
Implement ₹15,000 minimum wage for B.Ed/BTC holders in Uttar Pradesh
The Issue
आदरणीय मुख्यमंत्री जी (उत्तर प्रदेश सरकार),
मैं उत्तर प्रदेश का एक जमीनी शिक्षक हूँ। आज हमारे प्रदेश में B.Ed, BTC, D.El.Ed, और Ph.D डिग्रीधारकों की एक बहुत बड़ी फौज अवसाद और घोर निराशा में जी रही है। भारी-भरकम फीस देकर डिग्रियां हासिल करने के बावजूद, ग्रामीण इलाकों के वित्तविहीन (निजी) स्कूलों में इन योग्य शिक्षकों को मात्र ₹4,000 से ₹5,000 के वेतन पर पढ़ाने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो कि आधुनिक समय की बंधुआ मजदूरी जैसा है।
वहीं दूसरी ओर, हमारे युवा 12 घंटे की निजी नौकरियों के लिए रोज 80 किलोमीटर का सफर तय करते हैं और महीने के अंत में उन्हें सिर्फ ₹10,000 मिलते हैं। यह रोजगार नहीं, युवाओं की बेबसी का शोषण है।
हमारी सरकार से मुख्य रूप से 3 मांगें हैं:
1. शिक्षा श्रम कानून लागू हो: प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों (सरकारी और प्राइवेट दोनों) में योग्य डिग्रीधारकों के लिए न्यूनतम ₹15,000 मासिक मानदेय को कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए
3. बिना इंटरव्यू 'काम का अधिकार': खाली पड़े ग्रामीण स्कूलों में 'डिग्री दिखाओ, नियुक्ति पाओ' की नीति के तहत ₹15,000 पर सभी B.Ed/BTC धारकों को रोजगार का विकल्प दिया जाए, जिससे भर्ती भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया का अंत हो सके।
महोदय, जब ₹50,000 के एक सरकारी पद के बजट में ₹16,666 के तीन रोजगार दिए जा सकते हैं, तो सरकार को यह नीतिगत बदलाव तुरंत करना चाहिए ताकि तीन जरूरतमंद परिवारों के चूल्हे जल सकें। फिजूलखर्ची और मुफ्त की रेवड़ियों के बजाय युवाओं को 'काम के बदले सम्मानजनक दाम' देना ही असली जनकल्याण है।
मैं उत्तर प्रदेश के सभी बेरोजगार युवाओं, अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करता हूँ कि इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचाने में मदद करें।
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आदरणीय मुख्यमंत्री जी (उत्तर प्रदेश सरकार),
मैं उत्तर प्रदेश का एक जमीनी शिक्षक हूँ। आज हमारे प्रदेश में B.Ed, BTC, D.El.Ed, और Ph.D डिग्रीधारकों की एक बहुत बड़ी फौज अवसाद और घोर निराशा में जी रही है। भारी-भरकम फीस देकर डिग्रियां हासिल करने के बावजूद, ग्रामीण इलाकों के वित्तविहीन (निजी) स्कूलों में इन योग्य शिक्षकों को मात्र ₹4,000 से ₹5,000 के वेतन पर पढ़ाने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जो कि आधुनिक समय की बंधुआ मजदूरी जैसा है।
वहीं दूसरी ओर, हमारे युवा 12 घंटे की निजी नौकरियों के लिए रोज 80 किलोमीटर का सफर तय करते हैं और महीने के अंत में उन्हें सिर्फ ₹10,000 मिलते हैं। यह रोजगार नहीं, युवाओं की बेबसी का शोषण है।
हमारी सरकार से मुख्य रूप से 3 मांगें हैं:
1. शिक्षा श्रम कानून लागू हो: प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों (सरकारी और प्राइवेट दोनों) में योग्य डिग्रीधारकों के लिए न्यूनतम ₹15,000 मासिक मानदेय को कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए
3. बिना इंटरव्यू 'काम का अधिकार': खाली पड़े ग्रामीण स्कूलों में 'डिग्री दिखाओ, नियुक्ति पाओ' की नीति के तहत ₹15,000 पर सभी B.Ed/BTC धारकों को रोजगार का विकल्प दिया जाए, जिससे भर्ती भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया का अंत हो सके।
महोदय, जब ₹50,000 के एक सरकारी पद के बजट में ₹16,666 के तीन रोजगार दिए जा सकते हैं, तो सरकार को यह नीतिगत बदलाव तुरंत करना चाहिए ताकि तीन जरूरतमंद परिवारों के चूल्हे जल सकें। फिजूलखर्ची और मुफ्त की रेवड़ियों के बजाय युवाओं को 'काम के बदले सम्मानजनक दाम' देना ही असली जनकल्याण है।
मैं उत्तर प्रदेश के सभी बेरोजगार युवाओं, अभिभावकों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करता हूँ कि इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचाने में मदद करें।
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Petition created on 30 September 2026