ड्राइवर भाइयों को सम्मानजनक बेतन और निर्धारित ड्यूटी आवर्स की व्यवस्था की जाए।

समस्या

परमादरणीय देश के प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों।

नमस्कार 

मैं यहां परेशान हूँ तथा आपलोगों की कुशलता की खबरें पढ़ता-सुनता-देखता रहता हूँ।आप लोग मुझे नही जानते लेकिन मैं आप लोगो को अच्छी तरह जानता हूँ, आप लोगो की तरफ दिन रात टकटकी निगाहों से इस उम्मीद में देखता हूँ ता कि आप लोगों की नज़र एक दिन हमारी दुर्दशा पर पड़ सके। लेकिन आपलोगों को फुर्सत ही कहां? हम जैसे अभागा लोगों को जानने की, समझने की।अब आप में से कोई अकबर तो हैं नहीं जो भेष बदलकर जनता के बारे में जान सकें। 

खैर छोड़िए इन बातों से क्या लाभ। अगर मैं अपना परिचय थोड़े शब्दों में दूं तो मैं वही ड्राइवर हूं जो आपको सही समय पर रोज दफ्तर पहुँचाता हूँ, सुई से लेकर जहाज, आपलोगों की हर जरूरत एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता हूँ और मैं वही ड्राइवर हूँ जो रोड पर रहते हुए सुनिक्षित करता हूँ कि देश के सभी लोग रात में सुरक्षित अपने घर पहुँच जाए। हम इतने अभागे हैं इतना कुछ करने के बाद भी हमे हर जगह जालिलियत का सामना करना पड़ता है । चाहें पुलिस हो, RTO हो, मोटर मालिक हो या आम लोग सभी हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

आपलोगों के हाथों मे देश की व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है। लेकिन हम ड्राइवरो के लिए आपलोगों ने जो व्यवस्था बनाई है उसमे हमे पूरी बैमानी झलकती है। आपलोगो ने मिनीमम वेजेज एक्ट बनाया है लेकिन ड्राइवरों को कितनी पगार मिलती ये आप कभी जानने की कोसिस नही किए, जान भी गए तो उन्हें पूरी पगार दिलाने के लिए कोई ठोश कारवाई नही किए। ड्राइवरी एक सोफेस्टिकेटेड जॉब है, पलक झपकते ही कई लोगो की जान जा सकती है। 
अब हम ड्राइवर भाइयों ने चुप्पी तोड़ने और आपलोगों से सीधे पत्र-व्यवहार करने का फैसला किया हैं। हम अगले ढाई महीनों तक हर सफ्ताह आपलोगों को एक पत्र लिखेंगे जिसमे हमारी अलग अलग समस्याओं का जिक्र होगा। इन पत्रों पर पूरे देश से ड्राइवरो का हस्ताक्षर आनलाइन और ऑआफलाइन दोनो तरीकों से कराया जाएगा। इस पत्र से हम अपनी सबसे पहली मांग जो कि पगार और ड्यूटी आवर्स से संबंधित है आपलोगों के सामने रख रहे हैं। आपलोगों से विनम्र निवेदन हैं कृपया आपलोग अपने अपने स्तर पर हमारी मांगों पर विचार करें और समाधान देने की कोसिस करे।

प्रधानमंत्री जी सरकार के स्तर पर कड़े फैसले ले सकते हैं, यदि ड्राइवरो की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए उनके पास कम समय है तो सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर सकते हैं जो ड्राइवरो की समस्याओं के समाधान पर सरकार को सुझाव दे सके। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ड्राइवरो की समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ड्राइवरो की समस्याओं से संबंधित सभी पक्षो को कोर्ट में तलब कर सकते हैं। राज्य के मुख्यमंत्री अपने राज्य के स्तर पर फैसले ले सकते हैं, मिनिमम वेजेज बढ़ा सकते है। उन्हें लागू करा सकते हैं। हम सभी पार्टियों के प्रामुखो से निवेदन करते हैं कि हमारे मुद्दों को आपने 2019 लोकसभा चुनाव मेनिफेस्टो में जगह दे और सत्ता में आने के 3 महीने के अंदर हमारी मांगे मानने का वचन दे।

