

Nai Dunia, Indore Edition, 8 July 19
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए 26 जून 2018 को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, जहाजरानी और रेल मंत्रालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना 362 किलोमीटर लंबी है। अब इसका काम अटक गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस लाइन का विधानसभा चुनाव के पहले उद्घाटन भी किया था, लेकिन अब यह योजना धीमी गति से चल रही है।
इस योजना का काम पोर्ट-रेल कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन करवा रहा है। मनमाड़-इंदौर रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि स्पेशल विकास के तहत इस योजना में राज्य सरकारों के साथ-साथ जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह की ओर से 55 फीसदी राशि, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की ओर से 15-15 फीसदी, जहाजरानी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से 15 फीसदी की हिस्सेदारी देना तय हुआ है। उसके बाद इस परियोजना को लेकर कोई विशेष गति नहीं आई।
राशि की मंजूरी के बाद भी काम शुरू नहीं
मराठे ने बताया कि यह रेल लाइन महाराष्ट्र में 186 किलोमीटर और मध्यप्रदेश में 176 किलोमीटर होगी। इस मार्ग पर 120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेंगी। इसमें 13 बड़े स्टेशन और 27 स्टेशन छोटे होंगे। इसके निर्माण में 2008 हेक्टेयर जमीन लगेगी, जिसमें 964 हेक्टेयर महाराष्ट्र और बाकी मध्यप्रदेश की होगी। इसकी लागत वर्तमान में 5000 से बढ़कर लगभग 10,000 करोड़ हो गई है। इस परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड, जहाजरानी मंत्रालय और इस परियोजना को पूरा करने के लिए नवनिर्मित रेलवे पोर्ट कॉर्पोरेशन द्वारा एमओयू हस्ताक्षर किए जाने के बाद भी कोई उचित पहल नहीं की गई, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है ।
घट जाएगी इंदौर से मुंबई की दूरी, व्यापार भी बढ़ेगा
वर्तमान में इंदौर-मुंबई की दूरी देवास, उज्जौन, रतलाम, वडोदरा और सूरत होते हुए 830 किलोमीटर है। इंदौर-मनमाड़ लाइन से यह दूरी घटकर 644 किलोमीटर रह जाएगी। इंदौर-मनमाड़ लाइन 354 किमी लंबी होगी, जबकि मनमाड़ से मुंबई की दूरी 290 किमी है। इस तरह सीधे-सीधे 186 किमी का सफर यात्रियों को कम करना पड़ेगा। साथ ही चार-पांच घंटे की बचत होगी और किराया भी कम होगा। व्यावसायिक दृष्टि से भी यह रेल मार्ग फायदेमंद होगा।