लॉकडाउन में घर से दूर रहने वाले बेरोज़गार छात्रों का किराया माफ़ करे सरकार

समस्या

दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे उत्सव, उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के रहने वाले हैं। पिता किसान हैं और महीने का ख़र्च उनसे ही मिलता था। देशव्यापी लॉकडाउन के बाद उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हैं पर अभी भी मकान मालिक उनसे किराया मांग रहे हैं। आप ही सोचिए वो कैसे किराया लाकर देंगे?

उत्सव की तरह ना जाने कितने किसानों और मज़दूरों के बेटे, जो गरीबी के बावजूद पढ़ने का साहस लेकर शहरों में आए, वो सारे के सारे आज डरे हुए हैं। यूपी, बिहार, झारखंड समेत अन्य राज्यों के इन छात्रों को भूख का भी डर है और ये डर भी कि कहीं किराया ना देने के कारण उनके सिर से छत ना छिन जाए।

ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि पूरे देश में कहीं पर भी बेरोज़गार छात्रों से किराया ना लिया जाए, उनके सिर की छत सलामत रहे।
24 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संबोधन द्वारा पूरे भारत में एकाएक 21 दिनों के लिए लॉकडाउन और 14 अप्रैल को फिर से 19 दिनों तक के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई।

देश की अर्थव्यवस्था पर तो इसका असर पड़ा ही रहा है, साथ ही कई बेरोज़गार छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। ये वे छात्र हैं जो कई सरकारी व गैर सरकारी परीक्षाओं की या विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

इनमें से कई छात्र ऐसे हैं जिनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर है और वे जैसे तैसे दूसरे शहरों में अपने रहने का इंतज़ाम, खाने पीने, मेस की फीस, बिजली का बिल, कोचिंग फीस, परिवहन के खर्चे, किताबों व नोट्स के खर्चों के लिए अपने परिवारों पर निर्भर हैं।

अब जब लॉकडाउन में इन छात्रों का परिवार ही अपना पेट भरने को लेकर संघर्ष कर रहा है तो वो गरीब माता-पिता अपने बच्चे को मकान का किराया कैसे देंगे?
इसीलिए युवा हल्ला बोल ने ये पेटीशन शुरू की है ताकि सरकार देश के छात्रों की किरायामाफ़ी को लेकर स्पष्ट आदेश जारी करे, ताकि किसी भी छात्र को किराए के लिए प्रताड़ित ना किया जाए।

29 मार्च 2020 को गृह मंत्रालय द्वारा सभी सरकारों को यह आदेश दिया गया कि लॉकडाउन के दौरान कोई मकान मालिक किसी भी विद्यार्थी किरायेदार को नहीं निकाल सकता है। सरकार का ये कदम प्रशंसायोग्य है पर इस आदेश में किराए को लेकर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है ताकि इसपर कोई दुविधा या असमंजस की स्थिति न रहे।

इसमें कोई शक नहीं कि सरकार अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए इस भयावह महामारी से उबरने की कोशिश कर रही है। किंतु सैंकड़ों बेरोज़गार छात्रों को सरकार की स्पष्ट नीतियों के अभाव में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

युवा हल्ला बोल ने इन छात्रों का किराया माफ करवाने के लिए इस अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत हम सरकार से अपील कर रहे हैं कि छात्रों का किराया बिना शर्त पूरी तरह माफ हो।

इस अभियान में हम आप से भी सहयोग चाहते हैं। कृपया ये पेटीशन साइन करें और इसे और ज्यादा लोगों तक पहुँचाए तथा सरकार को छात्रों के बारे में विचार कर किराया माफ करने की प्रक्रिया में भागीदार बनें।

व्हाट्सएप्प से जुड़े: https://chat.whatsapp.com/BweopJuLMpE9V1gliMUJuv

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Rajat Yadavपेटीशन स्टार्टर
यह पेटीशन 5,690 हस्ताक्षर जुट गई

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दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे उत्सव, उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के रहने वाले हैं। पिता किसान हैं और महीने का ख़र्च उनसे ही मिलता था। देशव्यापी लॉकडाउन के बाद उनके पास खाने तक के पैसे नहीं हैं पर अभी भी मकान मालिक उनसे किराया मांग रहे हैं। आप ही सोचिए वो कैसे किराया लाकर देंगे?

