लोगों को हानिकारक पैक्ड खाने से बचाएं: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने पर चेतावनी का लेबल


लोगों को हानिकारक पैक्ड खाने से बचाएं: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने पर चेतावनी का लेबल
समस्या
प्रिय स्वास्थ्य मंत्री,
लोगों को हानिकारक पैक्ड खाने से बचाएं: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने पर चेतावनी का लेबल लगाएँ
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने के प्रभाव को कम करने के लिए, भारतीय खाद्य और सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड खाद्य उत्पादों के फ्रंट ऑफ पैकिंग लेबल (FOPL) के मॉडल की शुरुआत की है। FSSAI ने 'हेल्थ स्टार रेटिंग' (HSR) को शामिल करने के लिए एक मसौदा विनियमन जारी करने का निर्णय लिया है। खाद्य उत्पाद को उसकी सामग्री के आधार पर 0.5 से 5 स्टार तक दिया जाएगा।
हमारा मानना है कि यह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री के दबाव में किया जा रहा है, जिन्होंने पहले ट्रैफिक लाइट लेबल का विरोध किया और अब स्टार्स के साथ खुश हैं।
मीटिंग के कार्यवृत्त से पता चलता है कि FSSAI ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों को अनदेखा कर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की राय को ज़्यादा महत्व दिया है।
वैज्ञानिक प्रमाण इस बात का समर्थन करते हैं कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने के उत्पादों पर एक ‘चेतावनी’ का लेबल दर्ज किया जाना चाहिए, और ऐसा करने से हानिकारक उत्पादों का उपभोग भी कम किया जा सकता है।
लिंक: https://journals.plos.org/plosmedicine/article?id=10.1371/journal.pmed.1003015
इस मुद्दे के महत्व को समझते हुए, कई देशों ने पैकेज्ड फ़ूड पर चेतावनी लेबल को अनिवार्य बनाया है जिनमें चिली, पेरू, इज़राइल, मैक्सिको, उरुग्वे शामिल हैं, और जल्द ही ब्राजील, कोलंबिया, अर्जेंटीना और वेनेजुएला में भी ऐसे लेबल पेश किए जाएंगे।
वैज्ञानिक साक्ष्य खाद्य उत्पादों पर ‘हेल्थ स्टार्स’ का समर्थन नहीं करते हैं।
लिंक: https://onlinelibrary.wiley.com/doi/epdf/10.1111/jhn.12758
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड जनता में कैंसर सहित कई और गैर संचारी रोग (NCDs) भी पैदा कर रहे हैं।
लिंक: https://www.napiindia.in/docs/Concept-Note-for-regulating-UPF.pdf
हम हमेशा से स्वस्थ और पौष्टिक खाना खाते आए हैं, और हमारा खाना हमेशा संतुलित रहा है। लेकिन हाल के दिनों में, अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड का चलन बढ़ा है और विशेष रूप से बाज़ारों में अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड भारी मात्रा में बेचे जाने लगा है। इन खाद्य उत्पादों को ज़ोरो शोरों से मार्केट किया जाता है जिससे देश के बच्चों और वयस्कों दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
लिंक https://www.ijsr.net/archive/v5i9/ART20161741.pdf
कंपनियां उपभोक्ताओं को लुभाने और बच्चों को इन उत्पादों के आदी बनाने के लिए अत्यधिक मात्रा में चीनी, नमक (सोडियम) और सैचुरेटेड फ़ैट का उपयोग करती है। हमारे देश में खाने में चीनी, नमक/सोडियम और सैचुरेटेड फैट की अधिकता के कारण डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी व लीवर की बीमारियां आम होती जा रही हैं।
लोगों में जागरूकता की कमी है और लोग खाने के हानिकारक प्रभावों को समझे बिना इसका सेवन कर रहे हैं। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को बताए कि कौन सा खाना सुरक्षित है और कौन सा नहीं। आज जब देश की खाद्य नियामक संस्था इस संबंध में फैसला ले रही है तो देश के लोगों का स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता होनी चाहिए न कि कंपनियों का मुनाफा।
इसलिए, हम भारत के लोग, हमारे बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पादों का उपभोग करते हुए चाहते हैं कि:
1. FSSAI को खाद्य उद्योग की भागीदारी के बिना निर्णय लेने के लिए कहा जाए
2. पैक किए गए खाद्य उत्पादों पर चेतावनी का लेबल लगाया जाए जिसपर खाने के हानिकारक तत्वों व उनके दुष्प्रभाव का साफ़ उल्लेख हो

