

*कल की नाईट ड्यूटी*
ये कथा कल की ही एक सच्ची घटना है , जिसका कपोर काल्पनिक कहानियों से कोई वास्ता नहीं है ।
कल की मेरी नाईट ड्यूटी के दौरान कई बार ही भीड़ का जमावड़ा हुआ । लेकिन एक अलग ही बात हुई । लोग खुद एक दूसरे से कह रहे थे कि यहां भीड़ न बढ़ाओ । डॉक्टर को इलाज करने दो ।
हालांकि एक दो रिश्तेदार के भावनावश खड़े होने के कारण बार बार उन्हें कहना पड़ रहा था , लेकिन फिर भी वो खुद ही एक दूसरे को ऐसा करने कह रहे थे । यह देख के मुझे बहुत आश्चर्य भी हुआ और अच्छा भी लगा ।
इसकी दो वजह हो सकती है , एक तो हाल ही के हड़ताल के कारण डॉक्टरों के हड़ताल का डर और दूसरा आम जनता का ऐसी घटनाओं के प्रति जागरूक होना ।
मुझे कल दूसरा कारण प्रभावी लगा ।
असल मे ऐसी घटनाओं की जड़ कहाँ है -
01. 24×7 सभी सुविधाओं का दावा - सरकार हमेशा ही सभी हॉस्पिटलों के बारे में यही प्रचार करती है कि वहां सभी सविधायें 24×7 मिलती हैं । जिससे हमारी जनता को यही लगता है कि हमारे अस्पतालों में तो सभी सुविधा 24×7 है ।
02. मीडिया का दुष्प्रचार - असल मे मीडिया अस्पतालों की कमियों और गलतियों को ही प्राथमिकता देता है । जिससे लोगों को यही लगता है कि सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में 24×7 सभी सुविधा होते हुए ही जानबूझकर गलती और कामचोरी करते हैं ।
03. घड़ियाली नेतागिरी - मारपीट के घटनाओं की आखिरी कील घड़ियाली नेतागिरी करने वाले लोकल जनप्रतिनिधियों ठोंकते हैं । वो मरीज़ों औऱ परिजनों के आंसू व भावना का फायदा उठाकर हमदर्दी जताते हुए भड़काते हैं । और अपनी नेतागिरी चमकाते हैं ।
इन तीनो का कॉकटेल का असर ये होता है कि हमारी भोली भाली जनता ये समझती है कि अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध है , डॉक्टर्स/स्टाफ कामचोर हैं और यहां हल्ला गुल्ला करने से ही सही इलाज होता है । इसीलिए इस प्रकार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है। लेकिन हाल के हड़ताल से उनमें जागरूकता थोड़ी ही सही लेकिन बढ़ी है । साथ ही पावर-पैसे वालों में डर भी बढ़ा है ।
अतः मुझे लगता है कि हमें आम जनता और डॉक्टरों के बीच एक अच्छा कम्युनिकेशन स्थापित करने की भी पहल करनी चाहिए । जिससे वो सरकारी अस्पतालों में दिए जाने वाली सुविधाओं की सीमा और हमारे सर्विस कंडीशन को अच्छे से समझ सकें ।
आपकी क्या राय है ?
डॉ इक़बाल हुसैन
एग्जीक्यूटिव प्रेसीडेंट
सीडा