जब नेताओं के लिए पेंशन है तो फिर कर्मचारियों के लिए क्यों नहीं??

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2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन के स्थान पर नई पेंशन योजना का प्रावधान है.

इसको नाम केवल नई पेंशन योजना दिया गया है जबकि हकीकत में यह एक म्यूच्यूअल फंड योजना है जहां कर्मचारियों का पैसा शेयर मार्केट में लगाया जाता है जिस पर निश्चित रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है. इससे कर्मचारियों का भविष्य उनके परिवार का भविष्य उनके बच्चों का भविष्य खतरे में है.

पुरानी पेंशन योजना के तहत मिलने वाला कोई भी लाभ नई पेंशन योजना में नहीं मिलता.ना ही जीपीएफ की कोई सुविधा है ना ही निश्चित पेंशन की कोई गारंटी है और ना ही सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु पर उसके परिवार को कुछ मिलेगा.

पुरानी पेंशन योजना के अंतर्गत पैसा सरकार द्वारा दिया जाता है जबकि नई पेंशन योजना के अंतर्गत कर्मचारी को अपने वेतन का कुछ हिस्सा जमा करवाना पड़ता है. उसके बावजूद भी कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी को उसके द्वारा जमा कराया गया धन मिलेगा या नहीं क्योंकि यह पैसा शेयर मार्केट में लगाया जाता है जिसमें निश्चित रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है.

कर्मचारी जो अपने जीवन के स्वर्ण काल को देश की सेवा में अर्पित करता है उसको रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित जीवन की गारंटी उसके नियोक्ता यानी सरकार की है. लेकिन कर्मचारियों से उनके बुढ़ापे की लाठी उनकी पेंशन उनसे छीन ली गई है.

जहां एक और नेताओं के लिए पेंशन की व्यवस्था है. चाहे कोई एक दिन का एमपी एमएलए रहे उसको पेंशन है लेकिन कर्मचारियों के लिए पेंशन नहीं है. अगर कोई एमएलए से एमपी बनता है तो उसको डबल पेंशन...और कुछ को तो तीन-तीन पेंशन लेकिन कर्मचारियों को उनका हक उनकी पेंशन नहीं दी जा रही.

आपसे निवेदन है इस पेटीशन को साइन करें ताकि कर्मचारी और उनके परिवार को उनका हक उनके पेंशन मिल सके.