

साहबी नदी और मसानी बैराज को बचाइए आज साहबी को बचा लेंगे, तो कल हमारे बच्चे हमें याद रखेंग
समस्या
साहबी नदी और मसानी बैराज केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी विरासत और आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं। वर्षों से यह क्षेत्र भूजल पुनर्भरण, कृषि, जैव विविधता और हजारों लोगों के जीवन का आधार रहा है। लेकिन आज यह प्राकृतिक धरोहर सीवरेज के बढ़ते प्रवाह, प्रदूषण और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है।
ग्राम खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव द्वारा वर्षों से इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है। जनहित याचिकाओं, शिकायतों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक लड़ाई पहुंचाकर उन्होंने साहबी नदी और मसानी बैराज को बचाने की मुहिम को आगे बढ़ाया है। यह संघर्ष किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, किसानों, ग्रामीणों और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों का संघर्ष है।
आज आवश्यकता है कि मसानी बैराज को उसके पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और जैविक महत्व को देखते हुए तत्काल "वेटलैंड" घोषित किया जाए और उसे कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। इससे न केवल पक्षियों, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि भूजल और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
साहबी नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अनुपचारित अथवा मानकों से कम गुणवत्ता वाले सीवरेज जल के प्रवाह पर पूर्ण रोक लगाई जानी चाहिए। स्वच्छ जल हर नागरिक का अधिकार है और किसी भी नदी को सीवरेज ढोने का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता।
इसके साथ ही साहबी नदी और मसानी बैराज में जल छोड़ने वाले सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों (STP) पर रियल टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी हो सके और जनता भी पारदर्शी रूप से इसकी जानकारी प्राप्त कर सके।
आज यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य, स्वच्छ जल, किसानों की आजीविका और प्राकृतिक धरोहर को बचाने का प्रश्न है। यदि आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
आइए, साहबी नदी और मसानी बैराज को बचाने की इस जन मुहिम में अपनी आवाज जोड़ें। इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और सरकारों से मांग करें कि वे इस ऐतिहासिक नदी और महत्वपूर्ण वेटलैंड को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाएं।

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समस्या
साहबी नदी और मसानी बैराज केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी विरासत और आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं। वर्षों से यह क्षेत्र भूजल पुनर्भरण, कृषि, जैव विविधता और हजारों लोगों के जीवन का आधार रहा है। लेकिन आज यह प्राकृतिक धरोहर सीवरेज के बढ़ते प्रवाह, प्रदूषण और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है।
ग्राम खरखड़ा निवासी प्रकाश यादव द्वारा वर्षों से इस मुद्दे को लगातार उठाया जा रहा है। जनहित याचिकाओं, शिकायतों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक लड़ाई पहुंचाकर उन्होंने साहबी नदी और मसानी बैराज को बचाने की मुहिम को आगे बढ़ाया है। यह संघर्ष किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, किसानों, ग्रामीणों और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों का संघर्ष है।
आज आवश्यकता है कि मसानी बैराज को उसके पर्यावरणीय, पारिस्थितिक और जैविक महत्व को देखते हुए तत्काल "वेटलैंड" घोषित किया जाए और उसे कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाए। इससे न केवल पक्षियों, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि भूजल और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
साहबी नदी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अनुपचारित अथवा मानकों से कम गुणवत्ता वाले सीवरेज जल के प्रवाह पर पूर्ण रोक लगाई जानी चाहिए। स्वच्छ जल हर नागरिक का अधिकार है और किसी भी नदी को सीवरेज ढोने का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता।
इसके साथ ही साहबी नदी और मसानी बैराज में जल छोड़ने वाले सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों (STP) पर रियल टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए ताकि पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी हो सके और जनता भी पारदर्शी रूप से इसकी जानकारी प्राप्त कर सके।
आज यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य, स्वच्छ जल, किसानों की आजीविका और प्राकृतिक धरोहर को बचाने का प्रश्न है। यदि आज हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।
आइए, साहबी नदी और मसानी बैराज को बचाने की इस जन मुहिम में अपनी आवाज जोड़ें। इस याचिका पर हस्ताक्षर करें और सरकारों से मांग करें कि वे इस ऐतिहासिक नदी और महत्वपूर्ण वेटलैंड को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाएं।

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1 जून 2026 पर पेटीशन बनाई गई