सियासत में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और भागेदारी के लिए जरुरी पॉलिटिकल फ्रेमवर्क


सियासत में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण और भागेदारी के लिए जरुरी पॉलिटिकल फ्रेमवर्क
समस्या
लेनिन रघुवंशी, महिलाधिकार विशेषज्ञ एवं कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित ने कहा कि “अपनी ज़िन्दगी के अनुभव व 30 साल से ऊपर सामाजिक कार्य के बाद यह स्पष्ट है कि निर्णय व उसको लागू करने में बिना महिलाओ के भागीदारी के न ही हिंसा खत्म की जा सकती है और न ही युद्ध खत्म किया जा सकता है| सबसे बड़ी बात महिला भागीदारी के बिना न्याय पर आधारित शांतिपूर्ण व स्थायी विकास पर आधारित समाज व बहुलतावादी लोकतंत्र की स्थापना असंभव है| इसी पोलिटिकल फ्रेमवर्क में भारतीय सियासत में महिलाओ को 33 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए|
महिला कैंडिडेट के जीतने की उम्मीद बहुत कम होती है और वह अपने घरेलू काम के बीच राजनीति में एक पुरुष के मुकाबले समय नहीं दे पाती हैं। यह बात गलत है। जब आप चुनाव लड़ते हैं तो पार्टी की बात होती है, एजेंडा की बात होती है और व्यक्तिगत कैंडिडेट की बात होती है। महिला या पुरुष की नहीं।
एक महिला कैंडिडेट को अपने क्षेत्र में एक पुरुष कैंडिडेट के मुकाबले ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पुरुष कैंडिडेट को घर के अंदर नहीं जा सकते। एक महिला कैंडिडेट बाहर भी सभा करती है और लोगों के घर के अंदर जाकर महिलाओं से भी मिलती है|
जब राजनीति में महिला भागीदारी की बात आती है तो आंकड़ें बेहद निराशाजनक होते है| 16वी लोक सभा में सिर्फ़ 14.3 % महिला चुनकर संसद में गयी| देश की आधी आबादी राजनीति में भी हाशिये पर है जहाँ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक 11 महिला सांसद चुनी गई जबकि संसद में अरुणांचल प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मणिपुर,मिज़ोरम और सिक्किम से कोई महिला प्रतिनिधि नहीं है|
यह पेटीशन डबलिन यूनिवर्सिटी की ग्लोबल फेलो सुश्री प्रोमा रे चौधरी के शोध भारतीय राजनीतिक दलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना की सिफ़ारिश और वाराणसी में मानवाधिकार जन निगरानी समिति द्वारा आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा में वक्ता के सुझाव पर आधारित है| साथ की अख़बार में प्रकाशित ख़बर के कुछ अंश को भी पेटीशन में शामिल किया गया है|
मेरे पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और मेरे साथ सभी राजनैतिक दल से यह मांग करे की महिला आरक्षण बिल को पारित करने में समर्थन दे और साथ ही अपनी पार्टी में पोलिटिकल फ्रेमवर्क बनाये जिससे राजनीति में महिलाओं की सशक्त और निर्णायक भागीदारी हो सके|
#महिलाभागेदारी #समानताकीओर
समस्या
लेनिन रघुवंशी, महिलाधिकार विशेषज्ञ एवं कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित ने कहा कि “अपनी ज़िन्दगी के अनुभव व 30 साल से ऊपर सामाजिक कार्य के बाद यह स्पष्ट है कि निर्णय व उसको लागू करने में बिना महिलाओ के भागीदारी के न ही हिंसा खत्म की जा सकती है और न ही युद्ध खत्म किया जा सकता है| सबसे बड़ी बात महिला भागीदारी के बिना न्याय पर आधारित शांतिपूर्ण व स्थायी विकास पर आधारित समाज व बहुलतावादी लोकतंत्र की स्थापना असंभव है| इसी पोलिटिकल फ्रेमवर्क में भारतीय सियासत में महिलाओ को 33 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए|
महिला कैंडिडेट के जीतने की उम्मीद बहुत कम होती है और वह अपने घरेलू काम के बीच राजनीति में एक पुरुष के मुकाबले समय नहीं दे पाती हैं। यह बात गलत है। जब आप चुनाव लड़ते हैं तो पार्टी की बात होती है, एजेंडा की बात होती है और व्यक्तिगत कैंडिडेट की बात होती है। महिला या पुरुष की नहीं।
एक महिला कैंडिडेट को अपने क्षेत्र में एक पुरुष कैंडिडेट के मुकाबले ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। पुरुष कैंडिडेट को घर के अंदर नहीं जा सकते। एक महिला कैंडिडेट बाहर भी सभा करती है और लोगों के घर के अंदर जाकर महिलाओं से भी मिलती है|
जब राजनीति में महिला भागीदारी की बात आती है तो आंकड़ें बेहद निराशाजनक होते है| 16वी लोक सभा में सिर्फ़ 14.3 % महिला चुनकर संसद में गयी| देश की आधी आबादी राजनीति में भी हाशिये पर है जहाँ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सबसे अधिक 11 महिला सांसद चुनी गई जबकि संसद में अरुणांचल प्रदेश, हिमांचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, मणिपुर,मिज़ोरम और सिक्किम से कोई महिला प्रतिनिधि नहीं है|
यह पेटीशन डबलिन यूनिवर्सिटी की ग्लोबल फेलो सुश्री प्रोमा रे चौधरी के शोध भारतीय राजनीतिक दलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना की सिफ़ारिश और वाराणसी में मानवाधिकार जन निगरानी समिति द्वारा आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा में वक्ता के सुझाव पर आधारित है| साथ की अख़बार में प्रकाशित ख़बर के कुछ अंश को भी पेटीशन में शामिल किया गया है|
मेरे पेटीशन पर हस्ताक्षर करें और मेरे साथ सभी राजनैतिक दल से यह मांग करे की महिला आरक्षण बिल को पारित करने में समर्थन दे और साथ ही अपनी पार्टी में पोलिटिकल फ्रेमवर्क बनाये जिससे राजनीति में महिलाओं की सशक्त और निर्णायक भागीदारी हो सके|
#महिलाभागेदारी #समानताकीओर
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2 मार्च 2020 पर पेटीशन बनाई गई