क्या आप आपके बच्चों को विरासत में स्वच्छ हवा और पीने लायक जल देना चाहोगे ?


क्या आप आपके बच्चों को विरासत में स्वच्छ हवा और पीने लायक जल देना चाहोगे ?
समस्या
आदरणीय महोदय,
अधिकांश फलों के छिलके, सब्जीयों का अपशिष्ट (अनावश्यक/बेकार डंडीया/अखाद्य सिरे/भाग) और पत्तियां या तो प्लास्टिक और अन्य बेकार अपशिष्ट पदार्थों के साथ जला दी जाती हैं या निपटा दी जाती हैं। जब इन बहुमूल्य संसाधनों को फेंक दिया जाता है, हम वृक्षों और पौधो को उनकी कमजोर जड़ों के कारण गिरते पाते हैं । जल की कमी और इसके तनाव के परिणामस्वरूप भूजल में अत्याधिक कमी हो रहीं है, क्योंकि वृक्षों की कमजोर जड़ें अधिक पानी को संजोये रखने में असमर्थ साबीत हो रहें हैं।
नई दिल्ली, गाजियाबाद, चेन्नई, गुड़गांव, पटियाला, मोहाली, अमृतसर, यमुना नगर, जयपुर, जोधपुर, लुधियाना, गांधीनगर, इंदौर, बीकानेर, अजमेर, रतलाम, जालंधर, आगरा, हैदराबाद, वेल्लोर और बैंगलोर से, आने वाले 4 से 5 वर्षों में भूजल मे कमी के संकेत दिये गये हैं । संदर्भ - पंजाब केसरी ।
सभीं फलों के छिलके, फलों के बीज, ना पकायी हुई सब्जियां (मुख्य रूप से उनकी डंडीयां), सूखी और ताजी पत्तियां, टहनियाँ (जो पेड़ों के नीचे गिरकर उपलब्ध होती रहती हैं) और ताजे / कच्चे / बिना पकायें हुए / अप्रयुक्त / अनुपचारित / जैविक या किसी भी अन्य रूप से उगाये गये पदार्थों को कचरे में नहीं फेंका जाना चाहिए, या जलाया नहीं जाना चाहिए, या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से अनुरोध हैं की वह इस संदर्भ में सारे आवश्यक दिशा-निर्देश, संदेश, सुचना एवम् अनुरोध सभी नगर निगमों, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक संस्थाओ / आरडब्ल्यूए, वनों, बागीचे और उन सभी अन्य भारतीय संस्थानों को तुरंत जारी करे, जिससे भारत के सारे वृक्षों और पौधों को प्राकृतिक और बहुतायत में पाया जाने वाले इस खाद को नष्ट न करते हुए, प्रतिदिन इसके सदुपयोग को अनिवार्य कराने के प्रबंध हो ।
इसके बजाय उपरोक्त सभी अधिकारियों और प्रत्येक भारतीय नागरिक से अनुरोध किया जायें की वे फलों के छिलकों, फलों के बीजों, ना पकी हुई सब्जियों (डंडीया और अन्य प्रकार के खाद्य कचरे का उपयोग करें - जो कि ज्यादातर समय कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है), पत्तियों, उपजी और पेड़ों के जैविक और हरे भागों को, पास के पौधों और पेड़ों को खाद के रूप में खिला दे। पानी के कमी वृक्षों और पौधों को (क्योंकि बारिश का अधिकांश पानी का उपयोग गेहूं / चावल / शक्कर / कपास के फसलो के लिए हो जाता है) संपुर्ण पोषण प्राप्त कराने में अंशत: अक्षम हो जाती हैं । ऐसी परिस्थितीयों में इस प्रकार का खाद सर्वोत्तम हो सकता हैं ।
इस प्रकार सारी हरी एवम् उपजाऊ संसाधनों का संपुर्ण उपयोग संभव हो पायेगा जिससे नागरिकों के लिए स्वच्छ पानी और शुध्द हवा सुनिश्चित कर पाना थोडा और सुलभ हो सकेगा ।

