🌳 हमारे जंगलों को बचाइए! कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ वन भूमि की नीलामी तुरंत रोकी जाए!


🌳 हमारे जंगलों को बचाइए! कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ वन भूमि की नीलामी तुरंत रोकी जाए!
समस्या
🌳 हमारे जंगलों को बचाइए! कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ वन भूमि की नीलामी तुरंत रोकी जाए! 🌳
प्रिय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों,
हम आप सभी से अपील करते हैं कि हैदराबाद स्थित कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ प्राकृतिक वनभूमि को विनाश से बचाने में हमारा साथ दें। यह क्षेत्र केवल एक हरित क्षेत्र नहीं, बल्कि हज़ारों पेड़, सैकड़ों वन्यजीवों और असंख्य पक्षियों का घर है। यह क्षेत्र हैदराबाद की जैव विविधता का अभिन्न हिस्सा है।
हाल ही में तेलंगाना सरकार के एक निकाय — Telangana State Industrial Infrastructure Corporation (TSIIC) द्वारा इस जंगल को नीलाम कर औद्योगिक विकास के लिए बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक 2,42,000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं — और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
यह सिर्फ एक जंगल नहीं कट रहा — हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य कट रहा है।
❌ यह नीलामी कई पर्यावरणीय और संवैधानिक कानूनों का उल्लंघन करती है:
वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के बिना अनुमति के पेड़ काटना गैरकानूनी है।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इन जंगलों में रहने वाले जीवों की रक्षा अनिवार्य है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत किसी भी बड़े भूमि उपयोग परिवर्तन से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA) और जनसुनवाई आवश्यक है।
यह कदम संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का भी उल्लंघन करता है, जो स्वच्छ पर्यावरण को मौलिक अधिकार मानता है।
📢 हमारी माँग:
हम भारत सरकार, तेलंगाना राज्य सरकार, पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) और संबंधित न्यायिक संस्थानों से यह मांग करते हैं:
- कांचा गाचीबोवली की वन भूमि की नीलामी को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- इस भूमि को संरक्षित वन घोषित किया जाए।
- पहले से काटे गए पेड़ों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- जंगल की पुनर्व्यवस्था (reforestation) और जैव विविधता की रक्षा हेतु ठोस योजना लागू की जाए।
🙏 हम आपसे अनुरोध करते हैं:
👉 इस याचिका पर हस्ताक्षर करें
👉 अपने दोस्तों, परिवार, और सोशल मीडिया पर साझा करें
👉 अपनी आवाज़ उठाएं — क्योंकि जब जंगल चुप होते हैं, तब इंसानों को बोलना होता है।
आज नहीं जागे — तो कल शायद जंगल न बचे।
#SaveKanchaForest #ProtectNature #StopDeforestation #VoiceForTrees

31
समस्या
🌳 हमारे जंगलों को बचाइए! कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ वन भूमि की नीलामी तुरंत रोकी जाए! 🌳
प्रिय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों,
हम आप सभी से अपील करते हैं कि हैदराबाद स्थित कांचा गाचीबोवली की 400+ एकड़ प्राकृतिक वनभूमि को विनाश से बचाने में हमारा साथ दें। यह क्षेत्र केवल एक हरित क्षेत्र नहीं, बल्कि हज़ारों पेड़, सैकड़ों वन्यजीवों और असंख्य पक्षियों का घर है। यह क्षेत्र हैदराबाद की जैव विविधता का अभिन्न हिस्सा है।
हाल ही में तेलंगाना सरकार के एक निकाय — Telangana State Industrial Infrastructure Corporation (TSIIC) द्वारा इस जंगल को नीलाम कर औद्योगिक विकास के लिए बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक 2,42,000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं — और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
यह सिर्फ एक जंगल नहीं कट रहा — हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य कट रहा है।
❌ यह नीलामी कई पर्यावरणीय और संवैधानिक कानूनों का उल्लंघन करती है:
वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के बिना अनुमति के पेड़ काटना गैरकानूनी है।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इन जंगलों में रहने वाले जीवों की रक्षा अनिवार्य है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत किसी भी बड़े भूमि उपयोग परिवर्तन से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA) और जनसुनवाई आवश्यक है।
यह कदम संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का भी उल्लंघन करता है, जो स्वच्छ पर्यावरण को मौलिक अधिकार मानता है।
📢 हमारी माँग:
हम भारत सरकार, तेलंगाना राज्य सरकार, पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) और संबंधित न्यायिक संस्थानों से यह मांग करते हैं:
- कांचा गाचीबोवली की वन भूमि की नीलामी को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।
- इस भूमि को संरक्षित वन घोषित किया जाए।
- पहले से काटे गए पेड़ों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
- जंगल की पुनर्व्यवस्था (reforestation) और जैव विविधता की रक्षा हेतु ठोस योजना लागू की जाए।
🙏 हम आपसे अनुरोध करते हैं:
👉 इस याचिका पर हस्ताक्षर करें
👉 अपने दोस्तों, परिवार, और सोशल मीडिया पर साझा करें
👉 अपनी आवाज़ उठाएं — क्योंकि जब जंगल चुप होते हैं, तब इंसानों को बोलना होता है।
आज नहीं जागे — तो कल शायद जंगल न बचे।
#SaveKanchaForest #ProtectNature #StopDeforestation #VoiceForTrees

31
पेटीशन को शेयर करें
5 अप्रैल 2025 पर पेटीशन बनाई गई
