प्रबंध निदेशक एवम् मुख्य कार्यकारी अधिकारी, बैंक आँफ इंडिया के व्यक्तिगत ध्यानार्थ।
आदरणीय,
मैं बैंक आँफ इंडिया का एक सेवा निवृत्त अधिकारी होने के नाते “ बी ओ आई परिवार का सदस्य हूँ।
बैंक आँफ इंडिया परिवार का सदस्य होने के कारण मैं आपसे विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि आप उक्त विषय में मेरे द्वारा प्रेषित पत्राचार में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की कृपा करे।
किसी भी संस्था प्रमुख का कर्तव्य केवल मात्र संस्था के उच्च लक्ष्यों को घोषित कर देना या मूल उदेश्यो और मूल वाक्यों को कलैंडर या डायरियों में छपवा देने मात्र से पूर्ण नहीं हो जाता है। संस्था के विकास के लिये घोषित नीतियों की पालना सुनिश्चित करना भी है।
मेरे द्वारा पिछलें दो वर्षों में आपको कई पत्र प्रेषित किये गये किन्तु आपके द्वारा एक भी पत्र पर आज तक किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है। बैंक आँफ इंडिया ग्राहक अधिकार नीति में ग्राहक के संतुष्ट नहीं होने पर सीधे प्रबंध निदेशक एवम् मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अपनी शिकायत प्रेषित करने का अधिकार प्राप्त है और घोषित नीति के अनुसार ग्राहक शिकायत की पावती 3 दिन में प्रदान की जानी चाहिये किन्तु आज तक पावती प्रदान नहीं करना निश्चित ही बैंक आँफ इंडिया की वर्तमान दुर्दशा को स्पष्ट करता है।
ग्राहक सेवाओं के बड़ेबड़े दावे करने वाली बैंक के एक वरिष्ठ सदस्य को अपनी ही बैंक के विरुद्ध न्याय प्राप्त करने हेतु पिटीशन प्रारम्भ करनी पड़े मेरे 40 वर्ष के सेवा काल सम्भव तह यह पहला मौका है।
आपके सुलभ संदर्भ हेतु हमारे द्वारा प्रदान पिटीशन अपडेट की प्रति संलग्न है।
आशा करता हूँ आप इस विषय में घोषित नीति की पालना सुनिश्चित करते हुये शीघ्र ही अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया प्रदान करने की कृपा करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय,
Vimlesh Chandra Joshi