मेहनताना और ड्यूटी आवर्स से संबंधित मांगे इस प्रकार हैं।
(1) ड्राइवर का काम किसी डॉक्टर, इंजीनियर या टीचर से कम न आका जाए। गाड़ी चलाते समय ड्राइवर को हर पल चौकन्न रहना पड़ता है, लगातार कई घंटे गाड़ी चलानी पड़ती है। रास्ते मे न सोने की न ही खाने की सही व्यवस्था मिलती है। रोड पर ही सोना और खाना बनाना पड़ता है। ड्राइवर को हर वक़्त डर के साए में रहना पड़ता है, कही पुलिस वाले न मिल जाए, कही ट्रैफिक वाले न मिल जाए, कही गाड़ी का माल चोरी न हो जाए,कही एक्सीडेंट न हो जाए, कही एक्सीडेंट होने के बाद लोग पीट पीट कर न मार डाले इतियादि। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ड्राइवर की नियुनतम मजदूरी 20,000 प्रति माह होनी चाहिए और साथ मे PF, ESI, बोनस की पूरी सुविधा मिलनी चाहिए। सेलरी बैंक एकाउंट में ही आनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह छठे बेतन आयोग के बाद एक बार मे 20,000 बढ़ सकती है तो देश के ड्राइवरो की पगार महज 20,000 क्यो नही की जा सकती।

(2) ड्राइवर हर वक़्त खतरे के साए में जीता है, चलता है, रहता है। उसके एक्सीडेंट की संभावनाएं सबसे ज्यादे रहती हैं। एक्सीडेंट के बाद उसके बाल बच्चे रोड पर आ जाते हैं, भीख मांगने को मजबूर हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हर ड्राइवर का 20 लाख का बीमा होना चाहिए। गाड़ी के एक्सीडेंट की स्तिथि में अगर ड्राइवर के मृत्यु की पुष्टि हो जाती है तो बिना किसी अन्य जाँच के उसके परिवार को 15 दिनों के अंदर 20 लाख दिया जाना चाहिए ।रिटायरमेंट की स्तिथि में भी सम असुरड 20 लाख मिलना चाहिए। एक्सीडेंट की स्तिथि में ड्राइवर का इलाज अच्छे से अच्छे प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में होना चाहिए, जिसका पूरा खर्च सरकार को उठाना होगा।

(3)रिटायरमेंट के बाद ड्राइवर की जिंदिगी जिंदा लाश जैसी हो जाती है, उनकी आंखें कमजोर हो जाती है, स्पाइन में दर्द की बीमारी सुरु हो जाती है जिससे वो कोई दूसरा काम करने लायक नही रहते। इसे ध्यान मे रखते हुए ड्राइवरो को सरकार की तरफ से रिटायरमेंट के बाद हर महीने 10,000 पेंशन मिलनी चाहिए।

(4) पुलिस, RTO की प्रताड़ना, ट्रैफिक जाम, समय पर माल पहुँचाने का प्रेशर, मालिक की डांट की वजह से ड्राइवर को लगातार 16-16 घंटे गाड़ी चलाना पड़ता है, जिससे उनकी नींद पूरी नही होती और वो हसदो का शिकार हो जाता है। ज्यादे थकान, टेंशन की वजह से ड्राइवर नसें का शिकार भी हो जाता है जैसे कि गाड़ी चलाने वक़्त नींद से बचने के लिए तम्बाकू, गुटके, बीड़ी, सिगरेट का सेवन करने लगता है। थकान और टेंशन की स्तिथि में जब नींद नही आती है तो मदीरा का सेवन करने लगता है। इन परिस्थितियों से ड्राइवर को बचाने के लिए जरूरी है कि उसके ड्यूटी का समय प्रतिदिन 8 घंटे निर्धारित किया जाए। इसके अलावा 4 घंटे अतरिक्त ओवरटाइम का प्रावधान किया जा सकता है। ओवरटाइम का रेट डबल होना चाहिए।

(5) ड्राइवर अपने परिवार से लगातार दूर रहता है। उसे हर साल 15 दिन इमरजेंसी और 30 दिन की नार्मल पेड लीव मिलनी चाहिए। इसके अलावा एक दिन सफ्ताहिक छुट्टी दी जानि चाहिए।

 

ड्राइवरो की तरफ सेइस तरह के कुल 10 पत्र आपलोगों के पास भेजे जाएंगे जिसपर पूरे देश से ड्राइवरो का हस्ताक्षर होगा

आपलोगों का सुभचिंतक,
देश की अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर ढोने वाला एक अभागा ड्राइवर।
ड्राइवर मित्र
12/93 A, G/F, Shop No.4, Shastri Nagar, Delhi-110031
9958571318; Email- drivermitr@gmail.com

नोट: यह कोई चेतावनी नही बल्कि देश के राजाओं से विनम्र निवेदन है। यदि हमारी मांगें जल्दी नही पूरी होती हैं तो हम एक दिसंबर 2019 से बिना किसी को नुकसान पहुचाए सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। जिसके लिए हम अभी से अपनी छुट्टियां बचाना सुरु कर रहें हैं।

