सातताल के जंगलो को संरक्षण रिजरव घोषित करे।

समस्या

सातताल की झीलो और जंगलो का भविष्य बहुत बडे खतरे मे है।

सातताल 525 से जयादा तितलियो और 500 से जयादा पक्षियो का घर है जिसमे कुछ पृजाति के पक्षी आते है जैसे:- द रेड हैड वल्चर ( गंभीर रूप से विलुप्त होने वाली पृजति), सिरेनस वल्चर (खतरे के नजदीक), गृ कृउन पृनिया ( कम पाई जाने वाली पृजाति), पैल्सेस फिश ईगल ( विलुप्त पृजाति) और साथ ही साथ अन्य पेड-पौधे और जीव-जन्तु जिसमे किग कोबरा (कम पाई जाने वाली पृजाति), हिमालयन सीराओ (कम पाई जाने वाली पृजाति), फँक्सटेल औरकिड (विलुप्त पृजाति), अटकस एटलस ( दुनिया का सबसे बड़ मौथ) सातताल के कुछ जंगल पुराने घने बाँज के जंगल है (जो कि फिलहाल कुमाऊ क्षेत्र मे खतरे मे है जिसकी वजह पाईन इनवेजन, आग और विखंडन है) जिसको जल्द से जल्द बचाने की आवश्यकता है

4000 फीट की ऊचाई पर पृकृति के इस अनोखे सम्मेलन को 'सौदरयीकरण' की आड़ मे नष्ट होने का खतरा है।

लगभग INR 6-7 करोड़ की लागत पर सरकारी प्राधिकरणों का सातताल लेक और जंगलो के आस-पास की जगह को विकसित करने की योजना है जिसमे दुकाने, पारकिग, बच्चो का पारक, व्यू पौइट और वृक्षारोपण आदि शामिल है। यह सब ‘लेक साइड डेवलपमेंट’ की आड़ मे है।

इस पृस्ताव से सातताल के अंदर बहुत बड़ी आपदा हो सकती है। जिसे जल्द ही रोकने की जरूरत है। यह सिरफ एक परियोजना के बारे में नहीं है यह जंगल में रहने वाले हजा़रों पृजातियों के जीव- जन्तु और पेड़ पौधों के घर को बचाने की बात है

हमें लोगों की ताकत की जरूरत है जिससे कि हम अपनी दरख्वास्त और मज़बूत कर सके सरकारी दफ्तरों के लिए, ताकि वो सातताल को कंजरवेशन रिज़रव घोषित करें और ऐसा कोई भी कारय न होने दे जिससे कि आस- पास की जगह को हानि पहुंचे। यदि सातताल को कंज़रवेशन रिज़रव का दरजा मिलता है तो उससे क्षेत्र के आस-पास की जगह को बचाने में मदद मिलेगी

 

आप जैसे लोग ही बदलाव ला सकते है

 

इस याचिका पर अभी हस्ताक्षर करें

 

आपका समरथन हमारे इस कारय को और मजबूत करेगा।

 

अभी हस्ताक्षर करें

 

कंजरवेशन रिज़रव और परयावरण को बचाने के लिए अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिन्क पर किल्क करे :-

https://www.iucn.org/downloads/natural_solutions_pas__health_and_well_being.pdf

https://www.jstor.org/stable/26267704?seq=1#metadata_info_tab_contents

https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0006320719302927

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सातताल की झीलो और जंगलो का भविष्य बहुत बडे खतरे मे है।

सातताल 525 से जयादा तितलियो और 500 से जयादा पक्षियो का घर है जिसमे कुछ पृजाति के पक्षी आते है जैसे:- द रेड हैड वल्चर ( गंभीर रूप से विलुप्त होने वाली पृजति), सिरेनस वल्चर (खतरे के नजदीक), गृ कृउन पृनिया ( कम पाई जाने वाली पृजाति), पैल्सेस फिश ईगल ( विलुप्त पृजाति) और साथ ही साथ अन्य पेड-पौधे और जीव-जन्तु जिसमे किग कोबरा (कम पाई जाने वाली पृजाति), हिमालयन सीराओ (कम पाई जाने वाली पृजाति), फँक्सटेल औरकिड (विलुप्त पृजाति), अटकस एटलस ( दुनिया का सबसे बड़ मौथ) सातताल के कुछ जंगल पुराने घने बाँज के जंगल है (जो कि फिलहाल कुमाऊ क्षेत्र मे खतरे मे है जिसकी वजह पाईन इनवेजन, आग और विखंडन है) जिसको जल्द से जल्द बचाने की आवश्यकता है

4000 फीट की ऊचाई पर पृकृति के इस अनोखे सम्मेलन को 'सौदरयीकरण' की आड़ मे नष्ट होने का खतरा है।

लगभग INR 6-7 करोड़ की लागत पर सरकारी प्राधिकरणों का सातताल लेक और जंगलो के आस-पास की जगह को विकसित करने की योजना है जिसमे दुकाने, पारकिग, बच्चो का पारक, व्यू पौइट और वृक्षारोपण आदि शामिल है। यह सब ‘लेक साइड डेवलपमेंट’ की आड़ मे है।

इस पृस्ताव से सातताल के अंदर बहुत बड़ी आपदा हो सकती है। जिसे जल्द ही रोकने की जरूरत है। यह सिरफ एक परियोजना के बारे में नहीं है यह जंगल में रहने वाले हजा़रों पृजातियों के जीव- जन्तु और पेड़ पौधों के घर को बचाने की बात है

हमें लोगों की ताकत की जरूरत है जिससे कि हम अपनी दरख्वास्त और मज़बूत कर सके सरकारी दफ्तरों के लिए, ताकि वो सातताल को कंजरवेशन रिज़रव घोषित करें और ऐसा कोई भी कारय न होने दे जिससे कि आस- पास की जगह को हानि पहुंचे। यदि सातताल को कंज़रवेशन रिज़रव का दरजा मिलता है तो उससे क्षेत्र के आस-पास की जगह को बचाने में मदद मिलेगी

 

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https://www.iucn.org/downloads/natural_solutions_pas__health_and_well_being.pdf

https://www.jstor.org/stable/26267704?seq=1#metadata_info_tab_contents

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CMO Uttrakhand
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CCF Nainital Uttarakhand
CCF Nainital Uttarakhand
CCF Biodiversity Nainital Uttarakhand
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CCF Forest Training Academy Haldwani Uttarakhand
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Chairman State Biodiversity Board Dehradun uttarakhand
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