

सेना के रिटायर्ड अफ़सर की गुहार ताकि उनकी ज़मीन का पंजीकरण हो जो 25 साल से रुका है


सेना के रिटायर्ड अफ़सर की गुहार ताकि उनकी ज़मीन का पंजीकरण हो जो 25 साल से रुका है
समस्या
देश के लिए लड़ने वाले, भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड अफ़सर कृष्णमूर्ति ने 1995 में उत्तरी बेंगलुरु के वडेराहल्ली गांव में 20 गुंठा (आधी एकड़) ज़मीन हासिल की थी।
तकनीकी कारणों के चलते ज़मीन का रजिस्ट्रेशन 25 सालों से रुका हुआ है। अधिकारी बता नहीं पाते कि ये तकनीकी कारण क्या हैं।
इस ज़मीन को अपने नाम कराने की कोशिश में कृष्णमूर्ति जी ने अपनी एड़ियाँ घिस दी हैं। अपने जीवन भर की कमाई उन्होंने दलालों और एजेंट के पीछे खर्च कर दी, इस उम्मीद में कि उनकी ज़मीन के दस्तावेज़ों का पंजीकरण करवा दिया जाएगा।
उनका परिवार इस मामले को कर्नाटक हाईकोर्ट भी ले गया। हाई कोर्ट ने बेंगलुरु के उपायुक्त (डीसी) के कार्यालय को मामले की समीक्षा करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश को 1.5 साल हो चुके हैं। इस दौरान हमने कई आरटीआई (RTI) भी दायर की, लेकिन इस मुद्दे को अधिकारियों के संज्ञान में लाने में असफल रहे।
मैं राजस्व मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वे बेंगलुरू डीसी कार्यालय में राजस्व विभाग के अधिकारियों को मामले की समीक्षा करने और इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने का निर्देश दें।
केस की पूरी डीटेल-
i) बेंगलुरु स्पेशल डीसी में केस फाइल - आरआरटीवीजी 136(3) एनएसीआर04/2018-19
ii) कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय - रिट याचिका आदेश - 2017 का WP46964 / 2017 की रिट अपील WA6697
iii) उत्तरी बेंगलुरु के वडेराहल्ली गांव में सर्वे नंबर 36 में जमीन।
iv) वडेराहल्ली गांव में मूल रूप से सरकार द्वारा 1978 में कई लोगों को जमीन दी गई थी, जब वह क्षेत्र 'गोमाला' था - एक सामान्य चारागाह।

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समस्या
देश के लिए लड़ने वाले, भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड अफ़सर कृष्णमूर्ति ने 1995 में उत्तरी बेंगलुरु के वडेराहल्ली गांव में 20 गुंठा (आधी एकड़) ज़मीन हासिल की थी।
तकनीकी कारणों के चलते ज़मीन का रजिस्ट्रेशन 25 सालों से रुका हुआ है। अधिकारी बता नहीं पाते कि ये तकनीकी कारण क्या हैं।
इस ज़मीन को अपने नाम कराने की कोशिश में कृष्णमूर्ति जी ने अपनी एड़ियाँ घिस दी हैं। अपने जीवन भर की कमाई उन्होंने दलालों और एजेंट के पीछे खर्च कर दी, इस उम्मीद में कि उनकी ज़मीन के दस्तावेज़ों का पंजीकरण करवा दिया जाएगा।
उनका परिवार इस मामले को कर्नाटक हाईकोर्ट भी ले गया। हाई कोर्ट ने बेंगलुरु के उपायुक्त (डीसी) के कार्यालय को मामले की समीक्षा करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश को 1.5 साल हो चुके हैं। इस दौरान हमने कई आरटीआई (RTI) भी दायर की, लेकिन इस मुद्दे को अधिकारियों के संज्ञान में लाने में असफल रहे।
मैं राजस्व मंत्री से अनुरोध करता हूं कि वे बेंगलुरू डीसी कार्यालय में राजस्व विभाग के अधिकारियों को मामले की समीक्षा करने और इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने का निर्देश दें।
केस की पूरी डीटेल-
i) बेंगलुरु स्पेशल डीसी में केस फाइल - आरआरटीवीजी 136(3) एनएसीआर04/2018-19
ii) कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय - रिट याचिका आदेश - 2017 का WP46964 / 2017 की रिट अपील WA6697
iii) उत्तरी बेंगलुरु के वडेराहल्ली गांव में सर्वे नंबर 36 में जमीन।
iv) वडेराहल्ली गांव में मूल रूप से सरकार द्वारा 1978 में कई लोगों को जमीन दी गई थी, जब वह क्षेत्र 'गोमाला' था - एक सामान्य चारागाह।

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13 अक्टूबर 2021 पर पेटीशन बनाई गई