

एक नाबालिग बच्ची व उसके परिवार की अस्मिता से खिलवाड़ करने वाला दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी हो
समस्या
समक्ष
आदरणीय , महामहिम राष्ट्रपति, गणराज्य भारत।
प्रसंग - आपके विशेष अधिकारों द्वारा पालम विहार थाना गुुरुग्राम (हरियाणा) F.I.R 147/15 धारा पॉक्सो 13(C), आई. टी. एक्ट 67(B), 120(B), 469, 471 को निर्देशित करने हेतु।
विषय - दस वर्षीय बच्ची के अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले उपरोक्त F.I.R में आरोपी दीपक चौरसिया सहित मीडिया कर्मियों के विरूद्ध गिरफ़्तारी न करने के कारण हरियाणा पुलिस को निर्देशित करने हेतु।
परम आदरणीय महोदय
सविनय निवेदन यह है कि जागरण मंच एक (सामाजिक संस्था) है जो समय समय पर समाज के हित से जुड़े सेवा कार्य समाज में करती रहती है। अधोहस्ताक्षरित एनसीआर अध्यक्ष (हरिशंकर कुमार) के रूप कार्यरत हैं एवं हरियाणा पुलिस एवं मीडिया के सांठ गांठ के कारण गरीब परिवार न्याय से वंचित है एवं प्रताड़ित हो रहा है।
2013 में अभियुक्त दीपक चौरसिया एवं अन्य प्रभावशाली पत्रकारों ने इंडिया न्यूज, न्यूज 24, न्यूज नेशन चैनल ने गुरुग्राम के एक परिवार सहित उनकी 10 वर्षीय बालिका के घर के निजी वीडियो को तोड़ मरोड़ कर बड़े ही अभद्र, अश्लील एवं गैर क़ानूनी तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर चैनल पर प्रसारित किया गया था।
पीड़ित परिवार के शिकायत पर वर्ष 2013 में गुरुग्राम पालम विहार थाना में उन मीडिया कर्मियों के विरुद्ध धारा पॉक्सो, आई. टी एक्ट व अन्य धाराओं के तहत जीरो एफ.आई.आर दर्ज करवाई थी। लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ते हुए उस जीरो F.I.R को नोएडा पुलिस को ट्रांसफर कर दिये जाने के बाद नोएडा पुलिस ने भी कोई कार्यवाही नही किया था। उसी दौरान उस जीरो F.I.R को रद्द कराने हेतु इलाहाबाद हाइकोर्ट में दायर याचिका पर इंडिया न्यूज और न्यूज़ नेशन के एडिटर दीपक चौरसिया,अनिल कुल श्रेष्ठ की याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कोई राहत नही दिया था। इसके बावजूद दीपक चौरसिया व उसके सहयोगियों पर नबम्बर 2014 तक कोई कार्रवाई नहीं की गई । जिससे आहत होकर उस पीड़ित परिवार को सुप्रीमकोर्ट में जाना पड़ा तब जाकर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद गुरुग्राम पुलिस ने फाइनल F.I.R 147/15 धारा पॉक्सो 13(C), आईटी एक्ट 67(B),120 (B), 469, 471 के रूप में दर्ज तो कर लिया लेकिन 2015 से जुलाई 2017 तक पुलिस ने उन सभी आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं किया बल्कि मामले में अंट्रेस रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया था यह कहकर कि आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
जिसके बाद उस पीड़िता परिवार द्वारा सहयोग मांगने पर सामाजिक संस्था जनजागरण मंच का सहयोग लेकर वरिष्ठ अधिकारी से मिलकर संबंधित जांच अधिकारी की लापरवाही बताकर रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर पुनः जांच की मांग की गई। जिसपर अधिकारियों ने मामले को रीओपन तो कर दिया गया लेकिन केस की फाइल करीब तीन महीने तक एक टेबल से दूसरे टेबल तक घूमती रही। पुलिस की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका लगाने के बाद कार्यवाही हुई। हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर हरियाणा सरकार व पुलिस को फटकार लगाते हुए 4 सप्ताह में जांच पूरी करने के आदेश के बाद तक कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से पीड़िता पक्ष को पुलिस के विरूद्ध हाईकोर्ट के अवमानना का केस फाइल करनी पड़ी। जिसके बाद हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद पुलिस अपनी जांच को निपटाने के आश्य से एक बार फिर इस मामले में अंट्रेस रिपोर्ट लिखकर इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष रिपोर्ट सौंपकर मामले को बन्द कर दिया था।
