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सरकारी बैंकों में 15% महिला बैंक ब्रांच का होना सुनिश्चित करें

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भारत में महिला सशक्तिकरण के रास्ते में कई सारी चुनौतियां हैं। सामाजिक रुप से देश की महिलाओं को रूढ़िवादी सोच का सामना तो करना ही पड़ता है, इसके साथ ही उन्हें कम मौके दिए जाते हैं। पर एक और बड़ा कारण जो महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देता है, वो है उनको नहीं मिलने वाली वित्तीय आज़ादी (फाइनेंशियल इंडिपेन्डेन्स)।

वित्तीय आज़ादी के लिए महिलाओं को बैंक और बैंकिंग से जोड़ना होगा, जो अभी बहुत कम हो रहा है। इसी लिए बैंक और बैंकिंग से महिलाओं को जोड़ने के लिए कमेटी भी बनाई गई थी।

कमेटी ऑफ एम्पावरमेंट फॉर विमेन ने 2014-2015 में अपनी रिपोर्ट में प्रस्तावित किया था कि कम से कम 15% सरकारी महिला बैंक होने चाहिए। ये बैंक पूरी तरह से महिलाओं के लिए और महिलाओं द्वारा संचालित होने चाहिए। रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि फाइनेंस के क्षेत्र में महिलाओं के लिए नीतियां बननी चाहिए।

महिला बैंक, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। इन बैंकों से शहरों तथा गाँवों, समाज के हर वर्ग की महिलाओं को आगे बढ़ने का एक मौका मिलेगा क्योंकि:

1. इनके माध्यम से महिलाएं आर्थिक सेवाओं का लाभ आसानी से उठाएंगी।
2. महिलाओं को आसानी से कर्ज मिल सकेगा, जो कि उन्हें महिला होने की वजह से आसानी से नहीं मिलता।
3. इससे महिलाओं में एंटरप्रेन्योरशिप को भी बढ़ावा मिलेगा।
4. महिलाओं की जीविका और सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स को इससे सहारा मिलेगा।
5. ये महिलाओं में वित्तीय साक्षरता (फाइनेन्शियल लिट्रेसी) को भी आगे ले जाएगा।

सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया था। 2015-16 में सरकार ने कहा था कि वो 70 नए महिला बैंक स्थापित करेंगे, जिनमें से 14 ग्रामीण इलाको में होंगे। पर ये वादा पूरा नहीं हुआ क्योंकि इसको लेकर कोई नीति नहीं थी।

अभी तक केवल 17 सरकारी बैंकों ने 301 महिला बैंक ब्रांच खोली हैं। इसमें से केवल स्टेट बैंक और इंडियन ओवरसीज़ बैंक ने 119 और 60 बैंक ब्रांच खोली हैं।

बहुत सारे सरकारी बैंकों ने महिला बैंक स्थापित करने की दिशा में उचित कदम नहीं उठाए हैं। जबकि मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंकों में 24% कर्मचारी महिलाए हैं।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर करें ताकि सारे सरकारी बैंकों में 15% महिला बैंक ब्रांच हो। सत्ता में वापस आने वाली पार्टियां 2020 तक इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।

2013 में भारतीय महिला बैंक की स्थापना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम था। पर सरकारी उदासीनता की वजह से इस बैंक की 103 ब्रांचों का स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में विलय हो गया।

मेरी पेटीशन पर हस्ताक्षर कर नेताओं से मांग करें कि वो चुनाव से पहले सरकारी बैंकों में 15% महिला बैंक ब्रांच का होना सुनिश्चित करें।

#MahilaBank