कोरोना वायरस : स्क्रीनिंग के दायरे को बढ़ाएं ताकि इसे महामारी बनने से रोका जा सके

समस्या

बहुत साल पहले परिवार में एक बड़े हादसे के बाद मैंने सेव लाइफ फाउंडेशन की स्थापना की ताकि सड़कों पर लोगों की जान बचाई जा सके। मैं जानता हूँ किसी अपने को खोने का दुख क्या होता है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी उस दर्द से गुज़रे, जिससे मुझे और मेरे परिवार को गुज़रना पड़ा।

अब जबकि कोरोना वायरस जैसी बड़ी आपदा का खतरा हमारे सिर पर मंडरा रहा है तो हमें मिलकर काम करना होगा, जल्दी काम करना होगा। इसीलिए जल्दी से मेरी पेटीशन साइन कर स्वास्थ्य मंत्री से मांग करें कि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग को कुछ सरकारी अस्पतालों तक सीमित ना रखा जाए और इस बीमारी को महामारी बनने से रोका जाए।

ऐसा इसलिए क्योंकि “भारत के पास कोविड-13 के स्टेज-3 तक पहुँचने में 30 दिन से कम का समय है।” (14 मार्च के इकॉनोमिक टाइम्स में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के डायरेक्टर जनरल का बयान)

कुछ लोग कहेंगे कि भारत में वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या कम है इसलिए हम स्टेज-3 में नहीं पहुँचेंगे। पर विशेषज्ञ जैसे कि नेशनल हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर के पूर्व प्रमुख का कहना है कि “ये संख्या कम है क्योंकि टेस्टिंग कम है”। अगर संक्रमित लोगों की सही संख्या नहीं पता चल पाई तो क्या होगा?

अभी केवल 52 सरकारी परीक्षण केंद्रों और कुछ प्राइवेट लैबों पर ही कोरोना वायरस के टेस्ट हो रहे हैं। ये 130 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले हमारे देश के लिए बहुत ही कम है

गुजरात सरकार ने एक सराहनीय पहल शुरू कर के हर सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में “फ्लू कॉर्नर” बनाने के निर्देश जारी किए हैं ताकि कोविड-19 के संभावित मरीज़ों की स्क्रीनिंग की जा सके। समय आ गया है कि इस पहल को पूरे देश में, खासकर उन राज्यों में जो कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लागू किया जाए।

मेरी पेटीशन साइन करें ताकि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जाए ताकि ये बीमारी एक महामारी ना बनने पाए।

मेरे साथ सरकार से मांग करें कि:

1. देश के सभी 700 ज़िला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट अस्पतालों में टेस्टिंग किट और तैयारी के दिशा-निर्देश मुहैया कराए जाएं। दक्षिण कोरिया ने पार्किंग लॉटों में ड्राइव-थ्रू टेस्टिंग सेंटर बनाए थे, जिससे आसानी से लोगों को टेस्ट कर लिया जाता था। बड़े पैमाने पर उनकी स्क्रीनिंग और जाँच का नतीजा रहा है कि वहाँ नए केस में काफी गिरावट देखने को मिली।

2. पूरे देश के प्राइवेट तथा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध ICU बेडों की सार्वजनिक सूचि जारी की जाए ताकि पता चल सके कि गंभीर रूप से बीमार कितने लोगों का इलाज संभव है। WHO और ICMR के अनुमानों के आधार पर अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था की जाए।

3. कोरोना वायरस को महामारी के स्तर पर पहुँचने से पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों की युद्ध स्तर पर ट्रेनिंग हो ताकि यदि ऐसा होता है तो वो इससे लड़ने में सक्षम हों।

4. कोरोना वायरस से जुड़ें केसों की रिपोर्टिंग को बेहतर किया जाए।

5. उपरोक्त कामों के लिए सरकार से तुरंत बजट का आवंटन किया जाए।

कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। देश ही नहीं, हमने विदेशों में जाकर भारतीयों की रक्षा की है। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार अगर ये कदम भी उठा लेती है तो इससे पूरे देश में एक बड़ा संदेश जाएगा और बीमारी का भय भी कम होगा और हम हर भारतीय की रक्षा कर पाएंगे।

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Piyush Tewariपेटीशन स्टार्टर

