श्रम कानूनों को महिलाओं के अनुकूल बनाएं, समान वेतन और सुरक्षा की हो गारंटी

समस्या

कोरोना वायरस की आपदा में सबसे ज़्यादा नुकसान देश के मज़दूरों और नौकरीपेशा लोगों का हुआ है, खासकर महिलाओं का। समाज उन्हें मज़दूर और कर्मचारी नहीं बल्कि केवल महिला के रूप में देखता है। जब बात काम और सैलरी की आती है तो जैसे महिलाओं को किनारे कर दिया जाता है।

ये अपने आप में एक त्रासदी है पर महिलाओं पर इससे बड़ी त्रासदी आ सकती है!

ये त्रासदी होगी बेरोज़गारी की, भुखमरी की और सम्मान एवं सुरक्षा के बिना काम करने की। यदि हम और आप ने उनके लिए आवाज़ नहीं उठाई तो भारत की महिला मज़दूर और कामगार के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि देश की महिला शक्ति के साथ अन्याय ना हो।

दरअसल कोरोना वायरस के संकट के बाद देश के कई बड़े राज्यों ने अपने श्रम कानूनों में बदलाव का फैसला किया है। कुछ राज्य काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने जा रहे हैं तो कुछ एक सिरे से कई सारे श्रम कानूनों को ही स्थगित करने जा रहे हैं। 

नए श्रम कानूनों की इस पूरी बहस में महिलाओं की बात नहीं हो रही है। ज़ाहिर सी बात है कि यदि राज्यों द्वारा श्रम कानूनों को इस प्रकार बिना किसी चर्चा और बहस के बदला जाएगा तो मज़दूरों,कामगारों एवं अन्य कर्मचारियों का नुकसान होगा, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं का होगा।

जैसा कि इस रिपोर्ट में श्रम कानूनों के कई विषेज्ञों ने रेखांकित भी किया है कि राज्यों द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव का सबसे बड़ा असर महिला मज़दूरों और कर्मचारियों पर होगा। उनका मानना है कि इसके कारण महिलाओं में बेरोज़गारी बढ़ेगी और एक समान वेतन और काम की जगह पर यौन हिंसा से सुरक्षा जैसे ज़रूरी मुद्दे पीछे धकेल दिए जाएंगे।

इसीलिए मैं अपनी पेटीशन से देशवासियों को एकजुट कर बताना चाहती हूँ कि देश की महिलाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती है। हम अकेली नहीं हैं और ना हम अपने अधिकारों का हनन होने देंगे।

मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश जारी करे:

1. महिलाओं के हितों वाले श्रम कानूनों को स्थगित ना किया जाए बल्कि उन्हें महिलाओं के अनुकूल बनाकर और मज़बूत किया जाए।
2. सभी फैक्टरी तथा अन्य कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013) लागू किया जाए।
3. काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 ना किया जाए और महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन दिया जाए।

आपके एक साइन से देश की महिलाओं की आवाज़ सरकार तक पहुँचेगी। साइन करें और शेयर करें ताकि #MahilaMazdoor बस एक पेटीशन नहीं बल्कि जनअभियान का रूप ले।

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Reena Sinhaपेटीशन स्टार्टर

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कोरोना वायरस की आपदा में सबसे ज़्यादा नुकसान देश के मज़दूरों और नौकरीपेशा लोगों का हुआ है, खासकर महिलाओं का। समाज उन्हें मज़दूर और कर्मचारी नहीं बल्कि केवल महिला के रूप में देखता है। जब बात काम और सैलरी की आती है तो जैसे महिलाओं को किनारे कर दिया जाता है।

ये अपने आप में एक त्रासदी है पर महिलाओं पर इससे बड़ी त्रासदी आ सकती है!

ये त्रासदी होगी बेरोज़गारी की, भुखमरी की और सम्मान एवं सुरक्षा के बिना काम करने की। यदि हम और आप ने उनके लिए आवाज़ नहीं उठाई तो भारत की महिला मज़दूर और कामगार के साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि देश की महिला शक्ति के साथ अन्याय ना हो।

दरअसल कोरोना वायरस के संकट के बाद देश के कई बड़े राज्यों ने अपने श्रम कानूनों में बदलाव का फैसला किया है। कुछ राज्य काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने जा रहे हैं तो कुछ एक सिरे से कई सारे श्रम कानूनों को ही स्थगित करने जा रहे हैं। 

नए श्रम कानूनों की इस पूरी बहस में महिलाओं की बात नहीं हो रही है। ज़ाहिर सी बात है कि यदि राज्यों द्वारा श्रम कानूनों को इस प्रकार बिना किसी चर्चा और बहस के बदला जाएगा तो मज़दूरों,कामगारों एवं अन्य कर्मचारियों का नुकसान होगा, लेकिन सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं का होगा।

जैसा कि इस रिपोर्ट में श्रम कानूनों के कई विषेज्ञों ने रेखांकित भी किया है कि राज्यों द्वारा श्रम कानूनों में बदलाव का सबसे बड़ा असर महिला मज़दूरों और कर्मचारियों पर होगा। उनका मानना है कि इसके कारण महिलाओं में बेरोज़गारी बढ़ेगी और एक समान वेतन और काम की जगह पर यौन हिंसा से सुरक्षा जैसे ज़रूरी मुद्दे पीछे धकेल दिए जाएंगे।

इसीलिए मैं अपनी पेटीशन से देशवासियों को एकजुट कर बताना चाहती हूँ कि देश की महिलाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती है। हम अकेली नहीं हैं और ना हम अपने अधिकारों का हनन होने देंगे।

मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश जारी करे:

1. महिलाओं के हितों वाले श्रम कानूनों को स्थगित ना किया जाए बल्कि उन्हें महिलाओं के अनुकूल बनाकर और मज़बूत किया जाए।
2. सभी फैक्टरी तथा अन्य कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013) लागू किया जाए।
3. काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 ना किया जाए और महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन दिया जाए।

आपके एक साइन से देश की महिलाओं की आवाज़ सरकार तक पहुँचेगी। साइन करें और शेयर करें ताकि #MahilaMazdoor बस एक पेटीशन नहीं बल्कि जनअभियान का रूप ले।

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फैसला लेने वाले

Narendra Modi
Prime Minister of India
Amit Shah
Home Minister Of India
Smriti Irani
Smriti Irani
Women and Child Development Minister of India
Santosh Kumar Gangwar
Santosh Kumar Gangwar
Labour and Employment Minister
पेटीशन अपडेट