उत्सव की तरह ना जाने कितने किसानों और मज़दूरों के बेटे, जो गरीबी के बावजूद पढ़ने का साहस लेकर शहरों में आए, वो सारे के सारे आज डरे हुए हैं। यूपी, बिहार, झारखंड समेत अन्य राज्यों के इन छात्रों को भूख का भी डर है और ये डर भी कि कहीं किराया ना देने के कारण उनके सिर से छत ना छिन जाए।

ये पेटीशन साइन करें और जितना हो सके शेयर करें ताकि पूरे देश में कहीं पर भी बेरोज़गार छात्रों से किराया ना लिया जाए, उनके सिर की छत सलामत रहे।
24 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संबोधन द्वारा पूरे भारत में एकाएक 21 दिनों के लिए लॉकडाउन और 14 अप्रैल को फिर से 19 दिनों तक के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई।

देश की अर्थव्यवस्था पर तो इसका असर पड़ा ही रहा है, साथ ही कई बेरोज़गार छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। ये वे छात्र हैं जो कई सरकारी व गैर सरकारी परीक्षाओं की या विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

इनमें से कई छात्र ऐसे हैं जिनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बहुत कमज़ोर है और वे जैसे तैसे दूसरे शहरों में अपने रहने का इंतज़ाम, खाने पीने, मेस की फीस, बिजली का बिल, कोचिंग फीस, परिवहन के खर्चे, किताबों व नोट्स के खर्चों के लिए अपने परिवारों पर निर्भर हैं।

अब जब लॉकडाउन में इन छात्रों का परिवार ही अपना पेट भरने को लेकर संघर्ष कर रहा है तो वो गरीब माता-पिता अपने बच्चे को मकान का किराया कैसे देंगे?
इसीलिए युवा हल्ला बोल ने ये पेटीशन शुरू की है ताकि सरकार देश के छात्रों की किरायामाफ़ी को लेकर स्पष्ट आदेश जारी करे, ताकि किसी भी छात्र को किराए के लिए प्रताड़ित ना किया जाए।

29 मार्च 2020 को गृह मंत्रालय द्वारा सभी सरकारों को यह आदेश दिया गया कि लॉकडाउन के दौरान कोई मकान मालिक किसी भी विद्यार्थी किरायेदार को नहीं निकाल सकता है। सरकार का ये कदम प्रशंसायोग्य है पर इस आदेश में किराए को लेकर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है ताकि इसपर कोई दुविधा या असमंजस की स्थिति न रहे।

इसमें कोई शक नहीं कि सरकार अपने स्तर पर सतर्कता बरतते हुए इस भयावह महामारी से उबरने की कोशिश कर रही है। किंतु सैंकड़ों बेरोज़गार छात्रों को सरकार की स्पष्ट नीतियों के अभाव में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

युवा हल्ला बोल ने इन छात्रों का किराया माफ करवाने के लिए इस अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत हम सरकार से अपील कर रहे हैं कि छात्रों का किराया बिना शर्त पूरी तरह माफ हो।

इस अभियान में हम आप से भी सहयोग चाहते हैं। कृपया ये पेटीशन साइन करें और इसे और ज्यादा लोगों तक पहुँचाए तथा सरकार को छात्रों के बारे में विचार कर किराया माफ करने की प्रक्रिया में भागीदार बनें।

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फैसला लेने वाले

Yogi Adityanath
Chief Minister, Uttar Pradesh
Ashok Gehlot
Ashok Gehlot
Chief Minister, Rajasthan
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