समस्या
प्रिय स्वास्थ्य मंत्री,
लोगों को हानिकारक पैक्ड खाने से बचाएं: स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने पर चेतावनी का लेबल लगाएँ
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने के प्रभाव को कम करने के लिए, भारतीय खाद्य और सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड खाद्य उत्पादों के फ्रंट ऑफ पैकिंग लेबल (FOPL) के मॉडल की शुरुआत की है। FSSAI ने 'हेल्थ स्टार रेटिंग' (HSR) को शामिल करने के लिए एक मसौदा विनियमन जारी करने का निर्णय लिया है। खाद्य उत्पाद को उसकी सामग्री के आधार पर 0.5 से 5 स्टार तक दिया जाएगा।
हमारा मानना है कि यह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री के दबाव में किया जा रहा है, जिन्होंने पहले ट्रैफिक लाइट लेबल का विरोध किया और अब स्टार्स के साथ खुश हैं।
मीटिंग के कार्यवृत्त से पता चलता है कि FSSAI ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ताओं के हितों को अनदेखा कर खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की राय को ज़्यादा महत्व दिया है।
वैज्ञानिक प्रमाण इस बात का समर्थन करते हैं कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाने के उत्पादों पर एक ‘चेतावनी’ का लेबल दर्ज किया जाना चाहिए, और ऐसा करने से हानिकारक उत्पादों का उपभोग भी कम किया जा सकता है।
लिंक: https://journals.plos.org/plosmedicine/article?id=10.1371/journal.pmed.1003015
इस मुद्दे के महत्व को समझते हुए, कई देशों ने पैकेज्ड फ़ूड पर चेतावनी लेबल को अनिवार्य बनाया है जिनमें चिली, पेरू, इज़राइल, मैक्सिको, उरुग्वे शामिल हैं, और जल्द ही ब्राजील, कोलंबिया, अर्जेंटीना और वेनेजुएला में भी ऐसे लेबल पेश किए जाएंगे।
वैज्ञानिक साक्ष्य खाद्य उत्पादों पर ‘हेल्थ स्टार्स’ का समर्थन नहीं करते हैं।
लिंक: https://onlinelibrary.wiley.com/doi/epdf/10.1111/jhn.12758
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड जनता में कैंसर सहित कई और गैर संचारी रोग (NCDs) भी पैदा कर रहे हैं।
लिंक: https://www.napiindia.in/docs/Concept-Note-for-regulating-UPF.pdf
हम हमेशा से स्वस्थ और पौष्टिक खाना खाते आए हैं, और हमारा खाना हमेशा संतुलित रहा है। लेकिन हाल के दिनों में, अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड का चलन बढ़ा है और विशेष रूप से बाज़ारों में अल्ट्रा प्रासेस्ड फ़ूड भारी मात्रा में बेचे जाने लगा है। इन खाद्य उत्पादों को ज़ोरो शोरों से मार्केट किया जाता है जिससे देश के बच्चों और वयस्कों दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
लिंक https://www.ijsr.net/archive/v5i9/ART20161741.pdf
कंपनियां उपभोक्ताओं को लुभाने और बच्चों को इन उत्पादों के आदी बनाने के लिए अत्यधिक मात्रा में चीनी, नमक (सोडियम) और सैचुरेटेड फ़ैट का उपयोग करती है। हमारे देश में खाने में चीनी, नमक/सोडियम और सैचुरेटेड फैट की अधिकता के कारण डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, किडनी व लीवर की बीमारियां आम होती जा रही हैं।
लोगों में जागरूकता की कमी है और लोग खाने के हानिकारक प्रभावों को समझे बिना इसका सेवन कर रहे हैं। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को बताए कि कौन सा खाना सुरक्षित है और कौन सा नहीं। आज जब देश की खाद्य नियामक संस्था इस संबंध में फैसला ले रही है तो देश के लोगों का स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता होनी चाहिए न कि कंपनियों का मुनाफा।
इसलिए, हम भारत के लोग, हमारे बाजार में उपलब्ध खाद्य उत्पादों का उपभोग करते हुए चाहते हैं कि:
1. FSSAI को खाद्य उद्योग की भागीदारी के बिना निर्णय लेने के लिए कहा जाए
2. पैक किए गए खाद्य उत्पादों पर चेतावनी का लेबल लगाया जाए जिसपर खाने के हानिकारक तत्वों व उनके दुष्प्रभाव का साफ़ उल्लेख हो

पेटीशन बंद हो गई
इस पेटीशन को शेयर करें
फैसला लेने वाले
पेटीशन अपडेट
पेटीशन को शेयर करें
10 अप्रैल 2022 पर पेटीशन बनाई गई