Mithila Development Board (MDB) के गठन के लिए

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 श्रीमान माननीय,

इस पब्लिक पेटिशन के द्वारा हम आपका ध्यान मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड के गठन की जरूरत की ओर दिलाना चाहते हैं. मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) विगत कई महीनों से इसके लिए आंदोलनरत है. अगस्त ५ को हमने दिल्ली संसद मार्ग पर हजारों सेनानियों के साथ लॉन्ग मार्च किया था और अब २ दिसम्बर को दरभंगा राज मैदान में ५०००० लोगों के साथ जमा हो रहे हैं. उसी सन्दर्भ में हमारी ये पिटीशन पब्लिक की जा रही हैं. हमारी मांग है की मिथिला के आर्थिक पिछड़ेपन को देखते हुए यहाँ एक सेपरेट डेवलपमेंट बोर्ड 'मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड' का गठन किया जाए.


'मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड (MDB)' क्षेत्र के 20+ पिछड़े जिलों की जरूरत और वाज़िब हक़ है। देश के सबसे पिछड़े जिलों की लिस्ट में अररिया, कटिहार, पूर्णिया, बांका, जमुई, बेगुसराय, शिवहर, खगरिया, सुपौल, किशनगंज आदि का नाम सबसे ऊपर आता है। एक आम मैथिल सलाना अन्य जगह के एक औसत भारतीय का एक तिहाई कमाता है, पर कैपिटा इनकम की दृष्टि से एक मैथिल किसी औसत मराठी का चौथाई, गुजराती का पांचवां, दिल्ली का दशवां, केरला का छठवाँ हिस्सा कमाता है। मिथिला क्षेत्र के जिलों का जीडीपी पर कैपिटा नोर्थईस्ट राज्यों के औसत से भी लगभग आधा है।

क्षेत्र में न एयरपोर्ट है, न सुव्यवस्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय या केंद्रीय अस्पताल, न इंफ्रास्ट्रक्चर न रोजगार, न हैवी इंडस्ट्री न खाद्य-डेयरी-मत्स्य-कृषि आधारित उद्योग या न ही टेक्निकल इंडस्ट्री। कृषि बन्द हो रही है, लोग पलायन कर रहे हैं, न कला-संस्कृति-भाषा बढ़ पाई और न टूरिज्म। यदि महाराष्ट्र में मराठवाड़ा, विदर्भ और गोरखालैंड, हैदराबाद, मिज़ोरम आदि जैसे जगहों पर पिछड़े जिलों के लिए ऑटोनॉमस डेवलपमेंट बॉडी बन सकता है तो मिथिला को उसका हक़ क्यों नहीं दिया जा रहा है ?

सेपरेट डेवलपमेंट बोर्ड फ़ॉर मिथिला एक ऐसा विचार है हमारे हिसाब से जो मिथिला के वर्तमान राजनीतिक-आर्थिक-वास्तविक और वैकाशिक हालात एवं जरूरत पर एकदम फिट बैठता है। अभी हाल में ही प्रेजिडेंट ने हैदराबाद-कर्नाटक के 6 पिछड़े जिलों के लिए एक डेवलपमेंट बोर्ड के गठन की मंजूरी दी है। गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन भी कुछ ऐसे ही फंक्शन करता है। महाराष्ट्र में भी विदर्भ, मराठावाड़ा और शेष महाराष्ट्र नामित तीन डेवलपमेंट बोर्ड को मंजूरी है जो अपने अपने इलाके के डेवलपमेंट सम्बंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य से स्वतंत्र होके या उसके कॉर्डिनेशन में काम करता है।