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ड्राइवर मित्रपेटीशन स्टार्टर
यह पेटीशन 318 हस्ताक्षर जुट गई

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परमादरणीय देश के प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों।

नमस्कार 

मैं यहां परेशान हूँ तथा आपलोगों की कुशलता की खबरें पढ़ता-सुनता-देखता रहता हूँ।आप लोग मुझे नही जानते लेकिन मैं आप लोगो को अच्छी तरह जानता हूँ, आप लोगो की तरफ दिन रात टकटकी निगाहों से इस उम्मीद में देखता हूँ ता कि आप लोगों की नज़र एक दिन हमारी दुर्दशा पर पड़ सके। लेकिन आपलोगों को फुर्सत ही कहां? हम जैसे अभागा लोगों को जानने की, समझने की।अब आप में से कोई अकबर तो हैं नहीं जो भेष बदलकर जनता के बारे में जान सकें। 

खैर छोड़िए इन बातों से क्या लाभ। अगर मैं अपना परिचय थोड़े शब्दों में दूं तो मैं वही ड्राइवर हूं जो आपको सही समय पर रोज दफ्तर पहुँचाता हूँ, सुई से लेकर जहाज, आपलोगों की हर जरूरत एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता हूँ और मैं वही ड्राइवर हूँ जो रोड पर रहते हुए सुनिक्षित करता हूँ कि देश के सभी लोग रात में सुरक्षित अपने घर पहुँच जाए। हम इतने अभागे हैं इतना कुछ करने के बाद भी हमे हर जगह जालिलियत का सामना करना पड़ता है । चाहें पुलिस हो, RTO हो, मोटर मालिक हो या आम लोग सभी हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

आपलोगों के हाथों मे देश की व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है। लेकिन हम ड्राइवरो के लिए आपलोगों ने जो व्यवस्था बनाई है उसमे हमे पूरी बैमानी झलकती है। आपलोगो ने मिनीमम वेजेज एक्ट बनाया है लेकिन ड्राइवरों को कितनी पगार मिलती ये आप कभी जानने की कोसिस नही किए, जान भी गए तो उन्हें पूरी पगार दिलाने के लिए कोई ठोश कारवाई नही किए। ड्राइवरी एक सोफेस्टिकेटेड जॉब है, पलक झपकते ही कई लोगो की जान जा सकती है। 
अब हम ड्राइवर भाइयों ने चुप्पी तोड़ने और आपलोगों से सीधे पत्र-व्यवहार करने का फैसला किया हैं। हम अगले ढाई महीनों तक हर सफ्ताह आपलोगों को एक पत्र लिखेंगे जिसमे हमारी अलग अलग समस्याओं का जिक्र होगा। इन पत्रों पर पूरे देश से ड्राइवरो का हस्ताक्षर आनलाइन और ऑआफलाइन दोनो तरीकों से कराया जाएगा। इस पत्र से हम अपनी सबसे पहली मांग जो कि पगार और ड्यूटी आवर्स से संबंधित है आपलोगों के सामने रख रहे हैं। आपलोगों से विनम्र निवेदन हैं कृपया आपलोग अपने अपने स्तर पर हमारी मांगों पर विचार करें और समाधान देने की कोसिस करे।

प्रधानमंत्री जी सरकार के स्तर पर कड़े फैसले ले सकते हैं, यदि ड्राइवरो की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए उनके पास कम समय है तो सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर सकते हैं जो ड्राइवरो की समस्याओं के समाधान पर सरकार को सुझाव दे सके। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ड्राइवरो की समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ड्राइवरो की समस्याओं से संबंधित सभी पक्षो को कोर्ट में तलब कर सकते हैं। राज्य के मुख्यमंत्री अपने राज्य के स्तर पर फैसले ले सकते हैं, मिनिमम वेजेज बढ़ा सकते है। उन्हें लागू करा सकते हैं। हम सभी पार्टियों के प्रामुखो से निवेदन करते हैं कि हमारे मुद्दों को आपने 2019 लोकसभा चुनाव मेनिफेस्टो में जगह दे और सत्ता में आने के 3 महीने के अंदर हमारी मांगे मानने का वचन दे।

