Crpc 151 107 116 के तहत sdm को दीये गए न्यायिक शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए

Crpc 151 107 116 के तहत sdm को दीये गए न्यायिक शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए

समस्या

 उत्तर प्रदेश मे sdm 151 107 116 के केस मे भी असहायों को जिला जेल भेज देते हैं ये कहते हुए की 

अभियुक्त पुलिस अभिरक्षा मे मेरे समक्ष पेश किया गया और उसने कोई जमानत प्रार्थना पत्र नही पेश किया (लेकिन वहाँ अभियुक्त के परिवारिजन सब वकील ज़मानतदार भी मौजूद रहते हैं )   इस लिए अभियुक्त को जिला कारागार न्यायिक हिरासत मे भेजा जाता हैं और उसकी जमानत तब तक नही मंजूर करते जब तक वो अन्याय के विरुध बोलना और अपने हक़ के लिए आवाज उठाना ना छोड़ देगा 

इसमें अक्सर जमीन विवाद होते हैं जिसमें दबंग गरीबों की जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते हैं और गरीब अपनी जमीन बचाने के लिए उनसे उलझ जाता हैं sdm और पुलिस चोकी वाले उसकी सुनते नही कयूंकि उसके पास पैसे नही होते रिस्वत देने के लिए , वो दे भी क्यूँ रिस्वत जो उसका हक़ हैं उसको तो मिलना ही चाहिये 

फिर जब वो निराश होकर डीएम एसपी के यहाँ जाता हैं तब sdm  उस आदमी को पुलिस द्वारा उठवाकर फरज़ी तरिके कानून विरुध जाकर 151 107 116 मे न्यायिक हिरासत मे भेज देता हैं

फिर वो गरीब खुद लाचार होकर हमारे सम्विधान को कोसता हैं न्याय पालिका पर प्रश्न चिन्ह लगाता हैं आखिर उसके हक़ के लिए कौन खड़ा होगा 

जाहिर हैं हम और आप 

151 107 116 हैं इसमें अमुमन अभियुक्त को हिरासत मे भेजने से पहले कई कानूनी प्रकृयाओ का पालन होना चाहिये जो नही होता 

कयूंकि sdm की मंशा होती हैं अभियुक्त को जेल भेजने की इस्लिये उसके जमानतदार की मौजूदगी मे ज़बरन अभियुक्त से साईन कराकर की मेरा वकील और जमान्तदार नही हैं वही पॉइंट दिखाकर 151 107 116 मे जेल भेज देते हैं पुलिस अभिरक्षा मे पेश किए गए अभियुक्त को 

जबकि पुलिस अभिरक्षा मे व्यक्ति अपने जमानत कैसा देगा ?(जबकि हक़ीक़त ये हैं की sdm लेगा ही नहीँ ) 

कई लोगो को माहिनो घर वापिस आना नसीब नही होता कयूंकि हर पेशी पर अभियुक्त से यही साईन लिया जाता हैं की मेरा वकील और जमानती कोई नहीँ हैं  ज़बरन .और वापिस जेल भेज देते हैं 

सबसे बड़ी दुःखद जानकारी ये हैं की अभियुक्त का भरोसा फिर न्याय पालिका से उठ जाता हैं और कई पीड़ित फिर न्याय पालिका से मोह्भन्ग होने के कारण आत्म हत्या या हत्या जैसा जघन्या अपराध कर गुजरते हैं और उनके पीछे फिर उनका पूरा परिवार तबाह हो जाता हैं 

इस अन्याय के विरुध इस हस्ताक्षर मुहिम को सफल बनाए मैं समस्त भारत की जनता से निवेदन करता हूँ 

avatar of the starter
Prem prakash yadavपेटीशन स्टार्टरSocial worker bloger general contractor

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समस्या

 उत्तर प्रदेश मे sdm 151 107 116 के केस मे भी असहायों को जिला जेल भेज देते हैं ये कहते हुए की 

अभियुक्त पुलिस अभिरक्षा मे मेरे समक्ष पेश किया गया और उसने कोई जमानत प्रार्थना पत्र नही पेश किया (लेकिन वहाँ अभियुक्त के परिवारिजन सब वकील ज़मानतदार भी मौजूद रहते हैं )   इस लिए अभियुक्त को जिला कारागार न्यायिक हिरासत मे भेजा जाता हैं और उसकी जमानत तब तक नही मंजूर करते जब तक वो अन्याय के विरुध बोलना और अपने हक़ के लिए आवाज उठाना ना छोड़ देगा 

इसमें अक्सर जमीन विवाद होते हैं जिसमें दबंग गरीबों की जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते हैं और गरीब अपनी जमीन बचाने के लिए उनसे उलझ जाता हैं sdm और पुलिस चोकी वाले उसकी सुनते नही कयूंकि उसके पास पैसे नही होते रिस्वत देने के लिए , वो दे भी क्यूँ रिस्वत जो उसका हक़ हैं उसको तो मिलना ही चाहिये 

फिर जब वो निराश होकर डीएम एसपी के यहाँ जाता हैं तब sdm  उस आदमी को पुलिस द्वारा उठवाकर फरज़ी तरिके कानून विरुध जाकर 151 107 116 मे न्यायिक हिरासत मे भेज देता हैं

फिर वो गरीब खुद लाचार होकर हमारे सम्विधान को कोसता हैं न्याय पालिका पर प्रश्न चिन्ह लगाता हैं आखिर उसके हक़ के लिए कौन खड़ा होगा 

जाहिर हैं हम और आप 

151 107 116 हैं इसमें अमुमन अभियुक्त को हिरासत मे भेजने से पहले कई कानूनी प्रकृयाओ का पालन होना चाहिये जो नही होता 

कयूंकि sdm की मंशा होती हैं अभियुक्त को जेल भेजने की इस्लिये उसके जमानतदार की मौजूदगी मे ज़बरन अभियुक्त से साईन कराकर की मेरा वकील और जमान्तदार नही हैं वही पॉइंट दिखाकर 151 107 116 मे जेल भेज देते हैं पुलिस अभिरक्षा मे पेश किए गए अभियुक्त को 

जबकि पुलिस अभिरक्षा मे व्यक्ति अपने जमानत कैसा देगा ?(जबकि हक़ीक़त ये हैं की sdm लेगा ही नहीँ ) 

कई लोगो को माहिनो घर वापिस आना नसीब नही होता कयूंकि हर पेशी पर अभियुक्त से यही साईन लिया जाता हैं की मेरा वकील और जमानती कोई नहीँ हैं  ज़बरन .और वापिस जेल भेज देते हैं 

सबसे बड़ी दुःखद जानकारी ये हैं की अभियुक्त का भरोसा फिर न्याय पालिका से उठ जाता हैं और कई पीड़ित फिर न्याय पालिका से मोह्भन्ग होने के कारण आत्म हत्या या हत्या जैसा जघन्या अपराध कर गुजरते हैं और उनके पीछे फिर उनका पूरा परिवार तबाह हो जाता हैं 

इस अन्याय के विरुध इस हस्ताक्षर मुहिम को सफल बनाए मैं समस्त भारत की जनता से निवेदन करता हूँ 

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