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आदरणीय महोदय,
अधिकांश फलों के छिलके, सब्जीयों का अपशिष्ट (अनावश्यक/बेकार डंडीया/अखाद्य सिरे/भाग) और पत्तियां या तो प्लास्टिक और अन्य बेकार अपशिष्ट पदार्थों के साथ जला दी जाती हैं या निपटा दी जाती हैं। जब इन बहुमूल्य संसाधनों को फेंक दिया जाता है, हम वृक्षों और पौधो को उनकी कमजोर जड़ों के कारण गिरते पाते हैं । जल की कमी और इसके तनाव के परिणामस्वरूप भूजल में अत्याधिक कमी हो रहीं है, क्योंकि वृक्षों की कमजोर जड़ें अधिक पानी को संजोये रखने में असमर्थ साबीत हो रहें हैं।
नई दिल्ली, गाजियाबाद, चेन्नई, गुड़गांव, पटियाला, मोहाली, अमृतसर, यमुना नगर, जयपुर, जोधपुर, लुधियाना, गांधीनगर, इंदौर, बीकानेर, अजमेर, रतलाम, जालंधर, आगरा, हैदराबाद, वेल्लोर और बैंगलोर से, आने वाले 4 से 5 वर्षों में भूजल मे कमी के संकेत दिये गये हैं । संदर्भ - पंजाब केसरी ।
सभीं फलों के छिलके, फलों के बीज, ना पकायी हुई सब्जियां (मुख्य रूप से उनकी डंडीयां), सूखी और ताजी पत्तियां, टहनियाँ (जो पेड़ों के नीचे गिरकर उपलब्ध होती रहती हैं) और ताजे / कच्चे / बिना पकायें हुए / अप्रयुक्त / अनुपचारित / जैविक या किसी भी अन्य रूप से उगाये गये पदार्थों को कचरे में नहीं फेंका जाना चाहिए, या जलाया नहीं जाना चाहिए, या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से अनुरोध हैं की वह इस संदर्भ में सारे आवश्यक दिशा-निर्देश, संदेश, सुचना एवम् अनुरोध सभी नगर निगमों, आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक संस्थाओ / आरडब्ल्यूए, वनों, बागीचे और उन सभी अन्य भारतीय संस्थानों को तुरंत जारी करे, जिससे भारत के सारे वृक्षों और पौधों को प्राकृतिक और बहुतायत में पाया जाने वाले इस खाद को नष्ट न करते हुए, प्रतिदिन इसके सदुपयोग को अनिवार्य कराने के प्रबंध हो ।
इसके बजाय उपरोक्त सभी अधिकारियों और प्रत्येक भारतीय नागरिक से अनुरोध किया जायें की वे फलों के छिलकों, फलों के बीजों, ना पकी हुई सब्जियों (डंडीया और अन्य प्रकार के खाद्य कचरे का उपयोग करें - जो कि ज्यादातर समय कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है), पत्तियों, उपजी और पेड़ों के जैविक और हरे भागों को, पास के पौधों और पेड़ों को खाद के रूप में खिला दे। पानी के कमी वृक्षों और पौधों को (क्योंकि बारिश का अधिकांश पानी का उपयोग गेहूं / चावल / शक्कर / कपास के फसलो के लिए हो जाता है) संपुर्ण पोषण प्राप्त कराने में अंशत: अक्षम हो जाती हैं । ऐसी परिस्थितीयों में इस प्रकार का खाद सर्वोत्तम हो सकता हैं ।
इस प्रकार सारी हरी एवम् उपजाऊ संसाधनों का संपुर्ण उपयोग संभव हो पायेगा जिससे नागरिकों के लिए स्वच्छ पानी और शुध्द हवा सुनिश्चित कर पाना थोडा और सुलभ हो सकेगा ।

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8 अगस्त 2019 पर पेटीशन बनाई गई