मेहनताना और ड्यूटी आवर्स से संबंधित मांगे इस प्रकार हैं।
(1) ड्राइवर का काम किसी डॉक्टर, इंजीनियर या टीचर से कम न आका जाए। गाड़ी चलाते समय ड्राइवर को हर पल चौकन्न रहना पड़ता है, लगातार कई घंटे गाड़ी चलानी पड़ती है। रास्ते मे न सोने की न ही खाने की सही व्यवस्था मिलती है। रोड पर ही सोना और खाना बनाना पड़ता है। ड्राइवर को हर वक़्त डर के साए में रहना पड़ता है, कही पुलिस वाले न मिल जाए, कही ट्रैफिक वाले न मिल जाए, कही गाड़ी का माल चोरी न हो जाए,कही एक्सीडेंट न हो जाए, कही एक्सीडेंट होने के बाद लोग पीट पीट कर न मार डाले इतियादि। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ड्राइवर की नियुनतम मजदूरी 20,000 प्रति माह होनी चाहिए और साथ मे PF, ESI, बोनस की पूरी सुविधा मिलनी चाहिए। सेलरी बैंक एकाउंट में ही आनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह छठे बेतन आयोग के बाद एक बार मे 20,000 बढ़ सकती है तो देश के ड्राइवरो की पगार महज 20,000 क्यो नही की जा सकती।

(2) ड्राइवर हर वक़्त खतरे के साए में जीता है, चलता है, रहता है। उसके एक्सीडेंट की संभावनाएं सबसे ज्यादे रहती हैं। एक्सीडेंट के बाद उसके बाल बच्चे रोड पर आ जाते हैं, भीख मांगने को मजबूर हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हर ड्राइवर का 20 लाख का बीमा होना चाहिए। गाड़ी के एक्सीडेंट की स्तिथि में अगर ड्राइवर के मृत्यु की पुष्टि हो जाती है तो बिना किसी अन्य जाँच के उसके परिवार को 15 दिनों के अंदर 20 लाख दिया जाना चाहिए ।रिटायरमेंट की स्तिथि में भी सम असुरड 20 लाख मिलना चाहिए। एक्सीडेंट की स्तिथि में ड्राइवर का इलाज अच्छे से अच्छे प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में होना चाहिए, जिसका पूरा खर्च सरकार को उठाना होगा।

(3)रिटायरमेंट के बाद ड्राइवर की जिंदिगी जिंदा लाश जैसी हो जाती है, उनकी आंखें कमजोर हो जाती है, स्पाइन में दर्द की बीमारी सुरु हो जाती है जिससे वो कोई दूसरा काम करने लायक नही रहते। इसे ध्यान मे रखते हुए ड्राइवरो को सरकार की तरफ से रिटायरमेंट के बाद हर महीने 10,000 पेंशन मिलनी चाहिए।

(4) पुलिस, RTO की प्रताड़ना, ट्रैफिक जाम, समय पर माल पहुँचाने का प्रेशर, मालिक की डांट की वजह से ड्राइवर को लगातार 16-16 घंटे गाड़ी चलाना पड़ता है, जिससे उनकी नींद पूरी नही होती और वो हसदो का शिकार हो जाता है। ज्यादे थकान, टेंशन की वजह से ड्राइवर नसें का शिकार भी हो जाता है जैसे कि गाड़ी चलाने वक़्त नींद से बचने के लिए तम्बाकू, गुटके, बीड़ी, सिगरेट का सेवन करने लगता है। थकान और टेंशन की स्तिथि में जब नींद नही आती है तो मदीरा का सेवन करने लगता है। इन परिस्थितियों से ड्राइवर को बचाने के लिए जरूरी है कि उसके ड्यूटी का समय प्रतिदिन 8 घंटे निर्धारित किया जाए। इसके अलावा 4 घंटे अतरिक्त ओवरटाइम का प्रावधान किया जा सकता है। ओवरटाइम का रेट डबल होना चाहिए।

(5) ड्राइवर अपने परिवार से लगातार दूर रहता है। उसे हर साल 15 दिन इमरजेंसी और 30 दिन की नार्मल पेड लीव मिलनी चाहिए। इसके अलावा एक दिन सफ्ताहिक छुट्टी दी जानि चाहिए।

 

ड्राइवरो की तरफ सेइस तरह के कुल 10 पत्र आपलोगों के पास भेजे जाएंगे जिसपर पूरे देश से ड्राइवरो का हस्ताक्षर होगा

आपलोगों का सुभचिंतक,
देश की अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर ढोने वाला एक अभागा ड्राइवर।
ड्राइवर मित्र
12/93 A, G/F, Shop No.4, Shastri Nagar, Delhi-110031
9958571318; Email- drivermitr@gmail.com

नोट: यह कोई चेतावनी नही बल्कि देश के राजाओं से विनम्र निवेदन है। यदि हमारी मांगें जल्दी नही पूरी होती हैं तो हम एक दिसंबर 2019 से बिना किसी को नुकसान पहुचाए सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। जिसके लिए हम अभी से अपनी छुट्टियां बचाना सुरु कर रहें हैं।

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फैसला लेने वाले

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सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों
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