लोकपाल को असरदार बनाएं या फिर व्यस्था को बदलें


लोकपाल को असरदार बनाएं या फिर व्यस्था को बदलें
समस्या
अध्यक्ष, लोकपाल
आपकी वेबसाइट से प्राप्त आंकड़ों से ऐसा प्रतीत होता है कि लोकपाल को पहले वर्ष में केवल 1427 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों का परिणाम इतना असरदार नहीं रहा होगा, तभी नागरिकों ने अगले वर्ष में केवल 110 शिकायतें दर्ज कीं और 2021-22 के पहले छह महीनों में केवल 30 शिकायतें दर्ज कीं।
ऐसा प्रतीत होता है कि लोकपाल बिना किसी जवाबदेही के वरिष्ठ नागरिकों का क्लब बन गया है। हमें यकीन है कि आप जानते हैं कि लोकपाल द्वारा खर्च किए गए 60 करोड़ से अधिक देश के सबसे गरीब व्यक्ति की जेब से आए हैं जो शायद भूख से तड़प रहे हों। लोकपाल की स्थापना एक नागरिक आंदोलन द्वारा बड़ी आशा और प्रयास के साथ की गई थी। लोकपाल का देश में भ्रष्टाचार पर शून्य प्रभाव पड़ा है और वह अपने दयनीय प्रदर्शन से संभवत: अवगत नहीं है। यदि आपको पता चलता है कि आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो आप सभी को या तो अपना कर्तव्य निभाने का तरीका खोजना चाहिए या इस्तीफा दे देना चाहिए। लगता है सिर्फ जस्टिस भोंसले ने अपने अंतरात्मा की आवाज सुनकर इस्तीफा दिया है। ऐसे ऊँचे पदों पर बैठे लोक सेवकों को कम से कम इस स्तर की ईमानदारी तो दिखानी ही चाहिए।
अगर लोकपाल के कामकाज का यह कमतर स्तर जारी रहा तो नागरिकों का सरकार की निगरानी के लिए स्थापित ऐसे संस्थानों पर से विश्वास उठ जाएगा। बिना किसी जवाबदेही के जनता का पैसा खर्च करना स्वीकार्य नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि आप इस पेटीशन का उचित कार्रवाई के साथ जवाब देंगे ताकि ये संस्था मजाक न बने।

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अध्यक्ष, लोकपाल
आपकी वेबसाइट से प्राप्त आंकड़ों से ऐसा प्रतीत होता है कि लोकपाल को पहले वर्ष में केवल 1427 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों का परिणाम इतना असरदार नहीं रहा होगा, तभी नागरिकों ने अगले वर्ष में केवल 110 शिकायतें दर्ज कीं और 2021-22 के पहले छह महीनों में केवल 30 शिकायतें दर्ज कीं।
ऐसा प्रतीत होता है कि लोकपाल बिना किसी जवाबदेही के वरिष्ठ नागरिकों का क्लब बन गया है। हमें यकीन है कि आप जानते हैं कि लोकपाल द्वारा खर्च किए गए 60 करोड़ से अधिक देश के सबसे गरीब व्यक्ति की जेब से आए हैं जो शायद भूख से तड़प रहे हों। लोकपाल की स्थापना एक नागरिक आंदोलन द्वारा बड़ी आशा और प्रयास के साथ की गई थी। लोकपाल का देश में भ्रष्टाचार पर शून्य प्रभाव पड़ा है और वह अपने दयनीय प्रदर्शन से संभवत: अवगत नहीं है। यदि आपको पता चलता है कि आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो आप सभी को या तो अपना कर्तव्य निभाने का तरीका खोजना चाहिए या इस्तीफा दे देना चाहिए। लगता है सिर्फ जस्टिस भोंसले ने अपने अंतरात्मा की आवाज सुनकर इस्तीफा दिया है। ऐसे ऊँचे पदों पर बैठे लोक सेवकों को कम से कम इस स्तर की ईमानदारी तो दिखानी ही चाहिए।
अगर लोकपाल के कामकाज का यह कमतर स्तर जारी रहा तो नागरिकों का सरकार की निगरानी के लिए स्थापित ऐसे संस्थानों पर से विश्वास उठ जाएगा। बिना किसी जवाबदेही के जनता का पैसा खर्च करना स्वीकार्य नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि आप इस पेटीशन का उचित कार्रवाई के साथ जवाब देंगे ताकि ये संस्था मजाक न बने।

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31 जनवरी 2022 पर पेटीशन बनाई गई