जिसके बाद पीड़िता परिवार सामाजिक संस्था (जनजागरण मंच) के सहयोग से चंडीगढ़ हाईकोर्ट में पुलिस के रिपोर्ट के विरूद्ध और मामले को सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में पिटिशन लगाने पर उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया। हरियाणा सरकार द्वारा दाखिल नोटिस के जवाब से असहमत होकर पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर को तलब कर पर्याप्त सबूतों के आधार पर आरोपियों के विरूद्ध चार्जशीट दायर किए जाने तक चंडीगढ़ उच्च न्यायालय ने मामले को अपने निगरानी में रखते हुए पुलिस को कार्रवाई के लिए आदेश दिया। तदउपरांत जनवरी 2020 में पुलिस अपने चार्ज शीट में इंडिया न्यूज, न्यूज़ 24 चैनल द्वारा प्रसारित कार्यक्रम के आधार पर आरोपियों को पोक्सो एक्ट 14 (1) 23 (1) आईटी एक्ट 67(B), 120(B) 469,471 के तहत दोषी मानती है। उन सभी पत्रकारों को नामित किया गया है और आरोप पत्र भी डाला है परन्तु दवाब के कारण एक भी आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार नही किया है यह हवाला देकर मीडिया से जुड़े होंने के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी से देश मे कानून व्यबस्था खराब हो सकती है। जिस पॉक्सो एक्ट में यह प्रावधान है कि F.I.R दर्ज होने के बाद 90 दिन के भीतर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही किया । अब जब सात वर्ष के बाद उपरोक्त धारा के तहत आरोपियों को पुलिस दोषी मानती है लेकिन उन सभी को गिरफ्तार करके जिस प्रकार पूर्व से ही आरोपियों को बचने का मौका दिया जाता रहा उसी प्रकार एक बार फिर पुलिस ने सभी अपराधी को अपने बचाव का मौका दिया है ताकि किसी प्रकार केस की कड़ी को कमजोर किया । ऐसे में एक गरीब पीड़िता व उसके परिवार को हरियाणा पुलिस द्वारा न्याय मिलना नही दिख रहा है।
पुरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है की मीडिया की आड़ में इन अपराधियों ने पीड़ित के ऊपर निरंतर अत्याचार किया है और अभी तक कोई कार्यवाही ही नहीं हुए है जो पीड़िता के अधिकारों का सीधा हनन है।
आपसे प्रार्थना है की आप अपने विशेष अधिकार एवं संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने का निर्देश दें एवं गरीब परिवार को न्याय दे

समस्या
समक्ष
आदरणीय , महामहिम राष्ट्रपति, गणराज्य भारत।
प्रसंग - आपके विशेष अधिकारों द्वारा पालम विहार थाना गुुरुग्राम (हरियाणा) F.I.R 147/15 धारा पॉक्सो 13(C), आई. टी. एक्ट 67(B), 120(B), 469, 471 को निर्देशित करने हेतु।
विषय - दस वर्षीय बच्ची के अस्मिता से खिलवाड़ करने वाले उपरोक्त F.I.R में आरोपी दीपक चौरसिया सहित मीडिया कर्मियों के विरूद्ध गिरफ़्तारी न करने के कारण हरियाणा पुलिस को निर्देशित करने हेतु।
परम आदरणीय महोदय
सविनय निवेदन यह है कि जागरण मंच एक (सामाजिक संस्था) है जो समय समय पर समाज के हित से जुड़े सेवा कार्य समाज में करती रहती है। अधोहस्ताक्षरित एनसीआर अध्यक्ष (हरिशंकर कुमार) के रूप कार्यरत हैं एवं हरियाणा पुलिस एवं मीडिया के सांठ गांठ के कारण गरीब परिवार न्याय से वंचित है एवं प्रताड़ित हो रहा है।
2013 में अभियुक्त दीपक चौरसिया एवं अन्य प्रभावशाली पत्रकारों ने इंडिया न्यूज, न्यूज 24, न्यूज नेशन चैनल ने गुरुग्राम के एक परिवार सहित उनकी 10 वर्षीय बालिका के घर के निजी वीडियो को तोड़ मरोड़ कर बड़े ही अभद्र, अश्लील एवं गैर क़ानूनी तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर चैनल पर प्रसारित किया गया था।
पीड़ित परिवार के शिकायत पर वर्ष 2013 में गुरुग्राम पालम विहार थाना में उन मीडिया कर्मियों के विरुद्ध धारा पॉक्सो, आई. टी एक्ट व अन्य धाराओं के तहत जीरो एफ.आई.आर दर्ज करवाई थी। लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ते हुए उस जीरो F.I.R को नोएडा पुलिस को ट्रांसफर कर दिये जाने के बाद नोएडा पुलिस ने भी कोई कार्यवाही नही किया था। उसी दौरान उस जीरो F.I.R को रद्द कराने हेतु इलाहाबाद हाइकोर्ट में दायर याचिका पर इंडिया न्यूज और न्यूज़ नेशन के एडिटर दीपक चौरसिया,अनिल कुल श्रेष्ठ की याचिका को खारिज करते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कोई राहत नही दिया था। इसके बावजूद दीपक चौरसिया व उसके सहयोगियों पर नबम्बर 2014 तक कोई कार्रवाई नहीं की गई । जिससे आहत होकर उस पीड़ित परिवार को सुप्रीमकोर्ट में जाना पड़ा तब जाकर सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान के बाद गुरुग्राम पुलिस ने फाइनल F.I.R 147/15 धारा पॉक्सो 13(C), आईटी एक्ट 67(B),120 (B), 469, 471 के रूप में दर्ज तो कर लिया लेकिन 2015 से जुलाई 2017 तक पुलिस ने उन सभी आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं किया बल्कि मामले में अंट्रेस रिपोर्ट लगाकर बंद कर दिया था यह कहकर कि आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला।
