कदम बढ़ाएं, हिसार को राजधानी बनाएं

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आज हरियाणा के नीति-निर्माता हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद की दुहाई देकर समृद्ध हरियाणा की मनगढंत तस्वीर रच रहें हैं। लेकिन इसके भीतर अगर देखा जाए तो यह तस्वीर और साफ़ होगी। सिर्फ गुरुग्राम और फ़रीदाबाद हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में एक तिहाई से अधिक का योगदान देते हैं। यह आंकड़ा राज्य में असमान विकास की छोटी सी गवाही देता है। गुरुग्राम में भी हरियाणा से ज्यादा अन्य प्रदेश के लोगों को रोज़गार मुहैया होता है। इन सब समस्याओं को केंद्र में रखते हुए ठन्डे बस्ते में जा चुके हिसार को नयी राजधानी बनाने के प्रस्ताव को मैंने आगे रखा है। हमें हिसार को हरियाणा की नयी राजधानी बनाने के प्रस्ताव के तर्कों को गहराई से समझने की आवश्यकता है।

चंडीगढ़ क्यों नहीं?

आज हरियाणा को चंडीगढ़ से वो लाभ नहीं मिल रहा जो किसी भी राजधानी से उस राज्य को होता है। साझा राजधानी चंडीगढ़ में आज 8 पदों में सिर्फ 1 पद पर हरियाणवी युवा को रोज़गार मिला हुआ है। कोई भी व्यक्ति आज चंडीगढ़ जाएगा तो उसे वहां हरियाणा की संस्कृति का थोड़ा सा भी अंश नहीं दिखेगा। पंजाब पुनर्निर्माण अधिनियम, 1966 के सेक्शन 4 के अंतर्गत चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। जिस कारण आज चंडीगढ़ पर हमारा पूर्ण अधिकार नहीं है और उसे हम राजधानी के रूप में विकसित भी नहीं कर पा रहे हैं। उदहारण के लिए पिछले वर्ष जब हमारे मुख्यमंत्री जी ने चण्डीगढ़ के विकास की रूप रेखा तैयार करने के लिए कहा था तो पंजाब ने उसे सिरे से नकार दिया। परिणामस्वरूप न हमारे युवाओं के लिए वहां रोज़गार उत्पन्न हो पा रहा और न ही चंडीगढ़ से हम कोई ख़ास आर्थिक लाभ हो रहा है। इसके उलट हम चंडीगढ़ पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च कर रहें हैं।

ऐसी राजधानी का क्या फ़ायदा ? जिससे हमें आर्थिक लाभ नहीं, जहाँ हमारे युवाओं को रोज़गार नहीं और जहाँ हमारी संस्कृति नहीं। बल्कि हमें एक ऐसी राजधानी चाहिए जिसे हमें अपने हिसाब से विकसित करने की आज़ादी हो ताकि निवेश वहां आकर्षित हो और रोज़गार उत्पन हो सके।

गुरुग्राम या फ़रीदाबाद क्यों नहीं?

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि गुरुग्राम या फ़रीदाबाद जैसी पहले से विकसित जगह को क्यों न नयी राजधानी बनाया जाए, बजाय कि नया ढांचा खड़ा करने के। गुरुग्राम जैसी जगह को राजधानी न बनाने के बहुत तर्क मौजूद हैं। जैसा कि मैंने पहले बताया था, हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में गुरुग्राम और फ़रीदाबाद एक तिहाई से अधिक के योगदान देते है, जबकि बाकी क्षेत्रों का हिस्सा बहुत न्यूनतम है। ऐसी स्थिति में अगर गुरुग्राम जैसी जगह को राजधानी बनाया जाता है तो यह राज्य में असमान विकास की खाई को और गहरा कर देगा। एक तर्क यह भी है सी गुरुग्राम पहले ही अनियोजित विकास की मार झेल रहा है न तो यहाँ जगह है और सबसे ज़्यादा प्रदूषण भी यहीं हैं। अगर गुरुग्राम को राजधानी बनाया भी जाता है तो वहां उत्पन होने वाली नौकरिया ज्यादा हरियाणा के बाहर के लोगों को मिलेगी जैसा की अभी हो रहा है।

हिसार क्यों?

नयी राजधानी की दौड़ में हिसार का नाम सबसे आगे आता है क्योंकि हिसार के पास वे सभी संसाधन हैं जो एक क्षेत्र को राजधानी बनाने के लिए ज़रूरी है। सबसे पहले तो हिसार हरियाणा के मध्य में स्थित है जिसके कारण प्रदेश के किसी भी कोने से लोग यहाँ आसानी से आ सकते हैं। दूसरा, हिसार के पास वे सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं जो एक राजधानी बनाने के लिए ज़रूरी है। उदहारण के तौर पर यहाँ प्रयाप्त मात्रा में सरकारी और पंचायती भूमि उपलब्ध है जिसपर राजधानी के लिए ज़रूरी इमारतों का निर्माण किया जा सके। साथ ही हिसार में हवाई अड्डे, दुरुस्त रेल सेवा, बस सेवा और अच्छी सड़कों का जाल बिछा हुआ है। रीजनल प्लान, 2001 के अंतर्गत हिसार को दिल्ली के काउंटर-मैगनेट एरिया का दर्जा दिया गया है, यानी की वह क्षेत्र जहाँ उद्योग विकास और रोज़गार सृजन की सम्पूर्ण संभावनाए हैं। जयपुर ने यह करके भी दिखाया है। इतना ही नहीं दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत रेवाड़ी-हिसार औद्योगिक क्षेत्र के विकास लिए भारत सरकार द्वारा औद्योगिक विकास के लिए यहाँ आएगा साथ ही जापान सरकार द्वारा मात्र 0.1% ब्याज दर पर निवेश किया जाएगा। यह हरियाणा के औद्योगिक विकास का एक सुनहरा मौका है।