ये डेवलपमेंट बोर्ड सामान्यतया राज्य के गरीब इलाक़ों या विशिष्ट पहचान वाले इलाकों के लिए बनाया जाता है ताकि विकास समावेसी हो और उस क्षेत्र की कम्पेरेटिव सहभागिता रह पाए। 6 करोड़, 20 जिला, अलग भाषा-संस्कृति कुल मिलाकर मिथिला को अलग डेवलेपमेंट कॉउंसिल के लिए एकदम उपयुक्त बनाता है। मिथिला के जिलों के स्थिति का कम्पेरेटिव विश्लेषण कीजिए तो हालात मुंह खोल के सामने आ जाएगा। करीब सिर्फ 55.95 प्रतिशत एवरेज लिटरेसी रेट है मिथिला के 20 जिलों का, गरीबी-भुखमरी-कुपोषण-बेरोजगारी-पलायन-उद्योग धंधों और मिलों का बन्द होना, शिक्षा-स्वास्थ्य-संचार सुविधाओं की कमी, कृषि-यातायात-मानवविकास-जीवन स्तर का निचले स्तर पर होना, ये सब जरूरत का एहसास करवाता है एक ऐसे स्वतंत्र बोर्ड या काउंसिल की जो सिर्फ मिथिला के विकास पर काम करे। यदि केंद्र कोई सहायता या विशेष पैकेज भेजता है तो ये इस बोर्ड को मिले काम करने को न की राज्य सरकार उसे कहीं और खर्च कर दे।

मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड के स्कोप्स. मिथिला में ये क्या-क्या काम कर सकती है और किन क्षेत्रों में डायरेक्ट फायदा होगा ?

मिथिला में डेवलपमेंट बोर्ड क्षेत्र के २०+ जिलों के लिए विशेष वैकासिक प्रोजेक्ट्स तैयार कर सकती है। मसलन राज्य सरकार कभी बाढ़ जैसे समस्या के निदान के लिए प्रयास नहीं करती लेकिन यदि अपना डेवलपमेंट बोर्ड रहेगा तो जरूर इसपर ठीक से काम किया जा सकता है. क्षेत्र के खेतों में पानी नहीं पहुँचती और सिंचाई की सारी योजनाएं असफल हुई है क्योंकि बिहार सरकार के लिए सिर्फ मिथिला पर विशेष ध्यान देना संभव नहीं है लेकिन यदि अपना डेवलपमेंट बोर्ड रहेगा मिथिला का तो वो इन चीजों पर आसानी से काम कर सकती है। एक और उदाहरण, मिथिला का लोक-कला, संस्कृति, भाषा-इतिहास और पर्यटन मिलकर एक बड़ा वैकासिक इंडस्ट्री बन सकता है लेकिन बिहार सरकार अपनी मजबूरियों के कारण इस पर ध्यान नहीं दे पाती, जबकि यदि अपना डेवलपमेंट बोर्ड रहेगा तो इसके लिए शानदार प्लानिंग और एक्सेक्शयून लोकली किया जा सकता है. ऐसे ही कृषि आधारित उद्योग, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, अन्य ग्रामीण व् कुटीर उद्योगों के लिए अलग से प्लान किया जा सकता है और एक बेहतर रिजल्ट सामने आ सकता है. मिथिला के बंद पड़े मीलों को पुनः खुलवाने के लिए ऐसे लोकल डेवलपमेंट बोर्ड बेहतरीन माध्यम बन सकता है, मिथिला में नए इंडस्ट्री लगने-सॉफ्टवेयर पार्क्स-एजुकेशनल हब बनाने जैसी योजनाओं के लिए मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड सबसे बेस्ट और मुफीद माध्यम बन सकता है। ये बोर्ड लोकली काम करेगी इसलिए जिम्मेवारी तय करना आसान होगा और लोग दवाब बनाकर आसानी से काम भी करवा सकते हैं।

अतः आपसे निवेदन है की कृपया हमारी मांग पर ध्यान देते हुए इसे प्रोसेस करें और मिथिला डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया जाए.

निवेदक:

-आदित्य मोहन
(राष्ट्रीय महासचिव, MSU)
9649396727



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