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बहुत साल पहले परिवार में एक बड़े हादसे के बाद मैंने सेव लाइफ फाउंडेशन की स्थापना की ताकि सड़कों पर लोगों की जान बचाई जा सके। मैं जानता हूँ किसी अपने को खोने का दुख क्या होता है। मैं नहीं चाहता कि कोई भी उस दर्द से गुज़रे, जिससे मुझे और मेरे परिवार को गुज़रना पड़ा।

अब जबकि कोरोना वायरस जैसी बड़ी आपदा का खतरा हमारे सिर पर मंडरा रहा है तो हमें मिलकर काम करना होगा, जल्दी काम करना होगा। इसीलिए जल्दी से मेरी पेटीशन साइन कर स्वास्थ्य मंत्री से मांग करें कि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग को कुछ सरकारी अस्पतालों तक सीमित ना रखा जाए और इस बीमारी को महामारी बनने से रोका जाए।

ऐसा इसलिए क्योंकि “भारत के पास कोविड-13 के स्टेज-3 तक पहुँचने में 30 दिन से कम का समय है।” (14 मार्च के इकॉनोमिक टाइम्स में ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के डायरेक्टर जनरल का बयान)

कुछ लोग कहेंगे कि भारत में वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या कम है इसलिए हम स्टेज-3 में नहीं पहुँचेंगे। पर विशेषज्ञ जैसे कि नेशनल हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर के पूर्व प्रमुख का कहना है कि “ये संख्या कम है क्योंकि टेस्टिंग कम है”। अगर संक्रमित लोगों की सही संख्या नहीं पता चल पाई तो क्या होगा?

अभी केवल 52 सरकारी परीक्षण केंद्रों और कुछ प्राइवेट लैबों पर ही कोरोना वायरस के टेस्ट हो रहे हैं। ये 130 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले हमारे देश के लिए बहुत ही कम है

गुजरात सरकार ने एक सराहनीय पहल शुरू कर के हर सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में “फ्लू कॉर्नर” बनाने के निर्देश जारी किए हैं ताकि कोविड-19 के संभावित मरीज़ों की स्क्रीनिंग की जा सके। समय आ गया है कि इस पहल को पूरे देश में, खासकर उन राज्यों में जो कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लागू किया जाए।

मेरी पेटीशन साइन करें ताकि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग और टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जाए ताकि ये बीमारी एक महामारी ना बनने पाए।

मेरे साथ सरकार से मांग करें कि:

1. देश के सभी 700 ज़िला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट अस्पतालों में टेस्टिंग किट और तैयारी के दिशा-निर्देश मुहैया कराए जाएं। दक्षिण कोरिया ने पार्किंग लॉटों में ड्राइव-थ्रू टेस्टिंग सेंटर बनाए थे, जिससे आसानी से लोगों को टेस्ट कर लिया जाता था। बड़े पैमाने पर उनकी स्क्रीनिंग और जाँच का नतीजा रहा है कि वहाँ नए केस में काफी गिरावट देखने को मिली।

2. पूरे देश के प्राइवेट तथा सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध ICU बेडों की सार्वजनिक सूचि जारी की जाए ताकि पता चल सके कि गंभीर रूप से बीमार कितने लोगों का इलाज संभव है। WHO और ICMR के अनुमानों के आधार पर अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था की जाए।

3. कोरोना वायरस को महामारी के स्तर पर पहुँचने से पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों की युद्ध स्तर पर ट्रेनिंग हो ताकि यदि ऐसा होता है तो वो इससे लड़ने में सक्षम हों।

4. कोरोना वायरस से जुड़ें केसों की रिपोर्टिंग को बेहतर किया जाए।

5. उपरोक्त कामों के लिए सरकार से तुरंत बजट का आवंटन किया जाए।

कोरोना वायरस से लड़ने में हमारी सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। देश ही नहीं, हमने विदेशों में जाकर भारतीयों की रक्षा की है। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार अगर ये कदम भी उठा लेती है तो इससे पूरे देश में एक बड़ा संदेश जाएगा और बीमारी का भय भी कम होगा और हम हर भारतीय की रक्षा कर पाएंगे।

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फैसला लेने वाले

Dr Harsh Vardhan
Dr Harsh Vardhan
Union Minister for Health and Family Welfare
Preeti Sudan
Preeti Sudan
Secretary, Health and Family Welfare, Government of India
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