राजीव-लोंगोवाल एकॉर्ड, 1985

राजीव-लोंगोवाल एकॉर्ड के अनुसार चंडीगढ़ पंजाब को दिया जाना था और सौतलुज-यमुना लिंक नहर का पानी और हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को मिलने थे। लेकिन देशहित में देखते हुए, हम सिर्फ सतलुज यमुना नहर के पानी की प्रस्ताव रख रहे हैं। इसके लिए लम्बी लड़ाई मेरे दादा जी जननायक चौ. भजन लाल जी ने लड़ी और उसे एक मुकाम तक भी पहुँचाया। अब समय आ गया है हम उनके इस अधूरे सपने का पूरा करें। सतलुज-यमुना लिंक कैनाल हरियाणा को मिलने से जल अभाव से ग्रस्त क्षेत्रों को राहत की सांस देगा।


हिसार को हरियाणा कि राजधानी बनने के फ़ायदे

हिसार को नयी राजधानी बनाने से सिर्फ़ हिसार के ही नहीं पूरे हरियाणा के हर तबके को फ़ायदा होगा। चाहे वो किसान हो, व्यापारी हो, या फ़िर महिला, युवा, बुज़ुर्ग, श्रमिक हो – सब को इससे फ़ायदा मिलेगा। राज्य और राष्ट्रीय स्तर से पैसा हिसार में विकास कार्यों के लिए आएगा। चंडीगढ़ के बदले सतलुज-यमुना के पानी से किसानों की पानी की समस्या पर पूर्ण विराम लगेगा। साथ ही हिसार में कृषि विश्विद्यालय को बढ़ावा मिलेगा जो वहां पर कृषि नवाचार के अवसरों को प्रोत्साहित करेगा। इतिहास गवाह है की जब भी नयी राजधानी बनी हैं, वहां राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर से निवेश आया है। ये कदम हरियाणा में उद्योग क्रांति का जनक होगा, जो लाखों रोज़गार उत्पन करेगा। युवाओं को नौकरी की तालाश में देश के अलग-अलग कोनों में नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें अपने ही प्रदेश में आराम से नौकरी मिल जाएगी।

हमारा एक अलग उच्च न्यायालय हिसार में होगा जो राज्य के 8 लाख पेंडिंग केस के जल्द निवारण पर ज़ोर देगा और यह कानून व्यवस्था में सुधार के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हिसार में अनेकों प्रकार का निर्माण कार्य शुरू होगा जो हमारे श्रमिकों को ऊँचे दर पर रोज़गार देगा। जब यहाँ नयी राजधानी के लिए गवर्नर हाउस, हाई कोर्ट और अन्य इमारतें बनेगी तो यह मौसमी बेरोज़गारी को भी ख़त्म करने में बहुत सहायक होगा क्योंकि अलग-अलग समय पर हमारे श्रमिकों को विभिन्न प्रकार के उद्योगों में रोज़गार मिलेगा। राष्ट्रिय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर से स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निवेश आएगा तो हमारे बुज़ुर्गों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी।

इस सबको संक्षिप्त शब्दों में कहें तो हमारे नागरिकों का जीवन स्तर सुधरेगा, जो हमारे मानव विकास के लक्ष्यों को पूरा करेगा।

हिसार राजधानी कैसे बनेगा?

अब इसमें सबसे महत्वपूर्ण तर्क ये भी उठता है कि क्या यह मुमकिन है? इतिहास में ऐसे बहुत कम मौके देखे गए हैं, जब एक राज्य ने अपनी राजधानी बदली हो बशर्ते नए राज्य के निर्माण की स्थिति में, जैसा आंध्रा प्रदेश में हुआ या फ़िर एक नया शहर बसाकर उसे राजधानी घोषित किया गया हो, जैसा छत्तीसगढ़ में हुआ। जानकार बताते है नयी राजधानी बनाना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, वो भी ऐसी स्थिति में जब आपके राज्य का विकास थम गया हो। राजधानी बनाने के खर्च को पूरा करने के केंद्र सरकार द्वारा आंध्रा प्रदेश की नई राजधानी बनाने के लिए जो फार्मूला अपनाया गया, उसे अपनाने पर ज़ोर दिया जाएगा। आंध्रा प्रदेश की ही तरह नयी राजधानी के खर्च को पूरा करने के लिए हिसार कैपिटल बांड भी निकाले जा सकते हैं। चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार की प्रॉपर्टी के बदले केंद्र सरकार या पंजाब सरकार द्वारा उसका उचित मुआवज़ा लिया जाएगा।

कुछ लोग मेरी इस मांग को चुनावी पैंतरा भी बता रहे हैं। लेकिन सिर्फ़ इतना भर कह के हम हरियाणा में विकास को चुनौतियों से आँख नहीं मूँद सकते। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है लोगों को एकत्रित आवाज़ में नीति-निर्माताओं के कानों तक यह बात पहुँचाना कि अब बस बहुत हुआ, हमे रोज़गार चाहिए, अधिक आय और अच्छा जीवन स्तर चाहिए न की सिर्फ़ लुभावने वादे।