT.

(*  Reimbursement means  to make repayment to for expense )

पिटीशन की  माँग :देश के आम नागरीक को  सरकारी हॉस्पिटल्स में अच्छी सर्विस मिलने के लिए जनता  के कर के माध्यमसे प्राप्त  निधीसे  नेता और अधिकारी को दिए जानेवाली निजी हॉस्पिटल्स  ट्रीटमेंट  की सुविधा बंद करो और उन्हें सरकारी अस्पतालो की सुविधा का उपयोग करना अनिवार्य करे। 

Dear friends ,

Corona had expose the bitter reality of GOVT HEALTH SERVICE IN INDIA. 

Government hospitals are run by health department of state and central Government.  Municipal Corporations also runs their own  Hospitals. In spite of all this, Government use to pay reimbursement of medical bill of private hospitals , for all politicians and all the concern responsible for running these hospitals with public money .

राज्य और केंद्र सरकार  अपने स्वास्थ विभाग के माध्यमसे सरकारी हॉस्पिटल्स चलाते है।  मुन्सिपल कॉर्पोरेशन्स भी अपने हॉस्पिटल्स चलाते है।  सरकारी हॉस्पिटल्स की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद भी देश में सभी राजनेता और सरकारी कर्मचारी -अधिकारीओंको  अपनी  ट्रीटमेंट प्रायव्हेट हॉस्पिटल्स में करने  के लिए सरकार करोडो रूपये देती है। 

     This is a contradictory act. On one side Government and Municipal corporations are pending crores of rupees for running these Hospitals and on the other side paying croroes of rupees for reimbursement of medical bill of private hospitals for all beaurocrats and politicians under whom these hospitals are run.

ऐसा क्यों किया जाता है ? क्योंकी  सरकारी हॉस्पिटल्स के सर्विस का दर्जा ठीक नहीं होता।  सवाल यह है की , इसकी जिम्मेवारी किसकी है ? अगर नौकरशहा और राजनेता सरकारी हॉस्पिटल्स चलाते है तो उसके सेवा का दर्जा उच्च रखना भी उनकी जिम्मेवारी होती है।  अगर वो उसे प्रामाणिकतासे निभाते नहीं तो उसके लिए उन्हें शिक्षा देने के बजाय उनको निजी हॉस्पिटल्स में ट्रीटमेंट के लिए जनता का पैसे का इस्तमाल करने के लिए अनुमती होना यह तो उनके नाकामी के लिए बक्षीस देने जैसा है। 

The question always remains unanswered that, why they are not using the hospitals which are run by themselves. The obvious answer is that, “THE QUALITY OF GOVT HOSPITAL IS NOT UPTO THE MARK “ . Then, Again  question arises that , who is responsible for degraded quality of Govt and Municipal Hospitals ?  If the concerned beaurocrats and politicians are responsible for DEGRADED QUALITY, they must be punished. But what actually happening?  They get rewarded by paying their medical bills of private hospitals for their treatment.

यह बंद होना चाहिए।  देश के सभी राजनेता और नोकरशहा को उनके खुद के हॉस्पिटल्स में (मतलब  सरकारी हॉस्पिटल्स में ) ही इलाज करना अनिवार्य करना चाहिए। उनके  निजी हॉस्पिटल्स के खर्चे का बिल देना बंद करो।  ऐसा करना जनता के पैसोंके खिलाब अन्याय है। 

   Dear citizens ,

   The need of hour is that , to improve the quality of Govt and Municipal corporations Hospitals SERVICE QUALITY , Only LAST option feasible is to “  STOP MEDICAL BILL REIMBURSEMENT OF PRIVATE HOSPITALS FOR POLITICIANS, CORPORATION EXECUTIVES AND STAFF AND STAFF OF STATE AND CENTRAL HEALTH DEPARTMENT AND MAKE THEM MANDETORY TO USE SERVICES OF Govt run hospitals only” .

 

 Off course they are free to take service of PRIVATE HOSPITALS, but only with their own money.  No reimbursement with public money.

अगर राजनेता और सरकारी कर्मचारी /अधिकारी निजी हॉस्पिटल में इलाज करना चाहते है तो उन्हें अपने पैसोंसे करने दो।  ऐसा किया तो ही आम जनता को सरकारी हॉस्पिटल्स में अच्छा सुविधा मिलेगी। 

सहमत हो तो इस पिटीशन को सपोर्ट करे और शेअर करे। 

 

 

 

Petitionby   :  Sudhir Dani , Navi Mumbai

danisudhir@gmail.com