जिसके बाद उस पीड़िता परिवार द्वारा सहयोग मांगने पर सामाजिक संस्था जनजागरण मंच का सहयोग लेकर वरिष्ठ अधिकारी से मिलकर संबंधित जांच अधिकारी की लापरवाही बताकर रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर पुनः जांच की मांग की गई। जिसपर अधिकारियों ने मामले को रीओपन तो कर दिया गया लेकिन केस की फाइल करीब तीन महीने तक एक टेबल से दूसरे टेबल तक घूमती रही। पुलिस की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका लगाने के बाद कार्यवाही हुई। हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर हरियाणा सरकार व पुलिस को फटकार लगाते हुए 4 सप्ताह में जांच पूरी करने के आदेश के बाद तक कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से पीड़िता पक्ष को पुलिस के विरूद्ध हाईकोर्ट के अवमानना का केस फाइल करनी पड़ी। जिसके बाद हाईकोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद पुलिस अपनी जांच को निपटाने के आश्य से एक बार फिर इस मामले में अंट्रेस रिपोर्ट लिखकर इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष रिपोर्ट सौंपकर मामले को बन्द कर दिया था।
जिसके बाद पीड़िता परिवार सामाजिक संस्था (जनजागरण मंच) के सहयोग से चंडीगढ़ हाईकोर्ट में पुलिस के रिपोर्ट के विरूद्ध और मामले को सीबीआई से जांच कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में पिटिशन लगाने पर उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया। हरियाणा सरकार द्वारा दाखिल नोटिस के जवाब से असहमत होकर पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने पुलिस कमिश्नर को तलब कर पर्याप्त सबूतों के आधार पर आरोपियों के विरूद्ध चार्जशीट दायर किए जाने तक चंडीगढ़ उच्च न्यायालय ने मामले को अपने निगरानी में रखते हुए पुलिस को कार्रवाई के लिए आदेश दिया। तदउपरांत जनवरी 2020 में पुलिस अपने चार्ज शीट में इंडिया न्यूज, न्यूज़ 24 चैनल द्वारा प्रसारित कार्यक्रम के आधार पर आरोपियों को पोक्सो एक्ट 14 (1) 23 (1) आईटी एक्ट 67(B), 120(B) 469,471 के तहत दोषी मानती है। उन सभी पत्रकारों को नामित किया गया है और आरोप पत्र भी डाला है परन्तु दवाब के कारण एक भी आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार नही किया है यह हवाला देकर मीडिया से जुड़े होंने के कारण आरोपियों की गिरफ्तारी से देश मे कानून व्यबस्था खराब हो सकती है। जिस पॉक्सो एक्ट में यह प्रावधान है कि F.I.R दर्ज होने के बाद 90 दिन के भीतर आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही किया । अब जब सात वर्ष के बाद उपरोक्त धारा के तहत आरोपियों को पुलिस दोषी मानती है लेकिन उन सभी को गिरफ्तार करके जिस प्रकार पूर्व से ही आरोपियों को बचने का मौका दिया जाता रहा उसी प्रकार एक बार फिर पुलिस ने सभी अपराधी को अपने बचाव का मौका दिया है ताकि किसी प्रकार केस की कड़ी को कमजोर किया । ऐसे में एक गरीब पीड़िता व उसके परिवार को हरियाणा पुलिस द्वारा न्याय मिलना नही दिख रहा है।
पुरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है की मीडिया की आड़ में इन अपराधियों ने पीड़ित के ऊपर निरंतर अत्याचार किया है और अभी तक कोई कार्यवाही ही नहीं हुए है जो पीड़िता के अधिकारों का सीधा हनन है।
आपसे प्रार्थना है की आप अपने विशेष अधिकार एवं संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने का निर्देश दें एवं गरीब परिवार को न्याय दे

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