Petition updateSamta andolan instensifies to stop reservation in Promotion immediately.Samta Andolan gives Memorandum to Central Ministers in Jaipur

Alok GoyalIndia

Aug 16, 2016
पदोन्नति में आरक्षण के लिए लाये जा रहे 117 वें संशोधन बिल के खिलाफ आज 16 २०१६ को केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, एवं पियूष गोयल जी को समता का ज्ञापन पढ़िये पीड़ा समता आंदोलन के अध्यक्ष श्री नारायण जी की सवर्णो और सामान्य कैटेगरी के लोगों की पीड़ा और संवेदना
*सांसदों को धूल चटाएंगे*
देखो स्वतंत्र भारत अब,
69 वर्ष का हो गया है।
देश के लोक प्रशाशन का,
भाईचारा कहीं खो गया है।।
पदोन्नति में आरक्षण से,
संविधान है घायल बार बार।
जातिवादी सांसदों ने,
संसद गरिमा की तार तार।।
अनुच्छेद 16(4)A ने देखो,
जो जहर का बीज बोया है।
इस से घायल, आहत हो कर,
हर राष्ट्रवादी रोया है।।
पदोन्नति में आरक्षण से,
दलितों का धैर्य टूट रहा है।
नोकरीशुदा आरक्षित वर्ग अब,
दलितों का आरक्षण लूट रहा है
स्वतंत्र न्यायपालिका के निर्णय,
हम सबको रखते जिन्दा हैं।
लेकिन सांसदों की करतूतों से,
एक सौ तीस करोड़ शर्मिंदा हैं।
अब भी देखो बेशर्म सांसद,
117 वाँ संशोधन ला रहे हैं।
हमारे ही वोटों से जीतकर,
हम पर ही चाक़ू चला रहे हैं।।
समताआंदोलन का संघर्ष अब,
जनमानस को जगा रहा है।
राष्ट्रवाद को लक्ष्य मानकर,
समता की ज्योति जला रहा है।
हम सबको संकल्पबद्ध कर के,
भटके सांसदों को मनाएंगे।
फिर भी जो नहीं माने उस को,
निश्चित ही धूल चटाएंगे।।
निश्चित ही धूल चटाएंगे।।
*पाराशर नारायण शर्मा,
अध्यक्ष, समता आंदोलन।
क्या हम स्वतंत्र हैं ? नहीं हम सुरक्षित वर्गों के नाकाबिल लोगों की गुलामी के लिए बाध्य हो गए हैं .
पढ़िए योगेंद्र राठौर की मार्मिक पीड़ा
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं कैसे दूँ मैं? स्वतंत्रता का मतलब होता है पूर्ण आज़ादी। आज़ादी गुलामी से, आज़ादी भेदभाव से, आज़ादी तब सही मायने में मानी जाती है जब हर किसी को एक समान अधिकार हो। क्या इस देश के हर नागरिक को समान अधिकार है? नहीं।
मैं एक सवर्ण हूँ। मुझे काबिल होने के बावजूद असमानता के दंश को झेलना पड़ता है। मेरी जाति के वजह से मुझसे पक्षपात किया जाता है। सन् 1947 के पहले अँगरेज़ हमसे पक्षपात करते थे और अब हमारी सरकार हमसे पक्षपात करती है, तो कैसे हो गया मैं स्वतंत्र? मैं तो आज भी आरक्षण नाम के ज़ंज़ीर से जकड़ा हुआ हूँ, कैसे कहूँ मैं खुद को स्वतंत्र? मेरी जाति मेरी काबिलियत पर हावी है, कैसे मान लूँ मैं खुद को स्वतंत्र? नहीं, मैं स्वतंत्र नहीं, मेरे पूर्वजों के बलिदानों के बावजूद मुझे मेरे ही देश में मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया है, कैसे मान लूँ मैं खुद को स्वतंत्र?
स्वतंत्रता मेरे लिए उस दिन होगी जिस दिन इस देश के हर नागरिक को समान नज़र से देखा जायेगा। जिस दिन युवाओं को अवसर उनकी काबिलियत देख कर दी जायेगी, जाति देख कर नहीं। जिस दिन इस देश का हर नागरिक दलित और सवर्ण के मापदंड से बरी कर दिया जायेगा और हर नागरिक भारतीय के रूप में पहचाना जायेगा उस दिन मनाऊंगा मैं आज़ादी। तब तक जातिगत आरक्षण को ख़त्म करने की मेरी लड़ाई जारी रहेगी।
Please wake up and support Samta Andolan for the Progress of the Country by agitating against Reservation.
Copy link
WhatsApp
Facebook
Nextdoor
Email
X